पटना में आइसा–आरवाईए का प्रदर्शन, नीतीश–मोदी का पुतला दहन

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Ajit Kumar

बिहार
पटना में आइसा–आरवाईए का प्रदर्शन, नीतीश–मोदी का पुतला दहन

विशेष सर्वेक्षण संविदाकर्मियों की बहाली और नियमितीकरण की मांग तेज

तीसरा पक्ष ब्यूरो पटना, 14 सितंबर 2025 –बिहार में 7,480 विशेष सर्वेक्षण संविदाकर्मियों की बर्खास्तगी को लेकर विरोध तेज हो गया है. रविवार को ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (आइसा) और रिवोल्यूशनरी यूथ एसोसिएशन (आरवाईए) ने राजधानी पटना के आयकर गोलंबर पर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का पुतला दहन कर जोरदार प्रदर्शन किया.

विशेष सर्वेक्षण संविदाकर्मियों की बहाली और नियमितीकरण की मांग तेज

इससे पहले कार्यकर्ता एमएलए फ्लैट कैंपस से जुलूस की शक्ल में मार्च करते हुए आयकर गोलंबर पहुंचे और नारेबाजी करते हुए पुतला दहन किया.प्रदर्शन में बड़ी संख्या में संविदाकर्मी और छात्र-युवा शामिल थे.

नौकरी देने का नाटक, छीनने की राजनीति

आइसा राज्य सह सचिव कुमार दिव्यम ने कहा कि भाजपा-जदयू गठबंधन सरकार छात्रों और युवाओं के खिलाफ काम कर रही है.उन्होंने आरोप लगाया,

एक तरफ सरकार रोजगार देने का दिखावा करती है, दूसरी तरफ संविदाकर्मियों को बर्खास्त कर उनकी रोज़ी-रोटी छीन रही है.नौकरी देने वाली नहीं, नौकरी छीनने वाली सरकार बन गई है.

दिव्यम ने बताया कि आंदोलनकारियों की पांच प्रमुख मांगें हैं –

सेवा को 60 वर्ष तक नियमित किया जाए.

स्थायी नियुक्ति में प्रतिवर्ष 5 अंक की अधिमानता मिले.

मानदेय में वृद्धि हो.

पूर्व समझौते को लागू किया जाए.

ESIC की सुविधा और EPF में सरकारी अंशदान सुनिश्चित किया जाए.

युवाओं पर लाठीचार्ज, सरकार से संवाद गायब

युवाओं पर लाठीचार्ज, सरकार से संवाद गायब

आरवाईए राज्य सह सचिव विनय कुमार ने कहा कि सरकार बहाली और नियमितीकरण की जगह बर्खास्तगी कर रही है. उन्होंने कहा कि ,

बिहार के युवाओं पर बर्बर लाठीचार्ज हो रहा है. आंदोलनरत कर्मियों और संगठनों से बातचीत करने की बजाय सत्ता पक्ष चुप्पी साधे हुए है. यही युवा आने वाले समय में बदलाव के वाहक बनेंगे.

आंदोलन में बड़ी भागीदारी

प्रदर्शन में आइसा और आरवाईए के कई राज्य स्तरीय नेता शामिल हुए। इनमें कुमार दिव्यम, आशीष साह, विनय कुमार, नीतीश कुमार, विकास रंजन, आदर्श कुमार, मिथलेश कुमार (आरवाईए राज्य अध्यक्ष), श्रवण कुमार, अभिषेक सिंह, अविनाश यादव, मनोज पासवान, रनविजय, रोहित, देवशंकर आर्या, दीपक, विष्णु, अमित, आनंद अमरजीत समेत सैकड़ों संविदाकर्मी और कार्यकर्ता मौजूद रहे.

यह पूरा मामला बिहार की राजनीति में रोजगार और संविदा नीति को लेकर एक बड़ा सवाल खड़ा करता है.आंदोलनकारी लगातार चेतावनी दे रहे हैं कि जब तक बहाली और नियमितीकरण नहीं होता, तब तक विरोध तेज़ी से जारी रहेगा.

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