3 दिसंबर को विधानसभा के समक्ष धरना
तीसरा पक्ष ब्यूरो पटना, 27 नवंबर 2025 — पटना नगर क्षेत्र में हाल के दिनों में बड़े पैमाने पर किए गए अतिक्रमण विरोधी अभियानों ने फुटपाथ दुकानदारों, सर्वेक्षित वेंडरों और झुग्गी-झोपड़ी में रहने वाले गरीब परिवारों को गंभीर संकट में डाल दिया है. नगर निगम द्वारा जारी वेंडिंग पहचान-पत्र होने के बावजूद जिन दुकानदारों का विधिवत सर्वेक्षण हो चुका है, उन्हें भी लगातार उजाड़ा जा रहा है.इसी मुद्दे को लेकर व्यवसायी महासंघ ने 3 दिसंबर 2025 को बिहार विधानसभा के समक्ष व्यापक धरना आयोजित करने की घोषणा की है.
यह विरोध-धरना न केवल प्रशासनिक कार्रवाईयों के खिलाफ आवाज उठाने का प्रयास है बल्कि उन हजारों गरीब परिवारों के पक्ष में भी एक संगठित लड़ाई है, जिनकी रोज़ी-रोटी प्रतिदिन इंसानी गलियों और बाजारों में लगने वाली छोटी दुकानों और ठेलों पर निर्भर है.
सुदामा प्रसाद का आरोप — विधिवत सर्वेक्षित वेंडरों को भी लगातार हटाया जा रहा
माले के आरा से सांसद और व्यवसायियों के प्रमुख नेता सुदामा प्रसाद ने बताया कि वेंडरों का आधिकारिक सर्वेक्षण और पहचान-पत्र जारी होने के बावजूद नगर निगम लगातार उन्हें बेदखल कर रहा है.
उन्होंने कहा कि,
न्यू मार्केट
महावीर मंदिर
वीणा सिनेमा
दक्षिण बुद्ध पार्क
सहित पटना के कई प्रमुख इलाकों में बिना किसी वैकल्पिक व्यवस्था के फुटपाथ दुकानदारों को हटाया गया है. यह कार्रवाई न केवल संवेदनहीन है बल्कि स्ट्रीट वेंडर्स (सुरक्षा एवं आजीविका संरक्षण) एक्ट का सीधा उल्लंघन भी है.
सुदामा प्रसाद ने बताया कि आज उनकी टीम ने पटना कमिश्नर से मुलाकात कर फुटपाथ दुकानदारों पर चल रही पुलिस-प्रशासनिक कार्रवाइयों पर तत्काल रोक लगाने की मांग भी रखी है.
बेदखली गरीब परिवारों के मौलिक अधिकारों का हनन
व्यवसायी महासंघ का कहना है कि वेंडरों को केंद्र सरकार की प्रधानमंत्री स्वरोजगार योजना के अंतर्गत 10,000 रुपये से लेकर 50,000 रुपये तक के ऋण स्वीकृत किए गए हैं. ऐसे में उन्हें बार-बार जुर्माना लगाना, ठेला जब्त करना और दुकानें हटाना पूरी तरह अनैतिक और अनुचित है.
सुदामा प्रसाद ने यह भी कहा कि जब खुद नगर निगम द्वारा वेंडिंग आईडी जारी की गई है, तो उन्हीं दुकानदारों को अतिक्रमणकर्ता मानना न्याय के सिद्धांतों के खिलाफ है. उनका दावा है कि यह कार्रवाई सड़क किनारे अपने अस्तित्व की लड़ाई लड़ रहे गरीब परिवारों के साथ सीधा अन्याय है.
धरने को लेकर तेज हुई तैयारी — 8 जिलों के प्रतिनिधि हुए शामिल
3 दिसंबर के धरने की तैयारी को लेकर आज पूर्व विधायक आवास में महत्वपूर्ण बैठक आयोजित हुई.
इस बैठक में,
वरिष्ठ व्यापारी नेता शंभू नाथ मेहता
फुटपाथ दुकानदार नेता शहजादे आलम
और पटना सहित 8 जिलों के प्रतिनिधि शामिल हुए.
