दिल्ली की राजनीति में गंभीरता का अभाव: क्यों AAP–BJP की जुगलबंदी में पिस रही है दिल्ली की जनता?

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Ajit Kumar

भारत
दिल्ली की राजनीति में गंभीरता का अभाव: क्यों AAP–BJP की जुगलबंदी में पिस रही है दिल्ली की जनता?

कांग्रेस के ताज़ा बयान से उठे बड़े सवाल

तीसरा पक्ष ब्यूरो पटना,27 नवंबर 2025 — दिल्ली की राजनीति एक बार फिर गरमाई हुई है. कांग्रेस पार्टी ने अपने आधिकारिक X (Twitter) अकाउंट @INCIndia के माध्यम से दिल्ली सरकार और मुख्यमंत्री पर गंभीर सवाल उठाए हैं.दिल्ली कांग्रेस प्रभारी कहा है कि दिल्ली ने एक समय शीला दीक्षित जैसी गंभीर मुख्यमंत्री को देखा है, लेकिन आज हालात बिल्कुल उलट हैं. वर्तमान CM बोलने से पहले सोचती भी नहीं हैं, और प्रशासनिक क्षमता लगभग न के बराबर दिखाई देती है.

इस बयान ने दिल्ली की राजनीति के कई अनदेखे पहलुओं को उजागर कर दिया है—खासकर जनता की मूल समस्याओं, प्रदूषण, प्रशासनिक लापरवाही और AAP–BJP टकराव के बीच फंसे आम आदमी की व्यथा.

शीला दीक्षित का दौर बनाम आज की दिल्ली: तुलना जो चिंतित करती है

कांग्रेस का आरोप सिर्फ राजनीतिक बयान नहीं है, बल्कि दिल्ली के एक लम्बे शासनकाल की तुलना पर आधारित है.
शीला दीक्षित का शासनकाल दिल्ली के बुनियादी ढांचे, मेट्रो विस्तार, सड़कों, पानी, शिक्षा और स्वास्थ्य के मामलों में एक स्थिर और योजनाबद्ध प्रशासन का उदाहरण रहा.

कांग्रेस के मुताबिक, आज दिल्ली में तीन सबसे बड़ी समस्याएँ उभर कर सामने आती हैं.

प्रशासन पर कंट्रोल की कमी

निर्णय लेने में गंभीरता का अभाव

राजनीतिक टकराव के बीच जनता का नुकसान

पार्टी का सीधा आरोप है कि दिल्ली की मौजूदा मुख्यमंत्री कोई भी बयान सोच-समझकर नहीं देतीं, न ही प्रशासनिक मशीनरी उन पर विश्वास करती है. यह बात जनता की परेशानियों को और बढ़ाती है.

दिल्ली में प्रदूषण: हर साल दोहराई जाने वाली त्रासदी

साल दर साल बढ़ता वायु प्रदूषण अब दिल्ली की पहचान बन चुका है.
कांग्रेस के बयान में यह मुद्दा सबसे तीखे शब्दों में उठाया गया कि प्रदूषण जैसे गंभीर मसलों पर जनता की कोई सुनवाई नहीं है.

दिल्ली की वायु गुणवत्ता हर अक्टूबर–नवंबर में गंभीर स्तर से भी नीचे चली जाती है.
हालांकि आप सरकार और केंद्र सरकार दोनों दावा करती हैं कि वे कदम उठा रही हैं, लेकिन आज तक जनता को किसी भी स्तर पर स्थायी समाधान नहीं मिला.

कांग्रेस के अनुसार, असली समस्या ये है कि,

न AAP सरकार अपने वादों पर खरा उतर पा रही है,

न केंद्र में बैठी BJP इस मुद्दे को अपनी प्राथमिकता में रख रही है.

परिणाम?
हर सर्दी दिल्ली की हवा ज़हरीली और दिल्ली की ज़िंदगी मुश्किल.

AAP और BJP की जुगलबंदी’: जनता बीच में पिस रही है

यह आरोप नया नहीं, पर कांग्रेस ने इसे नई धार दी है.
दिल्ली जैसे छोटे लेकिन शक्तिशाली राज्य में दो शक्ति-केंद्र हैं.

चुनी हुई सरकार (AAP)

उपराज्यपाल और केंद्र (BJP)

दोनों के बीच लगातार टकराव चलता रहता है, मगर कांग्रेस का कहना है कि यह टकराव वास्तविक टकराव नहीं, बल्कि जुगलबंदी है.
इस आरोप का अर्थ है कि दोनों पार्टियाँ एक-दूसरे को दोष देकर राजनीतिक लाभ लेती हैं, लेकिन जनता को राहत देने के असली मुद्दों पर चुप रहती हैं.

