भाकपा(माले)–इंसाफ मंच का राज्यव्यापी प्रतिवाद, 16 दिसंबर को होगा निर्णायक संघर्ष
तीसरा पक्ष ब्यूरो पटना 15 दिसंबर 2025 — बिहार के नवादा जिले से सामने आई मॉब लिंचिंग की घटना ने पूरे राज्य को झकझोर कर रख दिया है. 5 दिसंबर 2025 को रोह थाना क्षेत्र के भट्टा गांव में मुस्लिम कपड़ा फेरीवाले मोहम्मद अतहर हुसैन की निर्मम हत्या न सिर्फ एक व्यक्ति की जान लेने की घटना है, बल्कि यह बिहार में कानून के शासन पर गहरे सवाल खड़ा करती है. यह मामला साफ तौर पर दर्शाता है कि राज्य में भीड़तंत्र और सांप्रदायिक नफरत किस कदर बेलगाम होती जा रही है.
भाकपा(माले) और इंसाफ मंच की संयुक्त जांच टीम नवादा पहुंची
इस जघन्य घटना की गंभीरता को देखते हुए भाकपा(माले) और इंसाफ मंच की एक राज्य स्तरीय संयुक्त जांच टीम 15 दिसंबर 2025 को नवादा पहुंची. टीम का नेतृत्व फुलवारी के पूर्व विधायक का. गोपाल रविदास और वरिष्ठ नेता का. अनवर हुसैन ने किया.उनके साथ का. मुर्तजा अली (पटना महानगर), का. भोला राम (जिला सचिव, नवादा) और का. पाल बिहारी लाल (नालंदा) भी शामिल रहे.
टीम ने पीड़ित परिवार, स्थानीय लोगों और प्रत्यक्षदर्शियों से बातचीत कर जमीनी हालात का जायजा लिया. जांच के दौरान सामने आए तथ्य न केवल दिल दहला देने वाली हैं, बल्कि प्रशासनिक लापरवाही की भी गंभीर तस्वीर पेश करते हैं.
शक के आधार पर बर्बरता: मानवता को शर्मसार करने वाला अपराध
मोहम्मद अतहर हुसैन को सिर्फ इस संदेह में घेर लिया गया कि वे मुस्लिम हैं. इसके बाद उनके साथ जो हुआ, वह किसी सभ्य समाज में अकल्पनीय है. उन्हें बेरहमी से पीटा गया, गर्म औजार से दागा गया, कान काटे गए, उंगली तोड़ी गई और उनके प्राइवेट पार्ट में पेट्रोल डाला गया. गंभीर रूप से घायल अवस्था में उन्हें मरणासन्न छोड़ दिया गया.
इतना ही नहीं, इलाज के बजाय उल्टे पीड़ित पर चोरी का झूठा मुकदमा दर्ज कर दिया गया. लगातार बिगड़ती हालत के बीच 12 दिसंबर 2025 को इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई. यह मौत केवल भीड़ की हिंसा नहीं, बल्कि पुलिस, जिला प्रशासन और चिकित्सकीय लापरवाही का भी नतीजा है.
भय के साए में जीते मुस्लिम परिवार
घटना के बाद भट्टा गांव और आसपास के इलाकों में डर का माहौल है.गांव में रह रहे 10–15 मुस्लिम परिवार सहमे हुए हैं और खुलकर अपनी बात रखने की स्थिति में नहीं हैं.जांच टीम के अनुसार, अपराधियों को स्थानीय स्तर पर संरक्षण मिल रहा है और उनकी सामाजिक–आपराधिक पृष्ठभूमि की गंभीर जांच अब तक नहीं की गई है.
यह स्थिति बताती है कि बिहार में अल्पसंख्यक समुदाय खुद को असुरक्षित महसूस कर रहा है, जो लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए बेहद चिंताजनक संकेत है.
योगी मॉडल की आहट? बिहार की सामाजिक एकता पर खतरा
भाकपा(माले) और इंसाफ मंच का स्पष्ट आरोप है कि गृह मंत्री सम्राट चौधरी के कार्यभार संभालने के बाद राज्य में मॉब हिंसा और बुलडोजर कार्रवाई में इजाफा हुआ है. यदि एनडीए सरकार बिहार में तथाकथित ‘योगी मॉडल’ लागू करने का सपना देख रही है, तो यह राज्य की सामाजिक सद्भावना, गंगा-जमुनी तहजीब और लोकतांत्रिक मूल्यों के लिए घातक साबित होगा.
बिहार की पहचान हमेशा सामाजिक न्याय, समावेश और संविधानिक मूल्यों से रही है. यहां नफरत और दमन की राजनीति को किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जा सकता.
16 दिसंबर को राज्यव्यापी प्रतिवाद का ऐलान
इन तमाम हालात को देखते हुए भाकपा(माले) और इंसाफ मंच ने 16 दिसंबर 2025 को राज्यव्यापी प्रतिवाद का आह्वान किया है.बिहार के सभी जिलों में धरना, प्रदर्शन और विरोध सभाएँ आयोजित की जाएँगी.यह प्रतिवाद सिर्फ एक हत्या के खिलाफ नहीं, बल्कि बढ़ते भीड़तंत्र, सांप्रदायिक हिंसा और प्रशासनिक विफलता के खिलाफ होगा.
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प्रमुख माँगें क्या हैं?
भाकपा(माले) और इंसाफ मंच ने सरकार के सामने स्पष्ट माँगें रखी हैं,
मोहम्मद अतहर हुसैन की हत्या में शामिल सभी दोषियों की तत्काल गिरफ्तारी कर उन्हें कड़ी सजा दी जाए.
पीड़ित परिवार को सुरक्षा, न्याय और पर्याप्त मुआवजा दिया जाए.
पीड़ित पर लगाए गए झूठे मुकदमों को रद्द किया जाए और दोषी पुलिसकर्मियों व अधिकारियों पर कार्रवाई हो.
राज्य में बुलडोजर कार्रवाई और भीड़तंत्र पर तत्काल रोक लगाई जाए.
गृह मंत्री सम्राट चौधरी कानून-व्यवस्था की स्थिति पर सार्वजनिक जवाब दें.
संविधान और इंसाफ की लड़ाई
भाकपा(माले) और इंसाफ मंच ने बिहार की जनता से अपील की है कि वे संविधान, लोकतंत्र और इंसाफ की रक्षा के लिए इस राज्यव्यापी प्रतिवाद में बढ़-चढ़कर हिस्सा लें. यह संघर्ष किसी एक समुदाय का नहीं, बल्कि पूरे समाज की सुरक्षा और मानवाधिकारों की लड़ाई है.
भीड़तंत्र, नफरत और दमन की राजनीति के खिलाफ संघर्ष जारी रहेगा.
यह समय चुप रहने का नहीं, बल्कि इंसाफ के पक्ष में मजबूती से खड़े होने का है.

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