बैठक में सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि विधानसभा के समक्ष इस मुद्दे को अत्यंत मजबूती से उठाया जाएगा.उम्मीद है कि बड़ी संख्या में दुकानदार और व्यापारी इस दिन पटना पहुंचकर अपनी आवाज बुलंद करेंगे.
प्रतिनिधियों का कहना है कि जब तक प्रशासन फुटपाथ दुकानदारों की सुरक्षा और पुनर्वास की स्पष्ट नीति नहीं अपनाता, तब तक आंदोलन जारी रहेगा.
व्यवसायी महासंघ और फुटपाथ दुकानदारों की मुख्य मांगें
धरने में निम्नलिखित मांगों को प्रमुखता से उठाया जाएगा
- उजाड़े गए दुकानदारों के लिए तत्काल वैकल्पिक व्यवस्था
प्रशासन द्वारा जिन वेंडरों की दुकानें हटाई गई हैं, उनके लिए तुरंत नई जगह और सुरक्षित आजीविका सुनिश्चित की जाए.
- सर्वेक्षित वेंडरों को बेदखल करने पर पूर्ण रोक
जिन दुकानदारों के पास वैध वेंडिंग आईडी है, उन्हें किसी भी परिस्थिति में हटाया न जाए.
- स्ट्रीट वेंडर्स एक्ट का सख्ती से पालन
यह कानून वेंडरों को सुरक्षा, पुनर्वास और आजीविका का अधिकार देता है — इसका पूर्ण पालन अनिवार्य किया जाए.
- जब्त ठेले और सामान तत्काल वापस किए जाएँ
पिछले दिनों की गई कार्रवाई में जब्त किए गए ठेले व सामग्रियों को बिना देरी दुकानदारों को लौटाया जाए.
- भविष्य में किसी भी कार्रवाई से पहले विधिसम्मत नोटिस
किसी भी वेंडर के खिलाफ कार्रवाई तभी की जाए जब उसे लिखित नोटिस और पुनर्वास योजना दोनों उपलब्ध कराई जाएँ.
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जनजीवन और रोज़गार के बीच संघर्ष — आंदोलन क्यों जरूरी है?
फुटपाथ दुकानदार शहर की आर्थिक व्यवस्था का अभिन्न हिस्सा हैं. वे सस्ती कीमतों पर रोजमर्रा की वस्तुएं उपलब्ध कराते हैं और लाखों लोगों के लिए सुविधा पैदा करते हैं.
लेकिन जब ऐसे वेंडरों को बिना पूर्व सूचना हटाया जाता है, तो
उनका रोज़गार छिन जाता है.
परिवार की आर्थिक सुरक्षा टूटने लगती है.
बच्चों की पढ़ाई तक प्रभावित होती है.
और समाज में असंतोष की स्थिति बन जाती है.
इसलिए व्यवसायी महासंघ का कहना है कि यह आंदोलन किसी एक समूह का नहीं, बल्कि पूरे शहरी गरीब तबके के अधिकारों की लड़ाई है.
3 दिसंबर के धरने से क्या बदलेगा?
व्यवसायी महासंघ को उम्मीद है कि विधानसभा के सामने होने वाले इस बड़े विरोध-प्रदर्शन से सरकार और प्रशासन का ध्यान इस गंभीर मुद्दे पर जाएगा. यदि वेंडरों की समस्याओं का समाधान नहीं हुआ, तो आंदोलन को और व्यापक करने की संभावनाओं से भी इनकार नहीं किया गया है.
निष्कर्ष
पटना में फुटपाथ दुकानदारों की बेदखली का मामला केवल कानून-व्यवस्था की कार्रवाई नहीं, बल्कि गरीब परिवारों के अस्तित्व का सवाल है.
3 दिसंबर को होने वाला धरना इस संघर्ष को नई दिशा दे सकता है. यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि सरकार इस आंदोलन और इन मांगों पर क्या कदम उठाती है.

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