अधिकारी भी नहीं लेते गंभीरता से? प्रशासनिक अक्षमता पर बड़ा सवाल

INCIndia ने अपने पोस्ट में यह भी आरोप लगाया कि शायद अधिकारी मौजूदा मुख्यमंत्री को गंभीरता से नहीं लेते.
दिल्ली जैसे महानगर में यदि प्रशासनिक तंत्र मुख्यमंत्री के आदेशों पर भरोसा न करे, तो शासन-व्यवस्था चरमरा जाती है.

यह बेहद गंभीर सवाल है क्योंकि,

योजनाओं का क्रियान्वयन रुक जाता है.

जनता से जुड़े फैसलों में देरी होती है.

प्रशासनिक जवाबदेही खत्म होती है.

राजनीतिक बयानबाज़ी हावी होती है.

कांग्रेस का दावा है कि इस कारण दिल्ली की समस्या गवर्नेंस क्राइसिस का रूप ले चुकी है.

बिजली, पानी, सड़कें, स्वास्थ्य: क्या दिल्ली पीछे जा रही है?

हालिया महीनों में दिल्ली को कई मोर्चों पर संघर्ष करना पड़ा है.

पानी की गुणवत्ता व सप्लाई

    दिल्ली में जल संकट लगातार बढ़ रहा है.यमुना प्रदूषण, पाइपलाइन लीकेज, और अनियमित सप्लाई जैसी समस्याएँ आज भी अनसुलझी हैं.

    स्वास्थ्य सुविधाएँ

      मोहल्ला क्लीनिक मॉडल की शुरुआत सराहनीय रही, लेकिन रखरखाव और स्टाफ की कमी की शिकायतें बढ़ चुकी हैं.

      शिक्षा मॉडल

        स्कूलों के बुनियादी ढांचे की तारीफ़ होती है, लेकिन नई रिपोर्टें दिखाती हैं कि कई स्कूलों में स्टाफ, संसाधन और फंडिंग की कमी है.

        ट्रैफिक और सड़कें

          दिल्ली की सड़कें और ट्रैफिक जाम आज भी ज्यों का त्यों.

          कांग्रेस के अनुसार इन सभी समस्याओं का मूल कारण एक है—प्रशासनिक नेतृत्व की कमी.

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          क्या दिल्ली को एक गंभीर, जवाबदेह नेतृत्व की ज़रूरत है?

          INCIndia का यह बयान सिर्फ आलोचना नहीं, बल्कि एक सवाल है.
          क्या दिल्ली को फिर से एक ऐसा नेतृत्व चाहिए जो शीला दीक्षित की तरह गंभीर, संवेदनशील और परिणाम देने वाला हो?

          कांग्रेस का तर्क है कि दिल्ली का भविष्य तभी बेहतर होगा जब.

          राजनीतिक लड़ाई बंद हो

          केंद्र और राज्य मिलकर काम करें

          जनता के मुद्दों को प्राथमिकता मिले

          प्रदूषण, ट्रैफिक, पानी, स्वास्थ्य जैसे मूल विषयों पर ठोस नीति बने

          दिल्ली एक विश्व-स्तरीय शहर बनने में सक्षम है, लेकिन वह क्षमता तभी खुलेगी जब सरकार वक्तव्य नहीं, बल्कि समाधान देगी.

          निष्कर्ष: दिल्ली की जनता बदलाव और जिम्मेदारी दोनों चाहती है

          कांग्रेस ने अपने पोस्ट में जो बातें उठाई हैं, वे दिल्ली की हकीकत से बहुत दूर नहीं हैं.
          चुनावों में किए गए वादे हवा में उड़ जाते हैं और जनता वही पुरानी समस्याओं से जूझती रहती है.

          आज दिल्ली को ऐसी सरकार चाहिए जो.

          बयान नहीं, समाधान दे

          राजनीति नहीं, प्रशासन को प्राथमिकता दे

          टकराव नहीं, तालमेल के साथ काम करे

          यह स्पष्ट है कि दिल्ली की जनता अब सिर्फ बहस और आरोप-प्रत्यारोप नहीं चाहती. वह वास्तविक राहत, स्थायी नीति और जवाबदेही चाहती है.
          और यही वह सवाल है जिसे कांग्रेस ने अपने बयान के माध्यम से एक बार फिर दिल्ली और देश के सामने रख दिया है.

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