नागरिकों की जिंदगी और आजीविका पर संकट
तीसरा पक्ष ब्यूरो कुरसेला, बिहार 15 फ़रवरी: कुरसेला में हुई आग की भयावह घटना ने पूरे इलाके को हिला कर रख दिया है. सूत्रों के अनुसार, कई सौ दुकानें जल कर राख हो गईं और इस दौरान कोई भी अग्निशमन वाहन मौके पर नहीं पहुंचा, स्थानीय लोगों की दशा इतनी गंभीर थी कि उन्होंने अपने घर और व्यापार को बचाने के लिए आत्मनिर्भर तरीके अपनाना पड़ा है.

इस घटना ने एक बार फिर बिहार सरकार की सार्वजनिक सुरक्षा और आपातकालीन प्रबंधन की नाकामी को उजागर कर दिया है. लोग पूछ रहे हैं कि क्या राज्य में नागरिक सुरक्षा केवल शासन और सत्ता का दिखावा बन कर रह गया है.
सत्ता और जनता की दूरी
कुरसेला में हुई इस त्रासदी के बाद कई राजनीतिक हस्तियों ने टिप्पणी किया है.पप्पू यादव ने ट्विटर पर कहा है कि,
सम्राट जी उपमुख्यमंत्री, गृह मंत्री बनने, धौंस जमाने, निर्दोष को फंसाने और दोषी को बचाने से रुतबा और पहचान नहीं बनता, कितनी जिंदगी और आजीविका बचाते हैं, न्याय दिलाते हैं उससे पहचान बनेगी,
इस बयान का मतलब साफ है कि सिर्फ पद और नाम से कोई सरकार की साख नहीं बनती है. जनता की सुरक्षा और उनकी आजीविका को बचाना ही असली पहचान है.
कुरसेला की आग: नुकसान और पीड़ा
कुरसेला की आग में प्रभावित हुए कई व्यापारी और दुकानदार अपनी सम्पत्ति के नुकसान से अभिभूत हैं.
अनुमानित नुकसान: कई सौ दुकानों का पूर्ण क्षतिग्रस्त होना.
प्रभावित परिवार: दर्जनों परिवारों की आजीविका पर खतरा.
तत्काल राहत: सरकार की तरफ से कोई त्वरित राहत नहीं.
स्थानीय लोगों का कहना है कि अगर अग्निशमन सेवाएं समय पर पहुंचतीं, तो नुकसान को काफी हद तक कम किया जा सकता था. इस असमर्थता ने केवल व्यापारियों को ही नहीं, बल्कि पूरे इलाके की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़ा कर दिया है.
न्याय और प्रशासन की भूमिका
स्थानीय प्रशासन और राज्य सरकार पर यह आरोप है कि वे केवल धौंस और दिखावे की राजनीति में लिप्त हैं.जबकि जनता को चाहिए कि
उनके जीवन और संपत्ति की सुरक्षा हो, आपातकालीन स्थिति में त्वरित राहत और बचाव हो ,और दोषियों के खिलाफ न्याय व्यवस्था की कार्रवाई
पप्पू यादव ने विशेष रूप से यह चुनौती दी है कि कुरसेला के लोगों को जवाब दिया जाए.यह न केवल प्रशासन की जवाबदेही का सवाल है बल्कि लोकतांत्रिक प्रणाली की साख का भी मुद्दा है.
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स्थानीय और राष्ट्रीय चिंता
यह घटना केवल कुरसेला तक ही सीमित नहीं है. यह पूरे राज्य की आपातकालीन प्रबंधन और नागरिक सुरक्षा प्रणाली की पोल खोलती है.अगर इस तरह की घटनाओं पर त्वरित और प्रभावी कार्रवाई नहीं होती, तो भविष्य में और भी बड़े नुकसान की आशंका बनी रहती है.
विशेषज्ञों का कहना है कि राज्य सरकार को चाहिए कि,
अग्निशमन और बचाव सेवाओं की संख्या बढ़ाई जाए.
त्वरित प्रतिक्रिया टीमों का गठन किया जाए.
प्रभावित व्यापारियों और परिवारों के लिए राहत पैकेज जारी किया जाए.
निष्कर्ष
कुरसेला की आग ने स्पष्ट कर दिया कि सत्ता और पद की चमक से जनता की सुरक्षा सुनिश्चित नहीं होती है.असली पहचान और रुतबा वही है जो जीवन और आजीविका बचाने में दिखाई दे.पप्पू यादव का संदेश स्पष्ट है:”धौंस और दिखावे से नहीं, बल्कि न्याय और सुरक्षा से ही सरकार की असली पहचान बनती है.
कुरसेला के लोग और व्यापारी अब इंतजार कर रहे हैं कि राज्य सरकार और प्रशासन इस त्रासदी का त्वरित और न्यायपूर्ण समाधान दें.

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