जनसंसद में गिग वर्कर्स की आवाज़: राहुल गांधी ने सुनीं समस्याएं

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Ajit Kumar

भारत
जनसंसद में गिग वर्कर्स से मिलते राहुल गांधी

सामाजिक सुरक्षा का अभाव: सबसे बड़ी चिंता

तीसरा पक्ष ब्यूरो दिल्ली,16 फरवरी भारत की बदलती अर्थव्यवस्था में गिग वर्कर्स एक अहम भूमिका निभा रहा हैं. फूड डिलीवरी, कैब सेवाएं, ऑनलाइन फ्रीलांसिंग, और अन्य डिजिटल प्लेटफॉर्म आधारित काम आज लाखों युवाओं की आजीविका का आधार बन चुका हैं. लेकिन इसके साथ ही एक बड़ी सच्चाई यह भी है कि इन गिग वर्कर्स के पास न तो स्थिर आय है और न ही सामाजिक सुरक्षा की कोई ठोस व्यवस्था है.इसी गंभीर मुद्दे को लेकर नेता विपक्ष राहुल गांधी ने दिल्ली में आयोजित जनसंसद में गिग वर्कर्स के एक डेलिगेशन से मुलाकात कर उनकी समस्याओं को विस्तार से सुना.

गिग इकोनॉमी: अवसर के साथ असुरक्षा भी

डिजिटल प्लेटफॉर्म के विस्तार ने रोजगार के नया अवसर जरूर पैदा किया हैं, लेकिन इन अवसरों के साथ कई चुनौतियां भी सामने आया हैं. गिग वर्कर्स को नियमित वेतन, बीमा, पेंशन, मेडिकल सुविधाएं और अन्य श्रमिक अधिकारों का लाभ नहीं मिल पाता.अधिकांश गिग वर्कर्स अस्थायी अनुबंध पर काम करता हैं, जिससे उनके रोजगार की स्थिरता हमेशा अनिश्चित बना रहता है.

जनसंसद में आए प्रतिनिधियों ने बताया है कि उन्हें रोज़ काम की उपलब्धता पर निर्भर रहना पड़ता है.कभी अधिक काम मिलता है तो कभी बिल्कुल नहीं मिलता है.ऐसे में उनकी आय का कोई निश्चित आधार नहीं होता, जिससे परिवार का भरण-पोषण करना भी चुनौतीपूर्ण हो जाता है.

वर्क-लाइफ बैलेंस की गंभीर समस्या

गिग वर्कर्स की सबसे बड़ी समस्याओं में से एक उनका बिगड़ा हुआ वर्क-लाइफ बैलेंस है.अधिक कमाई के दबाव में उन्हें दिन-रात लगातार काम करना पड़ता है. कई बार उन्हें 10 से 14 घंटे तक लगातार ड्यूटी करना पड़ता है, तब जाकर उनकी आय संतोषजनक हो पाता है. इस स्थिति का असर उनके मानसिक स्वास्थ्य, पारिवारिक जीवन और सामाजिक संबंधों पर भी पड़ता है.

प्रतिनिधियों ने यह भी कहा है कि उन्हें अक्सर बिना किसी सुरक्षा के जोखिम भरे हालात में काम करना पड़ता है, चाहे वह सड़क दुर्घटनाओं का खतरा हो या फिर मौसम की विपरीत परिस्थितियां. इसके बावजूद उन्हें किसी प्रकार की बीमा सुरक्षा या मुआवजे की गारंटी नहीं मिलता है.

सामाजिक सुरक्षा का अभाव: सबसे बड़ी चिंता

गिग वर्कर्स की सबसे बड़ी मांग सामाजिक सुरक्षा को लेकर है.उनके पास न स्वास्थ्य बीमा है, न पेंशन और न ही दुर्घटना बीमा की कोई स्थायी व्यवस्था. काम बंद होने की स्थिति में उनके पास कोई बैकअप योजना नहीं होता है . यह असुरक्षा उन्हें हर समय आर्थिक संकट की आशंका में जीने पर मजबूर करता है.

