दीघा में डॉक्टर संग पुलिस की मारपीट: क्या सम्राट चौधरी के आदेश बेअसर?

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Ajit Kumar

बिहार
दीघा में डॉक्टर संग पुलिस की मारपीट: क्या सम्राट चौधरी के आदेश बेअसर?

पुलिस मैनुअल की खुली धज्जियाँ — एजाज अहमद

तीसरा पक्ष ब्यूरो पटना, 8 दिसंबर 2025 दीघा चेकपोस्ट पर डॉक्टर और उनके ड्राइवर के साथ हुई मारपीट की घटना ने बिहार पुलिस की कार्यशैली, अनुशासन और गृह मंत्रालय की प्रभावकारिता पर गंभीर सवाल खड़ा कर दिया हैं.बिहार प्रदेश राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के प्रवक्ता एजाज अहमद ने इस मामले को लेकर सरकार पर जोरदार हमला बोला है. उनका कहना है कि जब पुलिस ही डॉक्टर और ड्राइवर को पीटकर आम लोगों में डर का माहौल बनाएगी, तो अपराध और अपराधियों पर कार्रवाई की उम्मीद कैसे की जा सकती है?

घटना क्या थी? कैसे शुरू हुआ विवाद?

रविवार, 7 दिसंबर 2025 की रात पटना के दीघा चेकपोस्ट के पास एनएमसीएच के डॉक्टर बीएन चतुर्वेदी अपनी कार से गुजर रहे थे.गाड़ी चला रहे ड्राइवर राजकुमार ने उसी लेन में गलत दिशा में खड़े एक ट्रक को पीछे करने को कहा. इसी बीच ड्यूटी पर मौजूद एसआई उपेंद्र शाह से बहस हो गई. विवाद बढ़ा और पुलिस ने डॉक्टर व ड्राइवर के साथ मारपीट शुरू कर दिया.

डॉक्टर का कॉलर पकड़कर घसीटने का वीडियो भी सामने आया है, जिसे ड्राइवर ने रिकॉर्ड किया था.बाद में पुलिसकर्मियों ने उसका मोबाइल भी छीन लिया और कथित रूप से उसे भी पीटा.

डॉक्टर ने आरोप लगाया है कि,

पुलिसकर्मी ट्रक मालिक से पैसे वसूल रहे थे.

इस कारण सड़क पर जाम की स्थिति बन गई थी.

पुलिस ने मौके पर मौजूद उनकी गाड़ी से 22,000 रुपये निकाल लिए

कुल 6 पुलिसकर्मी मौजूद थे जिन्होंने मिलकर मारपीट किया .

यह दावा और भी गंभीर हो जाता है क्योंकि यह घटना राज्य की राजधानी पटना में घटी है,जहाँ प्रशासनिक सतर्कता सर्वाधिक होनी चाहिए.

सम्राट चौधरी के आदेश का क्या हुआ?

RJD प्रवक्ता एजाज अहमद का कहना है कि गृह मंत्री सम्राट चौधरी के विभाग ने पिछले दिनों स्पष्ट आदेश दिया था कि,

पुलिसकर्मी आम नागरिकों के साथ अच्छा व्यवहार करें,

पुलिस मैनुअल के अनुसार कर्तव्यों का निर्वहन करें,

उल्लंघन की स्थिति में अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी,

लेकिन ताज़ा घटना दिखाती है कि ये आदेश ज़मीन पर प्रभावी नहीं हैं. एजाज अहमद कहते हैं कि,

ऐसा लग रहा है कि पुलिसकर्मियों पर विभागीय आदेशों का कोई असर नहीं है. आदेश सिर्फ कागजों में है, ज़मीन पर पुलिस मनमानी कर रही है.

भ्रष्टाचार पर बड़ा सवाल — बिना घूस काम होगा, पर हुआ क्या?

