छात्रहित के मुद्दों पर उबाल, आइसा का जोरदार प्रदर्शन
तीसरा पक्ष ब्यूरो पटना,30 मार्च 2026:आज आइसा(AISA ) के बैनर तले पटना विश्वविद्यालय में उस समय माहौल गरमा गया जब बिहार सरकार के शिक्षा मंत्री सुनील कुमार के कार्यक्रम का छात्रों ने विरोध करते हुए घेराव कर दिया. यह विरोध उस समय हुआ जब शिक्षा मंत्री विश्वविद्यालय के एकेडमिक भवन के उद्घाटन समारोह में शामिल होने पहुंचे थे.
उद्घाटन कार्यक्रम में विरोध, छात्रों का गुस्सा फूटा
पटना विश्वविद्यालय के एकेडमिक भवन के उद्घाटन को लेकर जहां प्रशासन और सरकार इसे एक बड़ी उपलब्धि के रूप में पेश कर रहे थे, वहीं छात्रों के एक बड़े वर्ग ने इसे सिर्फ दिखावा बताया है .आइसा के नेतृत्व में छात्रों ने शिक्षा मंत्री के खिलाफ नारेबाजी किया और उन्हें घेरकर अपनी मांगों को सामने रखा.
इस विरोध प्रदर्शन में वीर आदित्य, गौरव कुमार, विकास कुमार, अश्विन कुमार और रोहन कुमार सहित दर्जनों छात्र शामिल रहे. छात्रों ने आरोप लगाया है कि विश्वविद्यालय में बुनियादी समस्याएं को लंबे समय से अनदेखी की जा रही हैं.
छात्रों की मुख्य मांगें क्या हैं?
आइसा के नेताओं ने शिक्षा मंत्री के सामने कई अहम मुद्दे उठाया, जिनमें शामिल हैं,
विश्वविद्यालय में व्याप्त शैक्षणिक और प्रशासनिक अराजकता को समाप्त करना.
लेट-लतीफ सत्र को नियमित करना.
निजी आईटी सेंटर को तत्काल बर्खास्त करना.
नई शिक्षा नीति (NEP) को वापस लेना.
जर्जर छात्रावासों की मरम्मत कराना.
जेंडर सेल को सक्रिय करना.
शिक्षकों की भारी कमी को दूर करना.
आइसा नेता विवेक कुमार ने कहा कि सिर्फ भवन बनाकर शिक्षा की गुणवत्ता नहीं सुधारा जा सकता है. जब तक शिक्षक नहीं होंगे और सत्र नियमित नहीं होगा, तब तक छात्रों का भविष्य अंधकार में ही रहेगा.
जर्जर छात्रावास और लेट सेशन बना बड़ा मुद्दा
छात्रों ने विशेष रूप से विश्वविद्यालय के छात्रावासों की खराब स्थिति पर चिंता जताई है . उनका कहना है कि कई छात्रावास बेहद जर्जर हालत में हैं, जहां रहना तक मुश्किल हो गया है.इसके अलावा सत्रों के लगातार लेट होने से छात्रों का करियर प्रभावित हो रहा है.
आइसा के राज्य सह सचिव आशीष राज ने कहा है कि हम शिक्षा मंत्री से शांतिपूर्वक मिलकर अपनी समस्याएं बताना चाहते थे, लेकिन उन्होंने हमारी बातों को अनसुना कर दिया.इसके बाद हमें विरोध का रास्ता अपनाना पड़ा.
शिक्षक की कमी पर भी उठे सवाल
छात्रों ने यह भी आरोप लगाया है कि विश्वविद्यालय में शिक्षकों की भारी कमी है.नए भवन बनने के बावजूद वहां पढ़ाने के लिए पर्याप्त शिक्षक उपलब्ध नहीं हैं.इससे पढ़ाई का स्तर लगातार गिर रहा है.
छात्रों का कहना है कि सरकार केवल इंफ्रास्ट्रक्चर पर ध्यान दे रही है, लेकिन शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने के लिए जरूरी मानव संसाधन की अनदेखी कर रही है.
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प्रशासन की चुप्पी और छात्रों का आक्रोश
इस पूरे घटनाक्रम के दौरान विश्वविद्यालय प्रशासन और शिक्षा मंत्री की ओर से कोई स्पष्ट प्रतिक्रिया सामने नहीं आई.यही कारण है कि छात्रों में नाराजगी और बढ़ गई.
छात्रों ने चेतावनी दिया है कि यदि उनकी मांगों को जल्द पूरा नहीं किया गया, तो आने वाले दिनों में आंदोलन और तेज किया जाएगा.
क्या कहता है यह विरोध?
पटना विश्वविद्यालय में हुआ यह विरोध सिर्फ एक घटना नहीं, बल्कि राज्य के उच्च शिक्षा तंत्र की गहरी समस्याओं को उजागर करता है. यह साफ संकेत देता है कि छात्रों की समस्याएं केवल कागजों में नहीं, बल्कि जमीन पर हल किए जाने की जरूरत है.
निष्कर्ष
पटना विश्वविद्यालय में शिक्षा मंत्री का घेराव छात्रों के बढ़ते असंतोष का प्रतीक है.जहां एक ओर सरकार विकास के दावे कर रही है, वहीं दूसरी ओर छात्र बुनियादी सुविधाओं और बेहतर शिक्षा की मांग कर रहे हैं.
अगर समय रहते इन समस्याओं का समाधान नहीं किया गया, तो यह आंदोलन और व्यापक रूप ले सकता है, जिसका असर पूरे राज्य की शिक्षा व्यवस्था पर पड़ सकता है.

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