Epstein फाइल पर कांग्रेस का हमला, सरकार पर सवाल
तीसरा पक्ष ब्यूरो दिल्ली,13 फरवरी — दिल्ली से सामने आया एक ताज़ा राजनीतिक बयान ने देश की राजनीति में नई बहस छेड़ दिया है. Congress के आधिकारिक सोशल मीडिया पोस्ट के हवाले से पार्टी के मीडिया और पब्लिसिटी विभाग के चेयरमैन Pawan Khera ने केंद्र सरकार और विदेश मंत्री पर गंभीर आरोप लगाया हैं. बयान में कहा गया कि केंद्रीय मंत्री Hardeep Singh Puri केवल कुछ चुनिंदा ईमेल का जिक्र कर रहे हैं, जबकि बाकी तथ्यों को छिपाने की कोशिश हो रहा है.
यह बयान उस कथित विवाद से जुड़ा है जिसमें अंतरराष्ट्रीय वित्तीय अपराधों के आरोपी Jeffrey Epstein का नाम चर्चा में है. कांग्रेस का आरोप है कि एपस्टीन से जुड़े मुद्दों पर सरकार स्पष्टता नहीं दे रही और सच्चाई को दबाने का प्रयास किया जा रहा है. इस पूरे प्रकरण में प्रधानमंत्री Narendra Modi पर भी अप्रत्यक्ष सवाल उठाया गया हैं, जिससे राजनीतिक माहौल और गरमा गया है.
बयान के मुख्य आरोप और राजनीतिक संदेश
कांग्रेस प्रवक्ता ने अपने बयान में कहा कि विदेश मंत्री द्वारा केवल एक ईमेल का हवाला देना और बाकी तथ्यों को नजरअंदाज करना कई गंभीर सवाल खड़ा करता है. पार्टी का कहना है कि यदि किसी भी प्रकार का संपर्क या संवाद हुआ था, तो उसे पूरी पारदर्शिता के साथ सार्वजनिक किया जाना चाहिये.
कांग्रेस ने यह भी आरोप लगाया है कि सरकार उन मुद्दों पर चुप्पी साध लेती है, जो उसके लिए असहज हो सकता हैं. बयान में यह भी कहा गया कि,कॉफी पर मुलाकात और Have Fun जैसे शब्दों का इस्तेमाल यह दर्शाता है कि संबंधों को पूरी तरह नकारना सही नहीं है. हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुआ है, लेकिन राजनीतिक बहस में यह मुद्दा तेजी से उछाला जा रहा है.
मीडिया की भूमिका पर भी उठे सवाल
बयान का एक महत्वपूर्ण हिस्सा मीडिया को लेकर भी था. कांग्रेस नेता ने कहा कि मीडिया के कुछ हिस्से इस पूरे मामले में सरकार के पक्ष में खड़ा दिखाई दे रहा हैं, जो लोकतंत्र के लिए चिंताजनक है. उनके अनुसार, मीडिया का काम सत्ता से सवाल पूछना है, न कि विवादित मुद्दों को हल्का दिखाना.
यह आरोप मीडिया की निष्पक्षता को लेकर चल रही पुरानी बहस को फिर से सामने लाता है. राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस तरह के बयान चुनावी माहौल में आम होता हैं, लेकिन जब आरोप अंतरराष्ट्रीय स्तर के विवादों से जुड़ा हों, तो उनकी संवेदनशीलता और बढ़ जाता है.
एपस्टीन फाइल का राजनीतिक इस्तेमाल?
कांग्रेस के बयान में ,एपस्टीन फाइल का जिक्र विशेष रूप से किया गया, जिसमें कहा गया कि आखिर ऐसी कौन-सी जानकारी है, जिससे सरकार असहज दिख रहा है. यह सवाल सीधे तौर पर किसी ठोस दस्तावेज़ की पुष्टि नहीं करता, बल्कि राजनीतिक दबाव बनाने की रणनीति के रूप में देखा जा रहा है.
विशेषज्ञों का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय विवादों से जुड़े नामों का घरेलू राजनीति में इस्तेमाल नई बात नहीं है. कई बार ऐसे मुद्दे विपक्ष द्वारा सरकार की जवाबदेही तय करने के लिए उठाया जाता हैं, जबकि सरकार इन्हें राजनीतिक हमला करार देती है.
घर-घर मोदी, से ,थर-थर मोदी तक का नारा
कांग्रेस प्रवक्ता ने अपने बयान में एक तीखा राजनीतिक तंज भी कसा. उन्होंने कहा कि जिस अभियान की शुरुआत ,घर-घर मोदी जैसे नारे से हुई थी, वह अब थर-थर मोदी, में बदल गया है. यह टिप्पणी सीधे तौर पर सरकार की छवि और नेतृत्व शैली पर हमला माना जा रहा है.
राजनीतिक संचार के विशेषज्ञ मानता हैं कि ऐसे नारे जनमत को प्रभावित करने के लिए दिया जाता हैं.इससे समर्थकों में ऊर्जा पैदा होता है और विरोधियों पर मनोवैज्ञानिक दबाव बनाने की कोशिश होता है.
ये भी पढ़े :जंतर मंतर पर महाबोधि महाविहार मुक्ति आंदोलन में उमड़ा जनसैलाब
ये भी पढ़े :भारत की Epstein Files: शेल्टर होम कांड और सिस्टम की नाकामी की कहानी
सरकार की संभावित प्रतिक्रिया और आगे की राजनीति
हालांकि सरकार की ओर से इस बयान पर आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने आना बाकी है, लेकिन पिछले अनुभव बताते हैं कि ऐसे आरोपों को अक्सर राजनीतिक प्रोपेगेंडा, कहकर खारिज किया जाता है. सरकार यह भी तर्क दे सकता है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर के मामलों को बिना प्रमाण के राजनीतिक रंग देना देश की छवि के लिए उचित नहीं है.
वहीं, कांग्रेस का उद्देश्य इस मुद्दे के जरिए सरकार की पारदर्शिता और जवाबदेही पर सवाल उठाना है. यह रणनीति संसद से लेकर सोशल मीडिया तक राजनीतिक विमर्श को प्रभावित कर सकती है.
निष्कर्ष: आरोप बनाम जवाबदेही की लड़ाई
दिल्ली से उठे इस बयान ने स्पष्ट कर दिया है कि आने वाले दिनों में ,एपस्टीन फाइल और उससे जुड़े आरोप भारतीय राजनीति में एक बड़ा मुद्दा बन सकता हैं.विपक्ष जहां इसे पारदर्शिता और नैतिकता का सवाल बना रहा है, वहीं सरकार के लिए यह अपनी विश्वसनीयता बनाए रखने की चुनौती है.
लोकतंत्र में आरोप और प्रत्यारोप की राजनीति नई नहीं है, लेकिन जब मामला अंतरराष्ट्रीय विवादों और उच्च पदों से जुड़ा हो, तो जनता की अपेक्षा केवल एक होती है,साफ और तथ्यात्मक जवाब. आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि यह मुद्दा महज राजनीतिक बयानबाज़ी तक सीमित रहता है या ठोस तथ्यों और जांच की दिशा में आगे बढ़ता है.

I am a blogger and social media influencer. I have about 5 years experience in digital media and news blogging.


