गृह मंत्री सम्राट चौधरी ने दावा किया था कि अब बिहार में बिना घूस थाना में काम होगा, लेकिन RJD का आरोप है कि यह पूरी तरह फेल हो गया है.
एजाज कहते हैं कि,

दीघा की घटना से साबित हो गया है कि बिहार में भ्रष्टाचार को ही सदाचार और शिष्टाचार का रूप दे दिया गया है. पुलिसकर्मियों को न आदेशों का डर है, न कानून का भय.

डॉक्टर का आरोप कि पुलिसकर्मी ट्रक ड्राइवर से पैसे ले रहे थे, इस बयान को और मजबूती देता है.

अगर पटना में यह हाल है, तो जिलों की स्थिति कैसी होगी?

RJD प्रवक्ता ने कहा कि राजधानी में जहाँ मीडिया, प्रशासन और निगरानी सबसे मजबूत होती है, वहाँ यदि पुलिस मनमानी करे, तो अनुमान लगाया जा सकता है कि दूर-दराज़ जिलों में क्या स्थिति होगी.
उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा है कि,

जब तक सरकार के अंदर बैठे नेता और अधिकारी अपराधियों को संरक्षण देंगे, ऐसी घटनाएं आम लोगों, डॉक्टरों और समाज के प्रतिष्ठित लोगों के साथ होती रहेंगी.

यह वक्तव्य कानून व्यवस्था की समग्र स्थिति पर गंभीर चिंता प्रदर्शित करता है.

वीडियो फुटेज ने खोली पुलिस की असलियत

ड्राइवर द्वारा बनाई गई वीडियो फुटेज—जिसमें डॉक्टर का कॉलर पकड़ कर घसीटना साफ दिख रहा है. उसने पूरे मामले को और भी चौंकाने वाला बना दिया है.
वीडियो से यह भी संकेत मिलता है कि, बात जानबूझकर बढ़ाई गई, पुलिसकर्मियों ने सामूहिक हिंसा की,

मोबाइल छीनकर सबूत नष्ट करने की कोशिश भी हुई, यह व्यवहार न केवल पुलिस मैनुअल, बल्कि कानून और मानवाधिकारों का स्पष्ट उल्लंघन है.

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RJD ने की कार्रवाई की मांग

एजाज अहमद ने इस घटना की कड़ी निंदा करते हुए कहा है कि,

यह अत्याचार और लूट का मामला है. ऐसे पुलिसकर्मियों पर तुरंत सख्त कार्रवाई होनी चाहिए, ताकि जनता का भरोसा restored हो सके.

उन्होंने मुख्यमंत्री और गृह मंत्री से मांग किया है कि , दोषी पुलिसकर्मियों को निलंबित किया जाए,

पूर्ण विभागीय जांच हो, पीड़ित डॉक्टर और ड्राइवर को न्याय मिले,

भ्रष्टाचार और पुलिसिया जुल्म पर जीरो टॉलरेंस की नीति लागू की जाए.

निष्कर्ष: कानून व्यवस्था पर बड़ा प्रश्नचिन्ह

दीघा की घटना ने बिहार पुलिस की छवि को गंभीर रूप से धक्का पहुंचाया है.
जब राजधानी में, पुलिस आदेशों को नजरअंदाज करे
नागरिकों से बदसलूकी करे , रिश्वत, मारपीट और लूट जैसे आरोप लगे
तो यह स्पष्ट संकेत है कि बिहार में कानून व्यवस्था एक चुनौतीपूर्ण मोड़ पर खड़ी है.
समाज के प्रतिष्ठित और सेवा क्षेत्र में कार्यरत डॉक्टर तक सुरक्षित नहीं हैं—यह स्थिति चिंताजनक है.

यदि दोषियों पर तुरंत और कठोर कार्रवाई नहीं होती, तो यह मामला सिर्फ एक घटना नहीं रहेगा, बल्कि बिहार पुलिस की कार्यशैली पर जनता के गहराते अविश्वास का प्रतीक बन जाएगा.

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