न्याय की आवाज़ को दबाने की कोशिश? पप्पू यादव की गिरफ्तारी पर भाकपा–माले का तीखा हमला

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Ajit Kumar

बिहार
पप्पू यादव की गिरफ्तारी पर भाकपा–माले का विरोध, बिहार राजनीति

नीट छात्रा कांड के बाद जनआवाज़ को कुचलने का आरोप

तीसरा पक्ष ब्यूरो पटना, 7 फरवरी 2026— बिहार की राजनीति एक बार फिर गंभीर सवालों के घेरे में है. सामाजिक न्याय, जनपक्षधरता और लोकतांत्रिक मूल्यों की बात करने वाले नेता पप्पू यादव की गिरफ्तारी ने न केवल राजनीतिक हलकों में, बल्कि आम जनता के बीच भी गहरी चिंता पैदा कर दिया है. भाकपा–माले ने इस गिरफ्तारी को न्याय की आवाज़ दबाने की साजिश बताते हुए राज्य सरकार पर तीखा हमला बोला है.पार्टी का कहना है कि यह कार्रवाई कानून के नाम पर सत्ता के दुरुपयोग और राजनीतिक प्रतिशोध का खुला उदाहरण है.

आधी रात की गिरफ्तारी और लोकतंत्र पर सवाल

भाकपा–माले के राज्य सचिव कुणाल ने प्रेस बयान जारी कर कहा कि 31 साल पुराने एक सामान्य मामले में, वह भी बिना किसी पूर्व सूचना या नोटिस के, रात 12 बजे पप्पू यादव की गिरफ्तारी बेहद चौंकाने वाली और निंदनीय है.उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में कानून का उद्देश्य न्याय देना होता है, न कि विपक्षी आवाज़ों को डराना. इस तरह की गिरफ्तारी यह संदेश देता है कि सरकार असहमति और सवालों से घबरा चुका है.

नीट छात्रा कांड और सरकार की भूमिका

कुणाल ने कहा कि हाल के दिनों में नीट की एक छात्रा के साथ हुए जघन्य हत्या–बलात्कार कांड ने पूरे बिहार को झकझोर कर रख दिया है. यह मामला केवल एक अपराध नहीं, बल्कि राज्य में कानून-व्यवस्था की भयावह स्थिति को उजागर करता है. इस दुखद घटना के बाद पप्पू यादव लगातार पीड़ित परिवार के साथ खड़े रहे, न्याय की मांग को सार्वजनिक मंचों पर उठाते रहे और सरकार की निष्क्रियता को बेनकाब करते रहे.

भाकपा–माले का आरोप है कि सरकार अपराधियों तक पहुंचने और उन्हें सजा दिलाने के बजाय, उन लोगों को निशाना बना रही है जो पीड़ितों के साथ खड़ा हैं.यह रवैया न केवल असंवेदनशील है, बल्कि लोकतंत्र की आत्मा के भी खिलाफ है.

क्या न्याय मांगना अब अपराध है?

भाकपा–माले ने इस गिरफ्तारी को एक खतरनाक संदेश बताया है. पार्टी का कहना है कि आज बिहार में ऐसा माहौल बनाया जा रहा है, जहां न्याय की मांग करना, सत्ता से सवाल पूछना और अन्याय के खिलाफ आवाज़ उठाना अपराध बना दिया गया है. जो भी जनहित में बोलता है, उसे डराने, धमकाने और चुप कराने की कोशिश की जा रही है.

कुणाल ने कहा कि यह केवल पप्पू यादव का मामला नहीं है, बल्कि यह हर उस नागरिक की आवाज़ पर हमला है जो लोकतंत्र में विश्वास रखता है. अगर आज एक नेता को इस तरह निशाना बनाया जा सकता है, तो कल आम नागरिक भी इससे अछूता नहीं रहेगा.

भाजपा–जदयू सरकार पर गंभीर आरोप

भाकपा–माले ने भाजपा–जदयू सरकार पर अपराधियों को संरक्षण देने और जनआंदोलनों को कुचलने की नीति अपनाने का आरोप लगाया है. पार्टी के अनुसार, नीट छात्रा कांड में सरकार की संवेदनहीनता और पप्पू यादव की गिरफ्तारी, दोनों एक ही राजनीतिक रणनीति का हिस्सा प्रतीत होता हैं. उद्देश्य साफ़ है,जनाक्रोश को दबाना और असली मुद्दों से ध्यान भटकाना.

लोकतांत्रिक संस्थाओं की साख पर असर

विशेषज्ञों और राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस तरह की घटनाएं लोकतांत्रिक संस्थाओं की साख को कमजोर करता हैं. जब कानून का इस्तेमाल निष्पक्ष न्याय के बजाय राजनीतिक हथियार के रूप में किया जाता है, तो जनता का भरोसा व्यवस्था से उठने लगता है. भाकपा–माले ने चेतावनी दी है कि यदि यह सिलसिला नहीं रुका, तो इसके गंभीर सामाजिक और राजनीतिक परिणाम होंगे.

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भाकपा–माले की मांग और आगे की राह

भाकपा–माले ने पप्पू यादव की गिरफ्तारी की कड़े शब्दों में निंदा करते हुए उनकी तत्काल और बिना शर्त रिहाई की मांग किया है. पार्टी ने स्पष्ट किया है कि वह इस मुद्दे पर चुप नहीं बैठेगी और लोकतांत्रिक तरीकों से जनआंदोलन तेज़ करेगी. साथ ही, पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने की लड़ाई भी जारी रहेगी.

निष्कर्ष

पप्पू यादव की गिरफ्तारी केवल एक व्यक्ति की गिरफ्तारी नहीं, बल्कि यह उस आवाज़ पर हमला है जो न्याय, इंसाफ़ और मानवता की बात करता है. भाकपा–माले का कहना है कि लोकतंत्र में सवाल पूछना अपराध नहीं हो सकता. यदि सरकार सच में कानून-व्यवस्था और न्याय को लेकर गंभीर है, तो उसे विपक्षी नेताओं को गिरफ्तार करने के बजाय अपराधियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करनी चाहिये.

आज बिहार जिस मोड़ पर खड़ा है, वहां यह तय करना ज़रूरी है कि राज्य भय और दमन की राजनीति से चलेगा या न्याय, संवेदना और लोकतांत्रिक मूल्यों के रास्ते पर.

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