भाकपा (माले) महासचिव दीपंकर भट्टाचार्य ने मोदी सरकार को घेरा

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Ajit Kumar

बिहार
भाकपा (माले) महासचिव दीपंकर भट्टाचार्य ने मोदी सरकार को घेरा

बोले ,झूठे घुसपैठ के दावे और वोटर सूची से छेड़छाड़

तीसरा पक्ष ब्यूरो पटना, 23 अगस्त 2025 — बिहार के गयाजी में एक जनसभा को संबोधित करते हुए भाकपा (माले) के महासचिव का. दीपंकर भट्टाचार्य ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर गंभीर आरोप लगाये हैं. उन्होंने कहा कि, बिहार में बांग्लादेशी घुसपैठ का झूठा प्रचार कर केंद्र सरकार अपनी 20 साल की विफलता पर पर्दा डालने की कोशिश कर रही है.

बोले ,झूठे घुसपैठ के दावे और वोटर सूची से छेड़छाड़

दीपंकर भट्टाचार्य ने साफ शब्दों में कहा कि बिहार में चल रही एसआईआर (विशेष पुनरीक्षण अभियान) प्रक्रिया के तहत अब तक एक भी बांग्लादेशी नागरिक की पहचान नहीं हो सका है. इसके बावजूद प्रधानमंत्री बार-बार घुसपैठ के नाम पर लोगों को डराने और गुमराह करने का प्रयास कर रहे हैं.

वोटर लिस्ट से नाम हटाने की साजिश?

भट्टाचार्य ने आरोप लगाया कि एसआईआर की आड़ में सरकार गरीब प्रवासी मजदूरों, महिलाओं और अल्पसंख्यकों को निशाना बना रहा है. मतदाता सूची से इन तबकों के नाम योजनाबद्ध तरीके से हटाया जा रहा हैं. उन्होंने कहा कि झारखंड विधानसभा चुनाव के समय जिस तरह से बांग्लादेशी घुसपैठ का हौवा खड़ा किया गया था. अब वही रणनीति बिहार में भी अपनाई जा रहा है.

भट्टाचार्य ने कहा कि, अब तक कोई घुसपैठ का प्रमाण नहीं मिला है, फिर भी इस मुद्दे को तूल दिया जा रहा है — यह साफ तौर पर लोकतंत्र को कमजोर करने की साजिश है.

वोट चोर, गद्दी छोड़, बना जननारा

वोटर अधिकारों को लेकर भाकपा (माले) द्वारा चलाया जा रहा जनअभियान प्रदेश भर में जोर पकड़ता जा रहा है.वोट चोर, गद्दी छोड़, का नारा अब सिर्फ एक विरोध का स्वर नहीं, बल्कि जनता की मुखर आवाज बन चुका है.

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चुनाव आयोग पर उठाए सवाल

भट्टाचार्य ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़ा किया है. उन्होंने बताया कि चुनाव आयोग के अनुसार भाकपा (माले) के पास करीब 1500 बीएलए-2 (बूथ लेवल एजेंट्स) हैं. जबकि बिहार सीईओ डैशबोर्ड पर 2265 बीएलए-2 को स्वीकृति दी गई दिखाया गया है — जो आंकड़ों में भारी असंतुलन को दर्शाता है.

इसके अलावा उन्होंने बताया कि 25 जून से शुरू एसआईआर के बाद अब तक 1168 आपत्तियां लंबित हैं. जो चुनाव आयोग की कार्यकुशलता पर प्रश्नचिन्ह लगाता है. पार्टी के कार्यकर्ताओं द्वारा दायर दो मामूली आपत्तियों को आधिकारिक रूप से मान्यता दिलवाने में भी 20 दिन लग गया.

आगे उन्होंने कहा कि, यह राजनीतिक दलों की निष्क्रियता नहीं, बल्कि चुनाव आयोग की पारदर्शिता की कमी और प्रशासनिक उदासीनता को उजागर करता है.

भाकपा (माले) की मांग

भट्टाचार्य ने मांग की कि पार्टी के सभी बीएलए-2 को तत्काल मान्यता दिया जाये और प्रत्येक शिकायत पर समयबद्ध, निष्पक्ष कार्रवाई सुनिश्चित किया जाये.

जनता से आह्वान

भाकपा (माले) ने प्रदेश की जनता से अपील किया है कि वे अपने वोटिंग अधिकारों की रक्षा के लिए जागरूक बनें. और आगामी बिहार विधानसभा चुनाव में इंडिया गठबंधन को निर्णायक समर्थन देकर लोकतंत्र विरोधी ताकतों को शिकस्त दें.

निष्कर्ष

बिहार की राजनीति एक नए मोड़ पर पहुंच चुका है. जहां मताधिकार का सवाल सबसे बड़ा चुनावी मुद्दा बनता जा रहा है. भाकपा (माले) का यह सीधा हमला केंद्र सरकार पर न सिर्फ घुसपैठ के कथित दावों को चुनौती देता है.बल्कि यह भी दर्शाता है कि 2025 का विधानसभा चुनाव अब मतदाता सूची की पारदर्शिता और चुनावी निष्पक्षता पर केंद्रित रहेगा.

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