किराड़ी जलभराव संकट: कांग्रेस का प्रदर्शन, BJP सरकार पर सवाल
तीसरा पक्ष ब्यूरो दिल्ली, 21 जनवरी 2026 दिल्ली को देश की राजधानी होने का गौरव प्राप्त है, लेकिन इसी राजधानी के कई इलाकों में आज भी बुनियादी सुविधाओं का अभाव साफ दिखाई देता है. उत्तर-पश्चिम दिल्ली का किराड़ी इलाका इसका ताजा उदाहरण है, जहां जलभराव की समस्या ने लोगों का सामान्य जीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त कर दिया है. लगातार हो रहे जलजमाव के कारण सड़कें, गलियां और घर पानी में डूबा हुआ हैं. हालात इतने खराब हैं कि कई परिवार अपने घर छोड़ने को मजबूर हो चुका हैं.
इस गंभीर मुद्दे को लेकर भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की दिल्ली इकाई ने सरकार की लापरवाही के खिलाफ आवाज उठाई है. दिल्ली कांग्रेस अध्यक्ष देवेंद्र यादव ने क्षेत्र का दौरा कर स्थानीय लोगों से मुलाकात की और BJP सरकार पर गंभीर सवाल खड़ा किया है.
किराड़ी में जलभराव: वर्षों पुरानी समस्या
किराड़ी दिल्ली का एक घनी आबादी वाला क्षेत्र है, जहां पिछले कई वर्षों से जलभराव की समस्या बनी हुई है. मानसून हो या सामान्य बारिश, थोड़ी सी बारिश में ही गलियां तालाब में बदल जाता हैं.जनवरी 2026 में हुई बारिश के बाद हालात और भी भयावह हो गया, शर्मा एन्क्लेव, प्रेम नगर और आसपास की कॉलोनियों में घुटनों तक पानी भर गया है.
स्थानीय लोगों का कहना है कि यह समस्या नई नहीं है, बल्कि पिछले 8 से 10 महीनों से लगातार बना हुआ है. कई जगहों पर तो सीवर का गंदा पानी घरों के अंदर तक घुस रहा है, जिससे रहना मुश्किल हो गया है.
जलभराव के मुख्य कारण
किराड़ी में जलभराव के पीछे कई गंभीर कारण सामने आते हैं,
कमज़ोर ड्रेनेज सिस्टम: पुरानी और संकरी नालियां भारी बारिश का पानी संभालने में पूरी तरह नाकाम हैं.
ड्रेनों का ब्लॉक होना: निर्माण मलबा, प्लास्टिक कचरा और गाद जमा होने से पानी की निकासी रुक गई है.
अधूरे प्रोजेक्ट्स: किराड़ी-रिठाला ट्रंक ड्रेन जैसे बड़े प्रोजेक्ट्स वर्षों से अधूरे पड़े हैं.
तेज़ शहरीकरण: जनसंख्या बढ़ी लेकिन बुनियादी ढांचा उसी गति से विकसित नहीं हुआ.
इन सभी कारणों ने मिलकर किराड़ी को जलभराव का स्थायी शिकार बना दिया है.
आम जनता पर असर: एक मानवीय संकट
जलभराव केवल असुविधा नहीं, बल्कि एक गंभीर मानवीय संकट बन चुका है. बच्चे स्कूल नहीं जा पा रहे, बुजुर्ग और बीमार लोग घरों में कैद हैं. छोटे दुकानदारों का कारोबार ठप हो गया है और मजदूर वर्ग को रोज़गार तक पहुंचने में भारी परेशानी हो रहा है.
स्वास्थ्य के मोर्चे पर स्थिति और भी चिंताजनक है. गंदे पानी से डेंगू, मलेरिया, टाइफाइड और पेट की बीमारियों का खतरा बढ़ गया है. स्थानीय निवासियों का कहना है कि प्रशासन को कई बार शिकायत दी गई, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई.
कांग्रेस की सक्रियता: जनता के बीच पहुंचे देवेंद्र यादव
इस गंभीर स्थिति को देखते हुए दिल्ली कांग्रेस अध्यक्ष देवेंद्र यादव ने किराड़ी के प्रभावित इलाकों का दौरा किया. उन्होंने जलभराव से त्रस्त लोगों से बातचीत की और मौके पर हालात का जायजा लिया.देवेंद्र यादव ने कहा कि सरकार की लापरवाही के कारण आज एक अप्रूव्ड कॉलोनी में लोग नारकीय जीवन जीने को मजबूर हैं.
कांग्रेस नेताओं का आरोप है कि ड्रेनेज सिस्टम की सफाई और डिसिल्टिंग समय पर नहीं की गई, जिसके कारण हालात बिगड़े.कांग्रेस ने सरकार से मांग किया कि तत्काल प्रभाव से जलनिकासी की व्यवस्था की जाए और स्थायी समाधान पर काम हो.
BJP सरकार का पक्ष और दावे
BJP सरकार ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि दिल्ली में जलभराव से निपटने के लिए बड़े स्तर पर काम चल रहा है.सरकार के अनुसार, किराड़ी समेत कई इलाकों में ट्रंक ड्रेन प्रोजेक्ट्स पर करोड़ों रुपये खर्च किया जा रहा है .
सरकार का दावा है कि, किराड़ी-रिठाला ट्रंक ड्रेन, मुंडका हॉल्ट-सप्लीमेंटरी ड्रेन, जैसे प्रोजेक्ट्स को तेज़ी से पूरा किया जाएगा और मार्च 2026 तक स्थिति में सुधार देखने को मिलेगा.
हालांकि, विपक्ष का कहना है कि ये केवल घोषणाएं हैं, ज़मीनी स्तर पर हालात जस के तस बना हुआ है .
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समाधान क्या हो सकता है?
किराड़ी जैसे इलाकों को जलभराव से मुक्त करने के लिए दीर्घकालिक और ईमानदार प्रयास जरूरी हैं.
ड्रेनेज मास्टर प्लान को आधुनिक ज़रूरतों के अनुसार अपडेट किया जाए.
नियमित रूप से नालों की सफाई और डिसिल्टिंग हो.
निर्माण कार्यों में ड्रेनों को नुकसान न पहुंचे, इसकी निगरानी हो.
स्थानीय स्तर पर कचरा प्रबंधन सख्त किया जाए.
जनता की शिकायतों पर त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित की जाए.
निष्कर्ष: राजधानी को राजधानी जैसा बनाना होगा
किराड़ी में जलभराव की समस्या दिल्ली के विकास मॉडल पर बड़ा सवाल खड़ा करती है. कांग्रेस द्वारा उठाई गई आवाज़ ने इस मुद्दे को एक बार फिर चर्चा में ला दिया है, लेकिन असली जिम्मेदारी सरकार की है.जब तक वादे ज़मीन पर नहीं उतरते, तब तक किराड़ी के लोग इसी नारकीय स्थिति में जीने को मजबूर रहेंगे.
दिल्ली को सच में स्मार्ट और विकसित शहर बनाना है, तो सबसे पहले आम नागरिक की बुनियादी समस्याओं का समाधान करना होगा. किराड़ी की जनता अब केवल आश्वासन नहीं, ठोस कार्रवाई चाहती है.

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