मोदी के बयान पर सुप्रिया श्रीनेत का हमला, उठे बड़े सवाल

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Ajit Kumar

भारतदुनिया
सुप्रिया श्रीनेत द्वारा पीएम मोदी के पश्चिम एशिया बयान पर प्रतिक्रिया

पश्चिम एशिया संकट पर सरकार की रणनीति पर विपक्ष ने घेरा

तीसरा पक्ष ब्यूरो नई दिल्ली 23 मार्च :पश्चिम एशिया में जारी तनाव और युद्ध के बीच भारत की भूमिका को लेकर देश की राजनीति गरमा गया है. Supriya Shrinate ने प्रधानमंत्री Narendra Modi के लोकसभा में दिए गए बयान पर तीखा हमला बोला है. उन्होंने इसे खोदा पहाड़ और निकली चुहिया बताते हुए सरकार की विदेश नीति और ऊर्जा सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़ा किया हैं.

भाषण की शैली पर भी उठे सवाल

सुप्रिया श्रीनेत ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X (ट्विटर) पर कहा है कि प्रधानमंत्री का 24 मिनट 14 सेकंड का भाषण देश की अपेक्षाओं पर खरा नहीं उतरा .उनके अनुसार, स्थिति की गंभीरता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि प्रधानमंत्री ने इस बार पूरे भाषण को पढ़कर दिया, जबकि आमतौर पर वे आत्मविश्वास के साथ बिना कागज़ के बोलते हैं.

उन्होंने यह भी कहा कि इस बार प्रधानमंत्री ने न तो अपने सामान्य आक्रामक अंदाज में बात की और न ही विपक्ष पर हमला किया, बल्कि एकजुटता की अपील करते नजर आए—जो संकेत देता है कि संकट अभी टला नहीं है.

पश्चिम एशिया पर स्पष्ट नीति की मांग

विपक्ष की सबसे बड़ी आपत्ति यह रही कि प्रधानमंत्री ने अपने भाषण में पश्चिम एशिया के मौजूदा संघर्ष पर भारत की स्पष्ट नीति सामने नहीं रखा.

Supriya Shrinate के मुताबिक, देश जानना चाहता था कि भारत का रुख क्या है, लेकिन भाषण में ठोस जवाब की जगह सामान्य बातें और आंकड़े पेश किया गया .

उन्होंने विशेष रूप से यह मुद्दा उठाया कि प्रधानमंत्री ने United States और Israel का नाम तक नहीं लिया, जबकि वैश्विक घटनाक्रम में इनकी अहम भूमिका माना जा रहा है.

ऊर्जा संकट और आपूर्ति पर चिंता

प्रधानमंत्री ने अपने भाषण में Strait of Hormuz के बंद होने से सप्लाई बाधित होने की बात स्वीकार की थी. इसी मुद्दे को लेकर विपक्ष ने सरकार को घेरा है.

श्रीनेत ने सवाल उठाया कि जब सरकार खुद मान रही है कि आपूर्ति प्रभावित हो रही है, तो देश को यह क्यों नहीं बताया गया कि तेल और गैस की आपूर्ति कैसे सुनिश्चित की जाएगी?

उन्होंने यह भी पूछा कि Iran, Israel और United States के साथ इस मुद्दे पर क्या बातचीत चल रही है.

महंगाई और आम जनता पर असर

विपक्ष का आरोप है कि सरकार ने बढ़ती महंगाई और उसके असर को नजरअंदाज किया है .श्रीनेत के अनुसार, LPG, पेट्रोल, डीजल और खाद्य तेलों की कीमतों में बढ़ोतरी से आम जनता और उद्योग दोनों प्रभावित हो रहे हैं.

उन्होंने दावा किया कि गैस आधारित कई फैक्ट्रियां बंद हो चुकी हैं और मजदूरों को फिर से अपने गांव लौटने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है—जो आर्थिक संकट का संकेत है.

किसानों और उर्वरक संकट पर सवाल

किसानों के मुद्दे पर भी सरकार को घेरा गया.श्रीनेत ने कहा कि यूरिया उत्पादन बढ़ाने के दावे किए जा रहे हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर खाद की कमी बनी हुई है.

उन्होंने सवाल उठाया कि जब पहले भी आपूर्ति में बाधा नहीं थी, तब भी कई राज्यों में खाद की कमी क्यों देखी गई? और अब जब वैश्विक संकट गहराता जा रहा है, तो इसका समाधान क्या है?

विदेश नीति और ऊर्जा सुरक्षा पर तीखी टिप्पणी

श्रीनेत ने सरकार की विदेश नीति को विफल करार देते हुए कहा है कि भारत ने अपनी ऊर्जा सुरक्षा को दूसरे देशों पर निर्भर बना दिया है.

उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि रूस से सस्ते तेल की जगह अब महंगे दामों पर तेल खरीदा जा रहा है, जिससे देश की अर्थव्यवस्था पर अतिरिक्त बोझ पड़ रहा है.

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मानवीय मुद्दों पर चुप्पी का आरोप

विपक्ष ने यह भी आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री ने युद्ध में मारे गए निर्दोष लोगों पर कोई संवेदना व्यक्त नहीं की.

श्रीनेत के मुताबिक, यह सिर्फ कूटनीतिक नहीं बल्कि मानवीय मुद्दा भी है, जिस पर सरकार को स्पष्ट रुख अपनाना चाहिए था.

निष्कर्ष: राजनीतिक बहस तेज

पश्चिम एशिया संकट पर प्रधानमंत्री के बयान के बाद देश में राजनीतिक बहस तेज हो गई है.जहां सरकार इसे संतुलित और जिम्मेदार रुख बता रही है, वहीं विपक्ष इसे अस्पष्ट और अधूरा करार दे रहा है.

आने वाले दिनों में यह मुद्दा संसद से लेकर सड़कों तक गूंज सकता है, क्योंकि ऊर्जा सुरक्षा, महंगाई और विदेश नीति जैसे सवाल सीधे आम जनता के जीवन से जुड़े हैं.

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