संविधान व गंगा-जमुनी संस्कृति पर उठे सवाल
तीसरा पक्ष ब्यूरो पटना, 14 फरवरी 2026 केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह के बयान को लेकर बिहार की राजनीति में तीखी प्रतिक्रिया सामने आई है.राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के प्रदेश प्रवक्ता एजाज अहमद ने इसे नफरत फैलाने वाला और देश की संवैधानिक व्यवस्था के खिलाफ बताया है. उनका कहना है कि इस तरह की भाषा न केवल भारत की गंगा-जमुनी तहजीब को कमजोर करता है, बल्कि समाज में विभाजन की भावना को भी बढ़ावा देता है.
बयान पर RJD की कड़ी आपत्ति
RJD की ओर से जारी प्रेस वक्तव्य में एजाज अहमद ने कहा है कि केंद्रीय मंत्री द्वारा इस्तेमाल की गई भाषा लोकतांत्रिक मूल्यों और संविधान की भावना के विपरीत है. उन्होंने आरोप लगाया कि इस तरह के बयान समाज में सांप्रदायिक तनाव बढ़ाने के उद्देश्य से दिया जाता हैं, जो किसी भी दृष्टि से उचित नहीं हैं.
उनका कहना है कि भारत का संविधान सभी धर्मों और समुदायों को अपनी आस्था, परंपरा और रीति-रिवाज के अनुसार जीवन जीने की पूरी स्वतंत्रता देता है.ऐसे में किसी भी व्यक्ति या समूह पर उसकी धार्मिक मान्यताओं के विरुद्ध कुछ थोपना संवैधानिक मूल्यों का उल्लंघन है.
चुनावी राजनीति से जुड़ा बयान का आरोप
एजाज अहमद ने यह भी आरोप लगाया है कि गिरिराज सिंह का बयान राजनीतिक रणनीति का हिस्सा हो सकता है.उन्होंने कहा कि यह बयान आगामी पश्चिम बंगाल चुनाव को ध्यान में रखकर दिया गया प्रतीत होता है, ताकि ध्रुवीकरण की राजनीति को बढ़ावा मिल सके.
उनके अनुसार, भारतीय जनता पार्टी (BJP) अपने चुनावी फायदे के लिए इस तरह के बयानों का इस्तेमाल करता रहा है, जो लोकतांत्रिक व्यवस्था और सामाजिक सौहार्द दोनों के लिए खतरनाक है.
संवैधानिक मूल्यों की बात
RJD प्रवक्ता ने जोर देकर कहा कि भारत की संवैधानिक व्यवस्था का मूल आधार धार्मिक स्वतंत्रता, समानता और भाईचारा है. उन्होंने कहा कि संविधान में स्पष्ट रूप से यह व्यवस्था है कि हर नागरिक को अपने धर्म और संस्कृति के अनुसार जीने का अधिकार है.
इस संदर्भ में उन्होंने कहा कि कोई भी नेता या सरकार यदि ऐसी भाषा का इस्तेमाल करता है जिससे किसी समुदाय की भावनाएं आहत हों, तो यह संविधान की भावना के विपरीत है. उन्होंने इसे लोकतंत्र के लिए गंभीर चिंता का विषय बताया है.
गंगा-जमुनी संस्कृति पर खतरे की बात
एजाज अहमद ने अपने बयान में भारत की गंगा-जमुनी संस्कृति का विशेष उल्लेख करते हुए कहा कि देश की असली पहचान उसकी विविधता और सह-अस्तित्व की परंपरा है.
उन्होंने कहा कि सदियों से भारत में अलग-अलग धर्मों और संस्कृतियों के लोग आपसी सद्भाव के साथ रहते आए हैं.ऐसे में किसी भी प्रकार की विभाजनकारी भाषा इस साझा विरासत को कमजोर करता है और समाज में अविश्वास का माहौल पैदा करता है.
भाजपा की राजनीति पर सवाल
RJD प्रवक्ता ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार और भाजपा की हालिया राजनीति एजेंडा आधारित है, जिसमें भावनात्मक मुद्दों को उछालकर राजनीतिक लाभ लेने की कोशिश किया जाता है.
उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में स्वस्थ बहस और मतभेद स्वाभाविक हैं, लेकिन नफरत और विभाजन फैलाने वाली भाषा का इस्तेमाल किसी भी सूरत में स्वीकार्य नहीं हो सकता.
उनका यह भी कहना था कि देश के नेताओं को अपने शब्दों की जिम्मेदारी समझनी चाहिए, क्योंकि उनके बयान का व्यापक सामाजिक प्रभाव पड़ता है.
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सामाजिक सौहार्द बनाए रखने की अपील
एजाज अहमद ने अंत में सभी राजनीतिक दलों और नेताओं से अपील किया कि वे ऐसी भाषा से बचें जो समाज में विभाजन पैदा करे.उन्होंने कहा कि भारत जैसे विविधतापूर्ण देश में सामाजिक सौहार्द और संवैधानिक मूल्यों की रक्षा करना सभी की जिम्मेदारी है.
उन्होंने यह भी कहा कि देश के नागरिकों को भी सतर्क रहना चाहिए और किसी भी प्रकार की नफरत फैलाने वाली राजनीति से दूरी बनानी चाहिए.
निष्कर्ष
गिरिराज सिंह के बयान को लेकर RJD की तीखी प्रतिक्रिया ने एक बार फिर भारतीय राजनीति में भाषा और बयानबाजी की मर्यादा पर सवाल खड़ा कर दिया हैं. यह विवाद केवल राजनीतिक मतभेद तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे जुड़े संवैधानिक और सामाजिक पहलू भी महत्वपूर्ण हैं.
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले चुनावी माहौल में इस तरह के बयान और प्रतिक्रियाएं और तेज हो सकती हैं. ऐसे समय में यह आवश्यक हो जाता है कि राजनीतिक दल और नेता संविधान की भावना, सामाजिक एकता और लोकतांत्रिक मूल्यों को प्राथमिकता दें, ताकि देश में शांति, सद्भाव और विश्वास का माहौल बना रहे.

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