जाति जनगणना पर प्रधानमंत्री मोदी ने देश की जनता को गुमराह किया : भाई अरुण

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Ajit Kumar

बिहार
जाति जनगणना पर प्रधानमंत्री मोदी ने देश की जनता को गुमराह किया : भाई अरुण

लोकसभा में दिए गए बयान और जनगणना परफॉर्मा की सच्चाई

तीसरा पक्ष ब्यूरो पटना,24 जनवरी 2026 — देश में जाति जनगणना को लेकर लंबे समय से बहस चल रही है. सामाजिक न्याय, समानता और हाशिए पर खड़े वर्गों के अधिकारों की बात करने वाली सरकार से जनता को बड़ी उम्मीदें थीं. लेकिन अब राष्ट्रीय जनता दल के प्रदेश महासचिव भाई अरुण कुमार ने जाति जनगणना के मुद्दे पर केंद्र सरकार और माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर गंभीर आरोप लगाए हैं. उनका कहना है कि प्रधानमंत्री ने लोकसभा में जो आश्वासन दिया था, वह जमीनी हकीकत में पूरा नहीं किया गया है.

लोकसभा में दिया गया आश्वासन और सच्चाई

भाई अरुण कुमार ने कहा कि माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लोकसभा में स्पष्ट रूप से कहा था कि आगामी जनगणना में जाति का कॉलम शामिल किया जाएगा. यह बयान देश के करोड़ों पिछड़े, दलित और वंचित वर्ग के लोगों के लिए उम्मीद की किरण था.
लेकिन जब जनगणना का परफॉर्मा सामने आया, तो उसमें जाति का कोई अलग कॉलम मौजूद नहीं है. यह न केवल सरकार की कथनी और करनी में अंतर को दर्शाता है, बल्कि देश की जनता के साथ एक तरह का छल भी है.

वंचित समाज में गहरा आक्रोश

भाई अरुण कुमार ने कहा कि खासकर दबे-कुचले, पिछड़े और सामाजिक रूप से कमजोर वर्ग के लोग खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं. जाति जनगणना केवल आंकड़ों का सवाल नहीं है, बल्कि यह सामाजिक न्याय की बुनियाद है.
जब तक यह स्पष्ट नहीं होगा कि देश में किस जाति की आबादी कितनी है, तब तक योजनाओं का लाभ सही लोगों तक नहीं पहुंच सकता है.

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जाति जनगणना क्यों है जरूरी

जाति आधारित जनगणना से ही यह पता चलता है कि शिक्षा, रोजगार, स्वास्थ्य और सामाजिक योजनाओं का वास्तविक लाभ किसे मिल रहा है और कौन अब भी पीछे छूट रहा है.
भाई अरुण कुमार ने कहा कि बिना जाति आधारित आंकड़ों के सामाजिक न्याय की बात करना केवल दिखावा है. यह संविधान की मूल भावना के भी खिलाफ है.

तत्काल सुधार की मांग

राष्ट्रीय जनता दल के प्रदेश महासचिव ने केंद्र सरकार से मांग की कि जनगणना के परफॉर्मा में अभिलंब जाति का अलग कॉलम जोड़ा जाए. उन्होंने कहा कि यदि सरकार सच में सामाजिक न्याय के प्रति ईमानदार है, तो उसे अपने वादे पर खरा उतरना होगा.
अन्यथा यह साफ हो जाएगा कि जाति जनगणना को लेकर सरकार केवल राजनीतिक बयानबाजी कर रही है.

निष्कर्ष

भाई अरुण कुमार के बयान ने एक बार फिर जाति जनगणना के मुद्दे को राष्ट्रीय बहस के केंद्र में ला दिया है. यह सवाल अब केवल राजनीति का नहीं, बल्कि करोड़ों लोगों के हक और सम्मान का है.
देश की जनता अब जवाब चाहती है—क्या प्रधानमंत्री का लोकसभा में दिया गया आश्वासन सिर्फ एक बयान था या उसे वास्तव में लागू किया जाएगा?

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