Supriya Shrinate के बयान से बढ़ी बहस, सरकार पर उठे कड़े सवाल
तीसरा पक्ष ब्यूरो नई दिल्ली 24 मार्च 2026: भारत की विदेश नीति एक बार फिर राजनीतिक बहस के केंद्र में आ गई है. Supriya Shrinate द्वारा सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X (पूर्व में ट्विटर) पर किए गए एक तीखे बयान ने राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दिया है.उनके बयान में सीधे तौर पर प्रधानमंत्री Narendra Modi और उनकी विदेश नीति पर सवाल उठाए गए हैं.
सु्प्रिया श्रीनेत ने अपने पोस्ट में दावा किया कि जहां एक ओर प्रधानमंत्री मोदी इज़राइल के साथ करीबी संबंधों को लेकर सक्रिय रहे, वहीं दूसरी ओर पाकिस्तान जैसे देश को अंतरराष्ट्रीय मंच पर अहम भूमिका मिलती दिखाई दे रही है.उन्होंने विशेष रूप से यह मुद्दा उठाया कि Pakistan अब अमेरिका और ईरान जैसे देशों के बीच तनाव कम कराने में मध्यस्थ की भूमिका निभा रहा है.
अंतरराष्ट्रीय राजनीति में बदलता समीकरण
विश्व राजनीति में गठबंधनों और रिश्तों का बदलना कोई नई बात नहीं है. लेकिन श्रीनेत के अनुसार, वर्तमान परिस्थितियों में भारत का इस तरह से किनारे होना चिंताजनक है.उन्होंने अपने बयान में कहा कि पाकिस्तान, जिसे लंबे समय से आतंकवाद को समर्थन देने वाला देश माना जाता रहा है, आज वैश्विक कूटनीति में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है.
उन्होंने Asim Munir का भी जिक्र किया है , जिनके बारे में कहा गया कि वे युद्ध समाप्त कराने में भूमिका निभा रहे हैं. यह बयान सीधे तौर पर पाकिस्तान की बदलती छवि और उसकी कूटनीतिक सक्रियता की ओर इशारा करता है.
भारत की भूमिका पर उठे सवाल
सु्प्रिया श्रीनेत का सबसे बड़ा आरोप यह है कि भारत, जो पहले वैश्विक मुद्दों पर सक्रिय भूमिका निभाता था, अब कई अहम मामलों में नदारद दिखाई दे रहा है.उन्होंने कहा कि भारत कभी भी इतना अलग-थलग नहीं पड़ा था जितना कि वर्तमान समय में दिख रहा है.
हालांकि, यह ध्यान रखना जरूरी है कि भारत की विदेश नीति बहुआयामी और रणनीतिक होती है. कई बार सरकारें सार्वजनिक रूप से हर पहल को सामने नहीं लातीं. विशेषज्ञों का मानना है कि भारत अभी भी कई वैश्विक मंचों पर सक्रिय है, लेकिन उसकी रणनीति पहले से अलग हो सकती है.
अमेरिका और ईरान के बीच तनाव
श्रीनेत के बयान में यह भी उल्लेख किया गया है कि अमेरिका के उपराष्ट्रपति वार्ता के लिए इस्लामाबाद आने वाले हैं. यदि ऐसा होता है, तो यह पाकिस्तान के लिए एक बड़ी कूटनीतिक उपलब्धि मानी जा सकती है.
United States और Iran के बीच लंबे समय से तनाव बना हुआ है. ऐसे में अगर पाकिस्तान इस तनाव को कम करने में भूमिका निभाता है, तो यह उसके लिए वैश्विक छवि सुधारने का अवसर हो सकता है.
राजनीतिक बयानबाजी और हकीकत
भारत में विपक्ष और सरकार के बीच आरोप-प्रत्यारोप कोई नई बात नहीं है. श्रीनेत का बयान भी इसी राजनीतिक परंपरा का हिस्सा माना जा सकता है.उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी की विदेश यात्राओं और कूटनीतिक शैली पर तंज कसते हुए कहा कि फोटो ऑप्स और मेडल की राजनीति का खामियाजा देश भुगत रहा है.
हालांकि, सरकार के समर्थक इस तरह के आरोपों को पूरी तरह खारिज करता हैं.उनका कहना है कि मोदी सरकार ने भारत की वैश्विक छवि को मजबूत किया है और कई देशों के साथ रणनीतिक साझेदारी बढ़ाई है, जिसमें इज़राइल, अमेरिका और खाड़ी देश शामिल हैं.
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विशेषज्ञों की राय
विदेश नीति विशेषज्ञों का मानना है कि अंतरराष्ट्रीय संबंध हमेशा बदलते रहता हैं और किसी एक घटना के आधार पर निष्कर्ष निकालना सही नहीं होगा. भारत आज भी G20, BRICS और QUAD जैसे महत्वपूर्ण मंचों का हिस्सा है और वैश्विक राजनीति में उसकी भूमिका अहम बनी हुई है.
निष्कर्ष
सु्प्रिया श्रीनेत का बयान निश्चित रूप से एक बड़ी बहस को जन्म देता है. यह सवाल उठाता है कि क्या भारत वास्तव में वैश्विक मंच पर पीछे हो रहा है, या फिर यह केवल राजनीतिक बयानबाजी का हिस्सा है.
सच्चाई शायद इन दोनों के बीच कहीं है.जहां एक ओर पाकिस्तान अपनी छवि सुधारने की कोशिश कर रहा है, वहीं भारत भी अपनी रणनीति के तहत काम कर रहा है.
आखिरकार, विदेश नीति का मूल्यांकन केवल बयानों से नहीं, बल्कि दीर्घकालिक परिणामों से किया जाना चाहिए.

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