10 साल तक घर की गुहार, अंत में मौत का सहारा: मुजफ्फरपुर में दलित परिवार की चीख
तीसरा पक्ष ब्यूरो पटना, 16 दिसंबर 2025 बिहार के मुजफ्फरपुर जिले से सामने आई एक हृदयविदारक घटना ने पूरे राज्य को झकझोर कर रख दिया है. सकरा थाना क्षेत्र के नवलपुर मिश्रौलिया गांव में एक दलित परिवार के चार सदस्यों ने आर्थिक तंगी और प्रशासनिक उपेक्षा से तंग आकर आत्महत्या कर ली है. यह घटना न सिर्फ इंसानियत को शर्मसार करने वाली है, बल्कि बिहार सरकार के तथाकथित, विकास और सुशासन के दावों की सच्चाई भी उजागर करती है.
राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के बिहार प्रदेश अध्यक्ष श्री मंगनी लाल मंडल ने इस घटना को दलित और गरीब विरोधी सरकारी नीतियों तथा अधिकारियों की घोर लापरवाही का परिणाम बताया है.
क्या है पूरा मामला?
मुजफ्फरपुर जिले के नवलपुर मिश्रौलिया गांव के निवासी स्वर्गीय अमरनाथ राम (37 वर्ष) ने अपनी तीन मासूम बेटियों,
अनुराधा कुमारी (12 वर्ष)
शिवानी कुमारी (11 वर्ष)
राधा कुमारी (6 वर्ष)
के साथ फांसी लगाकर आत्महत्या कर लिया है . इस दर्दनाक घटना में चार लोगों की मौके पर ही मौत हो गई है , जबकि उनके दो बेटे,
शिवम कुमार (7 वर्ष)
चंदन कुमार (4 वर्ष)
किसी तरह बच गया है.
यह दृश्य किसी भी संवेदनशील समाज के लिए असहनीय है. सवाल यह है कि आखिर एक पिता अपनी मासूम बेटियों के साथ मौत को गले लगाने के लिए क्यों मजबूर हुआ?
10 साल तक दर-दर भटका, नहीं मिला घर
राजद अध्यक्ष मंगनी लाल मंडल के अनुसार, अमरनाथ राम पिछले 10 वर्षों से गृहविहीन थे. वे लगातार बी.डी.ओ. और अन्य प्रशासनिक अधिकारियों के चक्कर काटते रहे ताकि उन्हें इंदिरा आवास योजना के तहत एक घर मिल सके.
लेकिन अफसोस, हर बार उन्हें सिर्फ आश्वासन मिला—मदद नहीं.
सरकारी फाइलों में शायद यह एक लंबित मामला रहा होगा, लेकिन असल ज़िंदगी में यह परिवार भूख, असुरक्षा और अपमान से जूझता रहा. जब उम्मीद की आख़िरी किरण भी बुझ गई, तब इस दलित परिवार ने आत्महत्या जैसा भयावह कदम उठा लिया.
विकास के दावों की खुली पोल
इस घटना ने यह स्पष्ट कर दिया है कि बिहार में दलितों और गरीबों की वास्तविक स्थिति क्या है. सरकार मंचों से विकास के बड़े-बड़े दावे करती है, लेकिन ज़मीनी हकीकत इससे बिल्कुल उलट है.
मंगनी लाल मंडल ने कहा है कि यह घटना केवल एक परिवार की त्रासदी नहीं है, बल्कि यह पूरे सिस्टम की असफलता का प्रतीक है.
यदि समय रहते प्रशासन ने संवेदनशीलता दिखाई होती, तो शायद आज चार जिंदगियां बचाई जा सकती थीं.
राजद ने बनाई 7 सदस्यीय जांच समिति
घटना की गंभीरता को देखते हुए राष्ट्रीय जनता दल ने त्वरित कार्रवाई करते हुए 7 सदस्यीय जांच समिति का गठन किया है. इस बात की जानकारी राजद के प्रदेश प्रवक्ता एजाज अहमद ने दी है.
जांच समिति के सदस्य
शिवचन्द्र राम – पूर्व मंत्री (अध्यक्ष)
मो. इसराइल मंसूरी – पूर्व मंत्री
शंकर यादव – विधायक
लाल बाबू राम – पूर्व विधायक
अमर पासवान – पूर्व विधायक
रमेश गुप्ता – जिलाध्यक्ष, राजद मुजफ्फरपुर
सुधीर यादव – जिला प्रधान महासचिव, राजद मुजफ्फरपुर
यह समिति 17 दिसंबर 2025 को घटनास्थल का दौरा करेगी और,
पीड़ित परिवार की स्थिति
प्रशासन और पुलिस की भूमिका
सरकारी योजनाओं की वास्तविक स्थिति
की जांच कर अपना प्रतिवेदन राज्य कार्यालय में सौंपेगी.
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सबसे बड़ा सवाल: जिम्मेदार कौन?
यह सवाल अब सिर्फ विपक्ष का नहीं, बल्कि पूरे समाज का है,
क्या प्रशासन की लापरवाही के लिए कोई जवाबदेह होगा?
क्या दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई होगी?
क्या दलित और गरीब परिवारों को सिर्फ चुनावी भाषणों में ही याद किया जाएगा?
अगर इन सवालों के जवाब नहीं मिले, तो ऐसी घटनाएं बार-बार होती रहेंगी.
निष्कर्ष: चेतावनी है यह घटना
मुजफ्फरपुर की यह त्रासदी एक चेतावनी है,सरकार और प्रशासन दोनों के लिए है.
अगर समय रहते व्यवस्था नहीं सुधरी, अगर गरीबों और दलितों की आवाज़ अनसुनी होती रही, तो विकास का नारा सिर्फ एक खोखला जुमला बनकर रह जाएगा.
अब वक्त है कि सरकार आत्ममंथन करे, दोषियों पर कार्रवाई हो और पीड़ित परिवार को न्याय मिले, ताकि भविष्य में कोई और अमरनाथ राम अपनी बेटियों के साथ मौत को मजबूर न हो.

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