मनरेगा बचाओ मोर्चा: मोदी-शाह की राजनीति पर कांग्रेस का तीखा हमला

| BY

Ajit Kumar

भारत
मनरेगा बचाओ मोर्चा: मोदी-शाह की राजनीति पर कांग्रेस का तीखा हमला

गरीब और मजदूर फिर हाशिये पर क्यों?

तीसरा पक्ष ब्यूरो दिल्ली, 22 जनवरी 2026 — देश की राजनीति एक बार फिर गर्म है. कांग्रेस पार्टी ने केंद्र की मोदी सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए आरोप लगाया है कि देश को दो लोग,नरेंद्र मोदी और अमित शाह चला रहे हैं, लेकिन उनका फोकस शासन और जनकल्याण से ज्यादा चुनाव प्रचार तक सीमित रह गया है. कांग्रेस के आधिकारिक X (पूर्व ट्विटर) हैंडल @INCIndia पर साझा पोस्ट में यह बयान मनरेगा बचाओ मोर्चा के दौरान कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे द्वारा दिया गया, जिसमें उन्होंने सरकार की नीतियों, विकास के दावों और मजदूर विरोधी रवैये पर गंभीर सवाल उठाये है.

देश नहीं, चुनाव चल रहे हैं – कांग्रेस का आरोप

कांग्रेस का कहना है कि मौजूदा सरकार देश चलाने से ज्यादा चुनावी राजनीति में व्यस्त है.पोस्ट में साफ कहा गया कि नरेंद्र मोदी और अमित शाह पूरे देश में रैलियां और प्रचार तो कर रहे हैं, लेकिन आम जनता, खासतौर पर गरीब, मजदूर और ग्रामीण वर्ग, की समस्याओं पर कोई ठोस काम नहीं हो रहा है.

कांग्रेस के अनुसार, सरकार की प्राथमिकताएं बदल चुकी हैं.रोजगार, महंगाई, मजदूरी और सामाजिक सुरक्षा जैसे मुद्दे पीछे छूट गए हैं, जबकि सत्ता बचाने की राजनीति आगे आ गई है.

बुलेट ट्रेन बनाम जमीनी हकीकत

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा बुलेट ट्रेन जैसे बड़े प्रोजेक्ट्स के वादों पर भी कांग्रेस ने सवाल उठाया है, पोस्ट में कहा गया कि बुलेट ट्रेन तो दूर की बात है, सरकार नई रेलवे पटरियां तक नहीं बिछा पाई है.

कांग्रेस का तर्क है कि जब देश के लाखों मजदूरों को नियमित रोजगार नहीं मिल पा रहा, जब रेलवे सुरक्षा और बुनियादी ढांचे की हालत चिंताजनक है, तब केवल बड़े-बड़े सपनों की बातें करना जनता को गुमराह करने जैसा है.

मजदूरों का दर्द क्यों नहीं समझती सरकार?

मनरेगा बचाओ मोर्चा’ का मूल मुद्दा यही है कि सरकार को मजदूरों की पीड़ा का एहसास नहीं है.कांग्रेस ने आरोप लगाया कि जिन नेताओं ने कभी मजदूरी नहीं की, वे मजदूरों की समस्याओं को कैसे समझ सकते हैं?

मनरेगा जैसी योजना, जो ग्रामीण भारत की जीवन रेखा मानी जाती है, आज उपेक्षा का शिकार है.मजदूरी भुगतान में देरी, काम के दिनों में कटौती और बजट में कमी,ये सभी मुद्दे मजदूरों की जिंदगी को और कठिन बना रहा हैं.

चाय वाला बयान पर सीधा हमला

कांग्रेस ने प्रधानमंत्री के उस बयान पर भी निशाना साधा, जिसमें वे खुद को चाय वाला बताते हैं.. कांग्रेस का कहना है कि यह सिर्फ वोट लेने का नाटक है.अगर सच में गरीबों और मजदूरों से जुड़ाव होता, तो उनकी नीतियों में भी वह संवेदनशीलता दिखाई देता.

कांग्रेस के अनुसार, जमीनी सच्चाई यह है कि न तो मजदूरों की मजदूरी बढ़ी, न उनकी सुरक्षा सुनिश्चित हुई और न ही रोजगार के स्थायी अवसर पैदा किया गया .
मनरेगा बचाओ मोर्चा: क्यों जरूरी है यह आंदोलन?

मनरेगा केवल एक योजना नहीं, बल्कि ग्रामीण भारत की आर्थिक रीढ़ है. कांग्रेस का कहना है कि इस योजना को कमजोर करना सीधे-सीधे करोड़ों गरीब परिवारों की आजीविका पर हमला है.

मनरेगा बचाओ मोर्चा के जरिए कांग्रेस सरकार को यह संदेश देना चाहती है कि अगर मजदूरों के हक पर चोट होगी, तो सड़क से संसद तक आवाज बुलंद की जाएगी.

ये भी पढ़े :मोदी–योगी सरकार पर संजय सिंह का हमला: FIR और जेल से नहीं रुकेगा सच,संसद से सड़क तक जारी रहेगा संघर्ष
ये भी पढ़े :भारत जोड़ो यात्रा में पावर सेक्टर की सामाजिक असमानता पर सवाल

राजनीतिक संदेश और आगे की राह

कांग्रेस का यह बयान सिर्फ आलोचना नहीं, बल्कि आने वाले राजनीतिक संघर्ष का संकेत भी है.पार्टी यह स्पष्ट करना चाहती है कि वह गरीब, मजदूर और वंचित वर्ग के मुद्दों को केंद्र में रखकर सरकार को घेरती रहेगी.

दिल्ली में आयोजित इस कार्यक्रम ने यह दिखाया कि मनरेगा और रोजगार जैसे मुद्दे आने वाले समय में राजनीति के बड़े केंद्र बिंदु बन सकते हैं.

निष्कर्ष

कुल मिलाकर, Congress @INCIndia के इस X पोस्ट के जरिए उठाए गए सवाल केवल राजनीतिक बयानबाजी नहीं हैं, बल्कि वे देश की मौजूदा नीतियों पर गंभीर बहस की मांग करता हैं. मनरेगा, रोजगार और मजदूरों की स्थिति जैसे मुद्दे आज भी उतने ही प्रासंगिक हैं, जितने पहले थे.

मनरेगा बचाओ मोर्चा’ ने यह साफ कर दिया है कि अगर विकास के दावे जमीनी हकीकत से दूर रहेंगे, तो जनता की आवाज और तेज होगी,चाहे सड़क पर हो या संसद में.

Trending news

Leave a Comment