अपराधी पृष्ठभूमि वाले प्रत्याशियों पर पारदर्शिता—किसकी जिम्मेदारी?
तीसरा पक्ष ब्यूरो पटना,9 दिसंबर 2025— संसद में आज जब चुनाव सुधार पर गहन चर्चा हो रही है, उसी दौरान बहुजन समाज पार्टी (BSP) की सुप्रीमो मायावती ने X (पूर्व Twitter) पर लगातार कई पोस्ट करते हुए चुनाव प्रणाली में सुधार के लिए तीन महत्वपूर्ण सुझाव दिये है.उनका कहना है कि चुनाव प्रक्रिया को पारदर्शी और सभी मतदाताओं के लिए सुलभ बनाने के लिए सरकार और चुनाव आयोग को जल्दबाज़ी छोड़कर व्यापक और मानवीय दृष्टिकोण अपनाना चाहिये.
मायावती का यह बयान उस समय आया है जब देशभर में SIR को लेकर काम तेज़ी से चल रहा है, लेकिन इस प्रक्रिया की समय-सीमा को लेकर कई तरह की कठिनाइयाँ सामने आ रही हैं.उनके सुझाव न सिर्फ तकनीकी हैं, बल्कि प्रशासनिक और सामाजिक दृष्टि से भी बेहद महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं.
SIR प्रक्रिया की समय-सीमा बढ़ाने की मांग
मायावती ने कहा कि BSP SIR की प्रक्रिया के खिलाफ नहीं है, बल्कि इस बात के खिलाफ है कि चुनाव आयोग ने इसे बेहद कम समय में पूरा करने का निर्देश दिया है.
देश में करोड़ों मतदाता हैं, और BLO (Booth Level Officer) पर भारी दबाव बना रहता है. मायावती ने यह भी बताया कि काम के अत्यधिक दबाव के कारण कई BLO अपनी जान तक गंवा चुके हैं. ऐसे में तंग समय सीमा में इतनी बड़ी प्रक्रिया को पूरा करने का प्रयास व्यावहारिक नहीं है.
विशेष रूप से उत्तर प्रदेश जैसे विशाल राज्य में, जहाँ 15.40 करोड़ से ज़्यादा मतदाता हैं, इतनी जल्दबाज़ी से अनेक वैध मतदाताओं,विशेषकर गरीब, प्रवासी और बाहर काम कर रहे लोगों,के नाम छूट जाने का ख़तरा बढ़ जाता है.
मायावती का कहना है कि अगर किसी व्यक्ति का नाम मतदाता सूची से छूट जाता है तो यह डॉ. भीमराव अंबेडकर द्वारा दिए गए संवैधानिक मतदान-अधिकार का हनन होगा. इसलिए उन्होंने स्पष्ट सुझाव दिया कि SIR की समय-सीमा बढ़ाई जाए और किसी भी तरह की जल्दबाज़ी चुनाव प्रक्रिया की विश्वसनीयता को नुकसान पहुँचा सकती है.
अपराधी पृष्ठभूमि वाले प्रत्याशियों पर पारदर्शिता—किसकी जिम्मेदारी?
सुप्रीम कोर्ट के निर्देश अनुसार, जिन प्रत्याशियों पर कोई आपराधिक मामला है, उन्हें अपने हलफनामे में इसकी विस्तृत जानकारी देना अनिवार्य है.साथ ही, संबंधित जानकारी स्थानीय व राष्ट्रीय अख़बारों में प्रकाशित करना भी ज़रूरी है.अब तक यह ज़िम्मेदारी राजनीतिक पार्टियों पर डाली गई है.
लेकिन मायावती ने इस व्यवस्था को अव्यवहारिक बताया है.उनका कहना है कि कई बार प्रत्याशी अपनी आपराधिक पृष्ठभूमि पार्टी को बताते ही नहीं हैं. कई मामलों में पार्टी को इसकी जानकारी स्क्रूटनी के दौरान मिलती है, जिसके बाद सारी जिम्मेदारी पार्टी पर आ जाती है.
इस स्थिति को बदलते हुए मायावती ने सुझाव दिया है कि,
अपराधी पृष्ठभूमि से जुड़े सभी औपचारिक कार्य (हलफनामा, अख़बार में प्रकाशन आदि) की पूरी जिम्मेदारी प्रत्याशी पर ही डाला जाये.
यदि कोई प्रत्याशी अपनी जानकारी छुपाता है, तो इसकी कानूनी जवाबदेही सिर्फ उसी की होनी चाहिए, पार्टी की नहीं.
यह सुझाव इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि लोकतांत्रिक व्यवस्था में अपराधी पृष्ठभूमि वाले प्रत्याशियों को लेकर लगातार चिंता जताई जाती रही है.पारदर्शिता की जिम्मेदारी प्रत्याशी पर डालने से इस समस्या के समाधान की दिशा में ठोस कदम साबित हो सकता है.
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EVM पर उठते सवाल—BSP का बैलेट पेपर की ओर लौटने का सुझाव
चुनाव आयोग तक लगातार EVM (Electronic Voting Machine) को लेकर शिकायतें पहुँचती रहती हैं.चुनाव के दौरान और बाद में, कई दल और नागरिक संगठन EVM गड़बड़ी के आरोप लगाते हैं.
मायावती का कहना है कि चुनाव प्रक्रिया पर जनता का भरोसा सुनिश्चित करने के लिए अब समय आ गया है कि देश बैलेट पेपर प्रणाली को फिर से अपनाने पर विचार करे.
उन्होंने यह भी कहा कि यदि बैलेट पेपर पर लौटना अभी संभव नहीं है, तो कम से कम यह आवश्यक है कि;
हर बूथ पर VVPAT की सभी पर्चियों की गिनती की जाए और EVM के नतीजों से उसका मिलान किया जाए.
चुनाव आयोग का तर्क है कि ऐसा करने में काफी समय लगेगा, लेकिन मायावती इस तर्क को अनुचित मानती हैं. उनका कहना है कि जब चुनाव प्रक्रिया में कई महीने लगते हैं, तो कुछ घंटों की अतिरिक्त गिनती से कोई नुकसान नहीं होगा, बल्कि इससे जनता का सिस्टम पर भरोसा और मजबूत होगा.
उनके अनुसार, VVPAT स्लिप की 100% गिनती करने से मशीनों पर उठ रहे सभी संदेह खत्म होंगे और चुनाव प्रक्रिया पर पूर्णविराम लग सकेगा—जो लोकतंत्र के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण है.
निष्कर्ष: लोकतंत्र की मजबूती के लिए पारदर्शी और व्यापक सुधार ज़रूरी
मायावती के तीनों सुझाव चुनाव प्रणाली की विश्वसनीयता को बढ़ाने वाली दिशा में बेहद महत्वपूर्ण हैं.
SIR की समय-सीमा बढ़ाकर वैध मतदाताओं को वंचित होने से बचाया जा सकता है.
अपराधी पृष्ठभूमि वाले प्रत्याशियों की पारदर्शिता की जिम्मेदारी तय करने से राजनीति की शुचिता बढ़ेगी.
और EVM–VVPAT की पूर्ण जांच से चुनाव प्रक्रिया पर अटूट भरोसा कायम होगा.
चुनाव सुधारों पर चल रही राष्ट्रीय बहस में BSP प्रमुख मायावती का यह हस्तक्षेप एक रचनात्मक और महत्वपूर्ण योगदान है, जो लोकतंत्र को मजबूत करने की दिशा में ठोस मार्गदर्शन देता है.

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