जनसंसद में हुई चर्चा के दौरान इस बात पर जोर दिया गया कि गिग वर्कर्स को भी संगठित क्षेत्र के श्रमिकों की तरह न्यूनतम अधिकार मिलना चाहिये. इसमें न्यूनतम आय की गारंटी, स्वास्थ्य सुविधाएं, दुर्घटना बीमा और पेंशन जैसी बुनियादी सुरक्षा शामिल होनी चाहिये.

कांग्रेस का प्रस्तावित कानूनी ढांचा

इस मुलाकात के बाद कांग्रेस की ओर से यह संदेश दिया गया है कि पार्टी शासित राज्यों में गिग वर्कर्स के लिए एक विशेष कानूनी ढांचा तैयार किया जा रहा है.इस ढांचे का उद्देश्य गिग वर्कर्स को सामाजिक सुरक्षा, न्यूनतम आय और समानता का अधिकार प्रदान करना है.

यह कदम इसलिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि भारत में गिग इकोनॉमी तेजी से बढ़ रहा है. अनुमान है कि आने वाले वर्षों में लाखों लोग इस क्षेत्र से जुड़ेंगे. ऐसे में यदि समय रहते नीतिगत सुधार नहीं किया गया, तो बड़ी संख्या में कामगार असुरक्षा और असमानता का सामना करता रहेंगा .

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रोजगार से आगे की लड़ाई: सम्मान और न्याय

इस मुद्दे को सिर्फ रोजगार तक सीमित नहीं माना जा सकता है.गिग वर्कर्स की लड़ाई सम्मान, सुरक्षा और सामाजिक न्याय से भी जुड़ा हुआ है. वे चाहते हैं कि उन्हें भी समाज में एक सम्मानित श्रमिक के रूप में पहचाना जाए और उनके अधिकारों को कानूनी मान्यता मिले.

जनसंसद में हुई चर्चा ने इस बात को स्पष्ट किया है कि गिग वर्कर्स अब अपने अधिकारों के प्रति जागरूक हो रहा हैं और वे संगठित होकर अपनी आवाज़ बुलंद कर रहा हैं.यह लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए एक सकारात्मक संकेत है, जहां कामगार अपनी समस्याएं सीधे नीति निर्माताओं के सामने रख रहा हैं.

भविष्य की दिशा: नीति और संवेदनशीलता की जरूरत

विशेषज्ञों का मानना है कि गिग इकोनॉमी को संतुलित और सुरक्षित बनाने के लिए सरकारों को संवेदनशील और दूरदर्शी नीति अपनानी होगी.तकनीकी विकास के साथ श्रमिक अधिकारों का संतुलन बनाए रखना बेहद जरूरी है. यदि गिग वर्कर्स को सामाजिक सुरक्षा और न्यूनतम आय की गारंटी मिलती है, तो इससे न केवल उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत होगी, बल्कि देश की समग्र अर्थव्यवस्था को भी स्थिरता मिलेगी.

निष्कर्ष

दिल्ली में जनसंसद के दौरान हुई यह मुलाकात गिग वर्कर्स के मुद्दों को राष्ट्रीय बहस के केंद्र में लाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है. यह स्पष्ट हो गया है कि गिग वर्कर्स की समस्याएं केवल व्यक्तिगत नहीं, बल्कि एक व्यापक सामाजिक और आर्थिक मुद्दा हैं.

आने वाले समय में यदि प्रस्तावित कानूनी ढांचे को प्रभावी तरीके से लागू किया जाता है, तो यह गिग वर्कर्स के जीवन में बड़ा बदलाव ला सकता है.सामाजिक सुरक्षा, न्यूनतम आय और समानता का अधिकार मिलने से वे न केवल आर्थिक रूप से सशक्त होंगे, बल्कि सम्मानजनक जीवन जीने की दिशा में भी आगे बढ़ सकेंगे.

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