जनांदोलनों की जीत: NEET छात्रा मामले में CBI जांच की सिफारिश

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Ajit Kumar

बिहार
जनांदोलनों की जीत: NEET छात्रा मामले में CBI जांच की सिफारिश

माले महासचिव ने सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में जांच की मांग उठाई

तीसरा पक्ष ब्यूरो पटना, 31 जनवरी 2026 बिहार में NEET की तैयारी कर रही छात्रा से जुड़े बलात्कार–हत्या मामले को लेकर चल रहे व्यापक जनांदोलनों और पीड़ित परिजनों के लगातार संघर्ष के दबाव में आखिरकार राज्य सरकार को CBI जांच की सिफारिश करना पड़ा है.इस फैसले को भाकपा (माले) महासचिव का. दीपंकर भट्टाचार्य ने जनसंघर्षों की जीत करार देते हुए कहा कि यह लड़ाई अभी समाप्त नहीं हुई है, बल्कि अब इसे निर्णायक मोड़ तक ले जाना जरूरी है.

माले महासचिव ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि केवल CBI जांच की सिफारिश पर्याप्त नहीं माना जा सकता है. उन्होंने मांग किया कि इस पूरे मामले की जांच सुप्रीम कोर्ट के किसी सीटिंग जज के प्रत्यक्ष निर्देशन और निगरानी में समयबद्ध तरीके से कराया जाये, ताकि जांच पूरी तरह निष्पक्ष, स्वतंत्र और भरोसेमंद हो सके.

सरकार और प्रशासन की भूमिका पर गंभीर सवाल

दीपंकर भट्टाचार्य ने आरोप लगाया कि इस जघन्य घटना के बाद से ही बिहार सरकार और उसका पुलिस-प्रशासन संदिग्ध और नकारात्मक भूमिका निभाता रहा है.उन्होंने कहा कि प्रारंभ से ही पुलिस-प्रशासन का रवैया मामले को दबाने वाला, बलात्कार–हत्या जैसी गंभीर सच्चाई से इनकार करने वाला और प्रभावशाली व रसूखदार आरोपियों को बचाने वाला रहा है.

उनका कहना था कि जब जांच एजेंसियां ही सवालों के घेरे में हों, तो ऐसे में पीड़ित परिवार को न्याय की उम्मीद राज्य सरकार की एजेंसियों से करना अपने आप में अन्याय होगा. यही कारण है कि इस मामले में सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में जांच बेहद आवश्यक है.

समयबद्ध जांच और कड़ी कार्रवाई की मांग

माले महासचिव ने यह भी मांग किया कि CBI जांच के लिए एक स्पष्ट समय-सीमा तय की जाए, ताकि न्याय में अनावश्यक देरी न हो. उन्होंने कहा कि अक्सर जांचों को लंबा खींच दिया जाता है, जिससे पीड़ित परिवार मानसिक और सामाजिक रूप से टूट जाता है.

उन्होंने जोर देकर कहा कि दोषियों के खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई सुनिश्चित की जाए और जांच के निष्कर्षों को सार्वजनिक किया जाए, ताकि समाज में यह संदेश जाए कि बेटियों के खिलाफ अपराध करने वालों को किसी भी हाल में बख्शा नहीं जाएगा.

पतियामा गांव पहुंचकर परिजनों से मिले दीपंकर भट्टाचार्य

इस बीच, माले महासचिव जहानाबाद जिले के पतियामा गांव पहुंचे, जहां उन्होंने पीड़ित NEET छात्रा के परिजनों से मुलाकात किया.उन्होंने परिजनों को भरोसा दिलाया कि यह लड़ाई सिर्फ एक परिवार की नहीं, बल्कि बिहार की हर बेटी की सुरक्षा, सम्मान और न्याय की लड़ाई है.

दीपंकर भट्टाचार्य ने कहा कि पार्टी और जनांदोलन इस संघर्ष में परिजनों के साथ मजबूती से खड़ा हैं और न्याय मिलने तक आंदोलन जारी रहेगा.उन्होंने कहा कि इस मामले को किसी भी कीमत पर ठंडे बस्ते में नहीं जाने दिया जाएगा.

बेटी बचाओ–न्याय यात्रा’ का ऐलान

न्याय की मांग को लेकर AIPWA और AISA के संयुक्त आह्वान पर राज्यव्यापी बेटी बचाओ–न्याय यात्रा आयोजित करने की घोषणा की गई है.यह यात्रा जहानाबाद से शुरू होकर नालंदा, नवादा, गया, औरंगाबाद, अरवल और पटना जिलों से गुजरेगी.

कार्यक्रम के तहत

3 फरवरी को पटना में जनसुनवाई, 4 से 10 फरवरी तक बेटी बचाओ–न्याय यात्रा, और 10 फरवरी को पटना में विधानसभा मार्च आयोजित किया जाएगा.

इस यात्रा के जरिए व्यापक जनसमर्थन जुटाने और सरकार पर न्याय सुनिश्चित करने का दबाव बनाने की रणनीति तय की गई है.

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जनता से आंदोलन में भागीदारी की अपील

माले महासचिव ने आम जनता, लोकतांत्रिक संगठनों, महिला संगठनों और छात्र संगठनों से अपील किया कि वे इस आंदोलन में सक्रिय भागीदारी करें. उन्होंने कहा कि जब तक समाज एकजुट होकर आवाज नहीं उठाएगा, तब तक बेटियों के लिए सुरक्षित और न्यायपूर्ण वातावरण बनाना संभव नहीं होगा.

उन्होंने यह भी कहा कि यह आंदोलन बिहार की राजनीति और शासन व्यवस्था के लिए एक कसौटी है, जिसमें यह तय होगा कि सरकार सच में बेटियों की सुरक्षा चाहती है या सिर्फ दिखावटी घोषणाओं तक सीमित रहना चाहती है.

निष्कर्ष

NEET छात्रा से जुड़े इस मामले ने एक बार फिर बिहार में महिला सुरक्षा, पुलिस-प्रशासन की जवाबदेही और न्याय प्रणाली की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं.जनांदोलनों के दबाव में CBI जांच की सिफारिश एक अहम कदम जरूर है, लेकिन सुप्रीम कोर्ट की निगरानी, समयबद्ध जांच और पारदर्शी कार्रवाई ही इस मामले में वास्तविक न्याय सुनिश्चित कर सकती है.

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