शांतिपूर्ण प्रदर्शन पर लाठीचार्ज, गिरफ़्तारी से बढ़ा विवाद
तीसरा पक्ष ब्यूरो वाराणसी,19 जनवरी — वाराणसी के ऐतिहासिक मणिकर्णिका घाट से जुड़ा एक मामला इन दिनों राजनीतिक और सामाजिक हलकों में चर्चा का विषय बना हुआ है. महारानी माता अहिल्याबाई होल्कर की प्राचीन और ऐतिहासिक मूर्तियों को नुकसान पहुंचाए जाने के आरोपों के बाद, शुक्रवार को बहुजन पाल समाज द्वारा किए गए शांतिपूर्ण प्रदर्शन पर पुलिस लाठीचार्ज और कई प्रदर्शनकारियों की गिरफ़्तारी की खबर सामने आई है. इस घटना को लेकर बहुजन संगठनों और सामाजिक कार्यकर्ताओं में तीखी नाराज़गी देखी जा रही है.
क्या है पूरा मामला?
भीम आर्मी प्रमुख और सांसद चंद्रशेखर आज़ाद ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर एक पोस्ट साझा करते हुए दावा किया कि 10 जनवरी को मणिकर्णिका घाट पर नारी शक्ति, साहस और न्याय की प्रतीक मानी जाने वाली महारानी अहिल्याबाई होल्कर की प्राचीन मूर्तियों को तोड़ा गया. पोस्ट के अनुसार, इसी घटना के विरोध में जब बहुजन पाल समाज ने शांतिपूर्ण प्रदर्शन किया, तो पुलिस ने प्रदर्शनकारियों पर लाठीचार्ज किया और एक दर्जन से अधिक लोगों को गिरफ़्तार कर लिया.
चंद्रशेखर आज़ाद ने अपनी पोस्ट में इसे न केवल ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत पर हमला बताया, बल्कि कहा कि इस घटना पर सवाल उठाने वालों के साथ कठोर कार्रवाई प्रशासन की संवेदनहीनता को दर्शाती है.
अक्षम्य अपराध बताया गया मूर्तियों को नुकसान
पोस्ट में यह भी कहा गया कि महारानी अहिल्याबाई होल्कर की मूर्तियों को नुकसान पहुंचाना अपने आप में एक अक्षम्य अपराध है. उनका कहना है कि अहिल्याबाई होल्कर भारतीय इतिहास में सुशासन, न्याय और नारी सशक्तिकरण की प्रतीक रही हैं, और उनकी विरासत से जुड़ी मूर्तियों को नुकसान पहुंचाना सामाजिक भावनाओं को आहत करता है.
ट्रस्ट अध्यक्ष यशवंत होल्कर का बयान
इस पूरे प्रकरण पर अहिल्याबाई होल्कर ट्रस्ट के अध्यक्ष यशवंत होल्कर का भी बयान सामने आया है. बताया गया है कि उन्होंने मणिकर्णिका घाट से एक वीडियो जारी कर घटना पर कड़ा विरोध दर्ज कराया. उनके अनुसार, मूर्तियों का टूटना अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण, एक गंभीर चूक है और इसे किसी भी रूप में स्वीकार नहीं किया जा सकता.
यशवंत होल्कर ने कथित तौर पर इस मामले को लेकर कमिश्नर एस. राजलिंगम और नगर आयुक्त हिमांशु नागपाल से मुलाकात कर औपचारिक आपत्ति दर्ज कराई है. इसके साथ ही, उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पत्र लिखकर निष्पक्ष जांच और दोषियों पर सख़्त कार्रवाई की मांग की है.
प्रशासनिक कार्रवाई पर उठे सवाल
शांतिपूर्ण प्रदर्शन पर पुलिस कार्रवाई को लेकर भी कई सवाल खड़े किए जा रहा हैं. बहुजन संगठनों का कहना है कि लोकतांत्रिक तरीके से अपनी बात रखने वालों पर लाठीचार्ज करना अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और न्यायपूर्ण विरोध के अधिकार पर चोट है.
चंद्रशेखर आज़ाद ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से सवाल करते हुए पूछा है कि क्या बहुजन इतिहास और नारी सम्मान पर हमले करने वालों को संरक्षण मिलेगा और न्याय की मांग करने वालों पर लाठियां बरसाई जाएंगी.
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सरकार से क्या हैं मांगें?
पोस्ट के अनुसार, बहुजन संगठनों ने उत्तर प्रदेश सरकार से कई मांगें रखी हैं, जिनमें प्रमुख रूप से,
गिरफ्तार किए गए सभी प्रदर्शनकारियों की तत्काल रिहाई
लाठीचार्ज का आदेश देने वाले अधिकारियों की जवाबदेही तय करना
मूर्तियों को नुकसान पहुंचाने वालों पर कड़ी कानूनी कार्रवाई
बहुजन और नारी विरासत की सुरक्षा की ठोस गारंटी
राजनीतिक और सामाजिक प्रतिक्रिया
यह मामला धीरे-धीरे राजनीतिक रंग भी लेता जा रहा है. सामाजिक संगठनों का कहना है कि अहिल्याबाई होल्कर जैसी ऐतिहासिक शख्सियत का अपमान केवल एक समुदाय नहीं, बल्कि पूरे समाज की भावनाओं को ठेस पहुंचाता है. वहीं, प्रशासन की ओर से इस मुद्दे पर विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया का इंतजार किया जा रहा है.
निष्कर्ष
मणिकर्णिका घाट से जुड़ा यह विवाद केवल मूर्तियों के नुकसान तक सीमित नहीं है, बल्कि यह इतिहास, सांस्कृतिक विरासत, नारी सम्मान और लोकतांत्रिक अधिकारों से जुड़ा व्यापक प्रश्न खड़ा करता है.अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि प्रशासन और सरकार इस मामले में क्या कदम उठाती है और क्या निष्पक्ष जांच के जरिए दोषियों की पहचान कर कार्रवाई की जाती है.

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