ईरान के जहाज़ पर अमेरिकी हमले को लेकर कांग्रेस का केंद्र पर हमला

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Ajit Kumar

भारत
Indian Ocean में ईरान के जहाज़ पर हमले को लेकर कांग्रेस नेता पवन खेड़ा का बयान

Indian Ocean में भारत की भूमिका पर उठे सवाल

तीसरा पक्ष ब्यूरो नई दिल्ली,5 मार्च 2026:दिल्ली में कांग्रेस मुख्यालय में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में Pawan Khera ने केंद्र सरकार के विदेश और सुरक्षा नीति पर गंभीर सवाल उठाया है. उन्होंने आरोप लगाया कि भारतीय समुद्री क्षेत्र के करीब एक ईरानी जहाज़ को अमेरिकी हमले में डुबो दिया गया और भारत अपनी मेहमाननवाजी की रक्षा तक नहीं कर सका.

कांग्रेस के अनुसार यह घटना न केवल भारत की कूटनीतिक स्थिति बल्कि हिंद महासागर क्षेत्र में उसकी सुरक्षा क्षमता पर भी प्रश्नचिह्न लगाता है. पार्टी ने कहा कि जब सरकार बार-बार यह दावा करता है कि भारत Indian Ocean का Guardian है, तो फिर ऐसी घटना कैसे हो गई.

2018 की घटना का उदाहरण

प्रेस कॉन्फ्रेंस में पवन खेड़ा ने साल 2018 की एक घटना का भी जिक्र किया है. उनके अनुसार उस समय गोवा के आगे अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में एक यॉट को पकड़ा गया था, जिसमें दुबई की राजकुमारी Latifa bint Mohammed Al Maktoum मौजूद थीं.

कांग्रेस का कहना है कि उस समय भारत ने अंतरराष्ट्रीय समुद्री सुरक्षा को लेकर सक्रिय भूमिका निभाई था. लेकिन अब हालात ऐसा हो गया हैं कि एक विदेशी जहाज़, जो भारत के निमंत्रण पर संयुक्त नौसैनिक अभ्यास में शामिल होने आया था, उसकी सुरक्षा तक सुनिश्चित नहीं की जा सकी.

संयुक्त नौसैनिक अभ्यास पर उठे सवाल

कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि यह जहाज़ भारत के निमंत्रण पर एक संयुक्त नौसैनिक अभ्यास में हिस्सा लेने आया था. पवन खेड़ा के मुताबिक आम तौर पर ऐसी एक्सरसाइज़ में जहाज़ हथियारों से लैस नहीं होते है क्योंकि उनका उद्देश्य युद्ध नहीं बल्कि प्रशिक्षण होता है.

उनका कहना है कि इसी स्थिति का फायदा उठाते हुए अमेरिकी कार्रवाई में जहाज़ को टॉरपीडो से निशाना बनाया गया और वह समुद्र में डूब गया.

कांग्रेस ने यह भी दावा किया है कि इस अभ्यास में अमेरिका को अपने युद्धपोत भेजने थे, लेकिन आखिरी समय में उसने केवल अधिकारी भेजे और जहाज़ नहीं भेजा था.

खेड़ा ने सवाल उठाया है कि अगर अमेरिका पहले से ऐसी योजना बना रहा था तो क्या भारत को इसकी जानकारी थी.

उन्होंने पूछा कि,

क्या भारत को पहले से पता था कि ऐसा हमला होने वाला है?

अगर जानकारी थी तो भारत सरकार ने इसे रोकने के लिए क्या किया?

अगर जानकारी नहीं थी तो यह भारत की समुद्री निगरानी व्यवस्था की बड़ी विफलता नहीं है?

1986 की घटना का हवाला

कांग्रेस नेता ने अपने बयान में इतिहास का भी उल्लेख किया है. उन्होंने कहा कि साल 1986 में अमेरिका की संस्था Voice of America श्रीलंका में एक ट्रांसमीटर लगाना चाहती थी.

उस समय की कांग्रेस सरकार और तत्कालीन प्रधानमंत्री Rajiv Gandhi ने इसे मंजूरी नहीं दी थी क्योंकि इससे भारत की सुरक्षा और क्षेत्रीय रणनीतिक संतुलन प्रभावित हो सकता था.

खेड़ा के अनुसार उस दौर में भारत अपनी संप्रभुता और क्षेत्रीय हितों को लेकर ज्यादा सतर्क था, जबकि आज ऐसी घटनाएं भारत की भूमिका पर सवाल खड़ा कर रहा हैं.

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नया भारत के दावे पर सवाल

कांग्रेस ने सरकार के उस दावे को भी चुनौती दी है जिसमें भारत को नया भारत और हिंद महासागर का सुरक्षा प्रहरी बताया जाता है.

पवन खेड़ा ने कहा कि जब किसी देश के निमंत्रण पर आया जहाज़ उसी क्षेत्र में डुबो दिया जाता है, तो यह केवल कूटनीतिक असफलता नहीं बल्कि मेहमान की सुरक्षा में भी गंभीर चूक है.

उन्होंने आरोप लगाया है कि इस घटना के बाद भी केंद्र सरकार की तरफ से कोई स्पष्ट बयान सामने नहीं आया है, जिससे कई तरह के सवाल पैदा हो रहा हैं.

सरकार की प्रतिक्रिया का इंतजार

इस पूरे मामले में केंद्र सरकार या रक्षा मंत्रालय की ओर से विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है.हालांकि सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि हिंद महासागर क्षेत्र वैश्विक रणनीतिक प्रतिस्पर्धा का केंद्र बनता जा रहा है और यहां कई देशों की सैन्य गतिविधियां बढ़ रही हैं.

विशेषज्ञों के अनुसार भारत के लिए यह जरूरी है कि वह अपनी समुद्री निगरानी प्रणाली, कूटनीतिक संतुलन और सुरक्षा रणनीति को और मजबूत करे ताकि ऐसे संवेदनशील हालात में स्पष्ट और प्रभावी भूमिका निभाई जा सके.

फिलहाल कांग्रेस के आरोपों और सवालों के बाद यह मुद्दा राजनीतिक और रणनीतिक बहस का विषय बन गया है.आने वाले दिनों में सरकार की प्रतिक्रिया और इस घटना से जुड़ी आधिकारिक जानकारी सामने आने के बाद ही पूरे मामले की तस्वीर स्पष्ट हो सकेगी.

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