लोकतंत्र में जिम्मेदार और संतुलित मीडिया की जरूरत पर जोर, असली मुद्दों को सामने लाने की अपील
तीसरा पक्ष ब्यूरो नई दिल्ली,13 मार्च 2026: संसद के उच्च सदन राज्यसभा में कांग्रेस सांसद Imran Pratapgarhi ने मीडिया की भूमिका और देश में बढ़ती सांप्रदायिक बहसों को लेकर सरकार पर तीखा हमला बोला है.उन्होंने कहा कि देश के असली मुद्दों से ध्यान भटकाने के लिए मीडिया के एक हिस्से द्वारा लगातार हिंदू-मुस्लिम बहस को बढ़ावा दिया जा रहा है.
अपने संबोधन में उन्होंने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi के उस बयान का जिक्र किया है जिसमें कहा गया था कि देश में नफरत का माहौल पैदा किया जा रहा है. इमरान प्रतापगढ़ी ने कहा है कि राहुल गांधी ने जो बात कही थी, वह आज पूरी तरह सच साबित होते दिखाई दे रहा है.
देश में नफरत का केरोसिन छिड़का गया
राज्यसभा में बोलते हुए इमरान प्रतापगढ़ी ने कहा कि राहुल गांधी ने पहले ही चेतावनी दी थी कि देश में नफरत का केरोसिन छिड़का जा रहा है.
उनके मुताबिक, स्थिति अब इतनी गंभीर हो चुकी है कि सिर्फ नफरत फैलाने का माहौल ही नहीं बनाया गया, बल्कि उसे भड़काने के लिए मीडिया के हाथों में माचिस की तीलियां भी थमा दी गई हैं.
उन्होंने आरोप लगाया है कि देश में कुछ टीवी चैनल लगातार ऐसे कार्यक्रम चला रहे हैं जिनका उद्देश्य समाज को बांटना और धार्मिक आधार पर बहस को बढ़ावा देना है.
सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी का भी किया जिक्र
कांग्रेस सांसद ने अपने भाषण में देश के पूर्व मुख्य न्यायाधीश N. V. Ramana की टिप्पणी का भी हवाला दिया है .
उन्होंने बताया कि 2021 में एक याचिका की सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश एन.वी. रमन्ना ने कहा था कि मीडिया का एक वर्ग हर मुद्दे को सांप्रदायिकता के नजरिये से पेश करता है.
इमरान प्रतापगढ़ी ने कहा कि जब देश की सर्वोच्च अदालत के मुख्य न्यायाधीश भी ऐसी चिंता जता चुके हैं, तो यह गंभीर मामला है और इस पर व्यापक चर्चा होना चाहिये .
बेरोजगारी जैसे मुद्दों पर नहीं होती बहस
राज्यसभा में दिए गए अपने वक्तव्य में उन्होंने कहा कि देश के लाखों युवा बेरोजगारी की समस्या से जूझ रहा हैं, लेकिन टीवी चैनलों पर इन मुद्दों के लिए कोई जगह नहीं है.
उनके अनुसार प्राइम टाइम में अक्सर ऐसे शो दिखाए जाते हैं जिनमें लव जिहाद, थूक जिहाद, लैंड जिहाद, वोट जिहाद और UPSC जिहाद जैसे शब्दों के इर्द-गिर्द बहस चलती रहती है.
उन्होंने सवाल उठाया है कि जब देश का युवा नौकरी और भविष्य को लेकर चिंतित है, तो मीडिया का ध्यान इन वास्तविक समस्याओं की ओर क्यों नहीं जाता.
संविधान और संस्थाओं पर दबाव का आरोप
इमरान प्रतापगढ़ी ने यह भी कहा कि देश के संविधान और न्यायपालिका की प्रतिष्ठा पर भी मीडिया के एक हिस्से का दबाव दिखाई देता है.
उन्होंने आरोप लगाया कि कई बार ऐसा लगता है जैसे मीडिया की ताकत का बुलडोजर संविधान और अदालतों के सम्मान पर चलाया जा रहा हो.
उन्होंने यह भी कहा कि अक्सर सरकार की गलतियों पर सवाल उठाने के बजाय विपक्ष से ही सवाल पूछे जाते हैं, जिससे लोकतांत्रिक संतुलन प्रभावित होता है.
टीवी बहसों पर उठाए सवाल
अपने भाषण में कांग्रेस सांसद ने टीवी चैनलों की बहसों के स्वरूप पर भी सवाल उठाए.
उन्होंने कहा कि कई चैनलों पर दिनभर हिंदू-मुस्लिम के मुद्दों पर बहस होती रहती है, लेकिन उसी चैनल के मालिक शाम को धार्मिक स्थलों पर जाकर सामाजिक कार्यक्रमों में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होते हैं.
उनके अनुसार यह दोहरी भूमिका समाज में भ्रम और अविश्वास पैदा करती है.
सर्वदलीय कमेटी बनाने की मांग
इमरान प्रतापगढ़ी ने सरकार से आग्रह किया है कि मीडिया और सोशल मीडिया के बढ़ते प्रभाव को देखते हुए एक सर्वदलीय कमेटी का गठन किया जाए.
उन्होंने स्पष्ट किया कि इस कमेटी का उद्देश्य सेंसरशिप लागू करना नहीं होना चाहिए, बल्कि आने वाली पीढ़ियों को जहरीले और भ्रामक कंटेंट के प्रभाव से बचाना होना चाहिए.
उनका कहना था कि लोकतंत्र में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता बेहद महत्वपूर्ण है, लेकिन इसके साथ जिम्मेदारी भी उतनी ही जरूरी है.
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प्रेस काउंसिल और NBDSA को मजबूत करने की मांग
कांग्रेस सांसद ने सुझाव दिया कि मीडिया नियामक संस्थाओं को मजबूत किया जाना चाहिए.
उन्होंने कहा कि Press Council of India और News Broadcasting & Digital Standards Authority जैसी संस्थाओं को अधिक अधिकार और संसाधन दिए जाएं ताकि वे झूठी और भ्रामक खबरों पर प्रभावी तरीके से रोक लगा सकें.
उनका मानना है कि इससे मीडिया की विश्वसनीयता भी बढ़ेगी और समाज में गलत जानकारी के प्रसार को रोका जा सकेगा.
लोकतंत्र में जिम्मेदार मीडिया की जरूरत
अपने वक्तव्य के अंत में इमरान प्रतापगढ़ी ने कहा कि लोकतंत्र में मीडिया की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण होती है.
उन्होंने कहा कि मीडिया का काम जनता के असली मुद्दों को सामने लाना और सत्ता से सवाल पूछना है.यदि मीडिया का एक हिस्सा समाज को बांटने वाले मुद्दों पर ही केंद्रित रहेगा, तो इससे लोकतंत्र की बुनियाद कमजोर हो सकती है.
उन्होंने उम्मीद जताई कि सरकार और सभी राजनीतिक दल मिलकर ऐसा समाधान निकालेंगे जिससे मीडिया की स्वतंत्रता भी बनी रहे और समाज में जिम्मेदार पत्रकारिता को बढ़ावा भी मिले.

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