मोदी सरकार की विदेश नीति पर AAP का तीखा हमला

| BY

Ajit Kumar

भारत
संजय सिंह का बयान, मोदी सरकार की विदेश नीति पर सवाल

संजय सिंह ने उठाए गंभीर सवाल

तीसरा पक्ष ब्यूरो नई दिल्ली, 3 मार्च: भारत की राजनीति में विदेश नीति को लेकर बयानबाज़ी अक्सर चर्चा का विषय बन जाता है.इसी कड़ी में आम आदमी पार्टी (AAP) ने प्रधानमंत्री Narendra Modi की विदेश नीति पर तीखा हमला बोला है.पार्टी के राज्यसभा सांसद Sanjay Singh ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर किए गए अपने पोस्ट में प्रधानमंत्री की अंतरराष्ट्रीय छवि और कूटनीतिक फैसलों पर सवाल खड़ा किया हैं.

क्या है पूरा मामला?

AAP के आधिकारिक हैंडल Aam Aadmi Party पर साझा किया गया बयान में कहा गया है कि प्रधानमंत्री की छवि वैश्विक स्तर पर कमजोर पड़ रहा है और अन्य देश इसका फायदा उठा रहा हैं.पोस्ट में आरोप लगाया गया कि विदेशी नेता भारत के प्रधानमंत्री की, झूठी तारीफ कर अपने हित साध लेते हैं.

संजय सिंह ने यह भी आरोप लगाया है कि अमेरिका के दबाव में भारत ने रूस से तेल खरीदना कम या बंद किया, जबकि रूस लंबे समय से भारत का रणनीतिक सहयोगी रहा है. यह बयान ऐसे समय में आया है जब वैश्विक भू-राजनीति में रूस-यूक्रेन संघर्ष और पश्चिमी देशों के प्रतिबंधों का असर पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर पड़ रहा है.

अमेरिका और रूस के बीच संतुलन की चुनौती

भारत की विदेश नीति परंपरागत रूप से रणनीतिक स्वायत्तता पर आधारित रहा है. भारत ने न तो पूरी तरह पश्चिमी देशों के साथ खुद को जोड़ा है और न ही किसी एक धड़े के साथ स्थायी गठबंधन किया है.

रूस लंबे समय से भारत का रक्षा और ऊर्जा क्षेत्र में अहम साझेदार रहा है. वहीं अमेरिका के साथ भी पिछले एक दशक में भारत के संबंधों में उल्लेखनीय सुधार हुआ है.रक्षा समझौतों से लेकर क्वाड जैसे मंचों पर सहयोग तक, दोनों देशों के रिश्ते गहरा हुआ हैं.

ऐसे में AAP का आरोप है कि मोदी सरकार अमेरिका के दबाव में फैसले ले रही है, जबकि सरकार का पक्ष अक्सर यह रहा है कि भारत अपने राष्ट्रीय हितों को सर्वोपरि रखकर निर्णय लेता है.

ईरान मुद्दे पर भी सवाल

AAP सांसद ने अपने बयान में ईरान का जिक्र करते हुए कहा है कि यदि किसी वैश्विक घटना पर भारत चुप रहता है तो इससे उसकी कूटनीतिक स्थिति पर सवाल उठ सकता हैं. हालांकि, अंतरराष्ट्रीय मामलों में भारत अक्सर संतुलित और सावधानीपूर्ण बयान देने की रणनीति अपनाता है ताकि किसी भी पक्ष के साथ संबंध खराब न हों.

ईरान, रूस और अमेरिका जैसे देशों के बीच बढ़ते तनाव के दौर में भारत के लिए संतुलन बनाना आसान नहीं है. ऊर्जा सुरक्षा, रक्षा साझेदारी और प्रवासी भारतीयों की सुरक्षा जैसे कई आयाम इस नीति को प्रभावित करता हैं.

राजनीतिक बयान या वास्तविक चिंता?

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि विपक्षी दल अक्सर विदेश नीति को लेकर सरकार पर सवाल उठाता रहा हैं. इससे पहले भी विभिन्न मुद्दों पर संसद और सार्वजनिक मंचों पर सरकार से जवाब मांगा गया है.

आम आदमी पार्टी का यह बयान ऐसे समय आया है जब देश में लोकसभा चुनावों और विभिन्न राज्यों में राजनीतिक गतिविधियां तेज हो रहा हैं. ऐसे में विदेश नीति भी एक राजनीतिक विमर्श का हिस्सा बनता दिखाई दे रहा है.

सरकार का संभावित पक्ष

हालांकि इस बयान पर सरकार की ओर से तत्काल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, लेकिन सरकार पहले भी स्पष्ट कर चुका है कि भारत मल्टी-अलाइनमेंट की नीति पर चलता है.

प्रधानमंत्री Narendra Modi कई वैश्विक मंचों पर भारत की भूमिका को मजबूत करने का दावा करते रहे हैं. G20 शिखर सम्मेलन की मेजबानी से लेकर विभिन्न द्विपक्षीय समझौतों तक, सरकार इसे अपनी कूटनीतिक सफलता के रूप में पेश करता है.

ये भी पढ़े :फतेहपुर में शिक्षामित्र की आत्महत्या: सिस्टम का दबाव, राजनीति की प्रतिक्रिया और न्याय की पुकार
ये भी पढ़े :अलीगढ़ में शिक्षक पर जातीय टिप्पणी का आरोप: शिक्षा व्यवस्था पर गहरी चोट

जनता के लिए क्या मायने?

विदेश नीति के निर्णयों का सीधा असर आम जनता पर भी पड़ता है,चाहे वह पेट्रोल-डीजल की कीमतें हों, रक्षा सौदे हों या वैश्विक मंचों पर भारत की साख.

यदि रूस से तेल खरीदने में बदलाव होता है तो इसका असर ऊर्जा बाजार पर पड़ सकता है. वहीं अमेरिका के साथ मजबूत संबंध व्यापार और तकनीकी निवेश के नए अवसर भी खोल सकता हैं.

इसलिए यह बहस केवल राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप तक सीमित नहीं है, बल्कि भारत की दीर्घकालिक रणनीति और राष्ट्रीय हितों से भी जुड़ा है.

निष्कर्ष

Aam Aadmi Party द्वारा उठाया गया सवालों ने एक बार फिर भारत की विदेश नीति को राजनीतिक बहस के केंद्र में ला दिया है. Sanjay Singh का बयान सरकार की नीतियों की आलोचना करता है, जबकि सरकार अपनी रणनीतिक स्वायत्तता और वैश्विक संतुलन की नीति का हवाला देती रही है.

आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या इस मुद्दे पर संसद में चर्चा होती है या सरकार आधिकारिक प्रतिक्रिया देती है.फिलहाल, यह स्पष्ट है कि विदेश नीति अब केवल कूटनीतिक गलियारों का विषय नहीं रह गई है, बल्कि घरेलू राजनीति का भी अहम हिस्सा बन चुकी है.

Trending news

Leave a Comment