बराबरी व सुरक्षित कैंपस के वादे के साथ AISA मैदान में
तीसरा पक्ष ब्यूरो पटना,21 फरवरी पटना विश्वविद्यालय छात्रसंघ चुनाव को लेकर छात्र राजनीति का माहौल गर्म है. इसी क्रम में ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA) ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर अपने चुनावी एजेंडे और प्राथमिकताओं को विस्तार से रखा.संगठन ने साफ किया कि उनका मुख्य लक्ष्य ऐसा कैंपस बनाना है जो जातीय और लैंगिक भेदभाव से मुक्त हो, सभी वर्गों के लिए समान अवसर सुनिश्चित करे और शिक्षा को सबके लिए सुलभ बनाए.
इस प्रेस वार्ता में अध्यक्ष पद की प्रत्याशी सबा अफरीन, उपाध्यक्ष पद के प्रत्याशी विवेक कुमार और महासचिव पद की प्रत्याशी अदिति सिंह ने चुनावी मुद्दों पर अपनी बात रखी. साथ ही, AISA के राष्ट्रीय नेता और पूर्व जेएनयूएसयू अध्यक्ष धनंजय ने भी प्रेस को संबोधित करते हुए छात्र हितों से जुड़े सवालों को प्रमुखता से उठाया है .
सबके लिए बराबरी वाला कैंपस: AISA का मुख्य एजेंडा
AISA ने प्रेस वार्ता में स्पष्ट किया कि उनका चुनावी एजेंडा केवल पद जीतना नहीं, बल्कि कैंपस की संरचना और माहौल में बुनियादी बदलाव लाना है. संगठन का कहना है कि विश्वविद्यालय परिसर में जातीय और लैंगिक भेदभाव जैसी समस्याएं अब भी मौजूद हैं, जिन्हें खत्म करना समय की सबसे बड़ी जरूरत है.
AISA का दावा है कि यदि उन्हें छात्रसंघ में नेतृत्व का अवसर मिलता है तो कैंपस में एक सशक्त जेंडर सेल का गठन किया जाएगा, जो महिला सुरक्षा, लैंगिक समानता और शिकायतों के त्वरित समाधान पर काम करेगा.इसके अलावा, फीस वृद्धि पर रोक, वंचित वर्गों एवं महिलाओं के लिए पर्याप्त छात्रावास, और सुरक्षित व समावेशी शैक्षणिक वातावरण उनके प्रमुख वादों में शामिल हैं.
पटना विश्वविद्यालय को केंद्रीय विश्वविद्यालय का दर्जा देने की मांग
अध्यक्ष पद की प्रत्याशी सबा अफरीन ने प्रेस वार्ता में कहा कि AISA लंबे समय से पटना विश्वविद्यालय को केंद्रीय विश्वविद्यालय का दर्जा दिलाने की मांग को लेकर संघर्षरत रहा है.उनका कहना है कि केंद्रीय विश्वविद्यालय का दर्जा मिलने से विश्वविद्यालय को अधिक वित्तीय संसाधन, बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर और उच्च गुणवत्ता वाली शिक्षा का लाभ मिलेगा, जिससे छात्रों को राष्ट्रीय स्तर की सुविधाएं मिल सकेंगी.
सबा अफरीन ने कहा कि AISA सामाजिक न्याय और लैंगिक न्याय के सवालों पर लगातार कैंपस में संघर्ष करता रहा है.उन्होंने यह भी कहा कि उनकी जीत से जेंडर सेल सक्रिय होगा और कैंपस का माहौल ज्यादा सुरक्षित और समावेशी बनेगा.
शिक्षा और रोजगार के सवालों पर संघर्ष
महासचिव पद की प्रत्याशी अदिति सिंह ने प्रेस वार्ता में कहा कि विश्वविद्यालय में खेल सुविधाओं की कमी, नई शिक्षा नीति के कारण बढ़ी फीस और शिक्षा-रोजगार का संकट छात्रों के सामने बड़ी चुनौती है. उन्होंने कहा कि AISA इन सभी मुद्दों को छात्रसंघ चुनाव का मुख्य मुद्दा बना रहा है.
उनका कहना है कि जब तक शिक्षा सस्ती और सुलभ नहीं होगी, तब तक गरीब और वंचित तबके के छात्र उच्च शिक्षा से दूर होते रहेंगे.AISA का लक्ष्य है कि विश्वविद्यालय में फीस वृद्धि पर रोक लगे और छात्रों को गुणवत्तापूर्ण संसाधन उपलब्ध हों.
बेहतर अकादमिक सुविधाओं का वादा
उपाध्यक्ष पद के प्रत्याशी विवेक कुमार ने कहा कि AISA की जीत से कैंपस की बुनियादी सुविधाओं में सुधार होगा.उन्होंने प्रमुख मांगों में सेंट्रल लाइब्रेरी को 24×7 खोलने, सभी कॉलेजों में कैंटीन की व्यवस्था, शिक्षकों और कर्मचारियों के खाली पदों को भरने और नई किताबों की उपलब्धता सुनिश्चित करने की बात रखी.
उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय तभी बेहतर बन सकता है जब छात्रों को पढ़ाई के लिए जरूरी संसाधन और अनुकूल माहौल मिले. AISA का मानना है कि शिक्षा केवल कक्षा तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि लाइब्रेरी, स्पोर्ट्स और अन्य गतिविधियों में भी समान अवसर मिलना चाहिए.
छात्र हितों पर चुप्पी बनाम संघर्ष की राजनीति
पूर्व जेएनयूएसयू अध्यक्ष धनंजय ने प्रेस वार्ता में कहा कि पटना विश्वविद्यालय छात्रसंघ के पिछले प्रतिनिधियों ने छात्रों के बुनियादी सवालों पर अपेक्षित संघर्ष नहीं किया. उन्होंने आरोप लगाया कि फीस वृद्धि, यौन हिंसा, आरक्षण पर हमले और शिक्षा-रोजगार जैसे मुद्दों पर लगातार आवाज उठाने का काम AISA ने किया है.
धनंजय ने कहा कि बिहार में फीस वृद्धि के खिलाफ आंदोलन से लेकर छात्राओं की सुरक्षा के मुद्दे तक, AISA हमेशा अग्रिम पंक्ति में रहा है.उन्होंने यह भी कहा कि पटना विश्वविद्यालय को एक ऐसे छात्रसंघ की जरूरत है जो छात्रों के अधिकारों के लिए उसी तरह संघर्ष करे, जैसा जेएनयू में छात्र संगठन करते रहे हैं.
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सामाजिक न्याय और सुरक्षित कैंपस की राजनीति
AISA ने अपने एजेंडे में सामाजिक न्याय को केंद्रीय स्थान दिया है. संगठन का कहना है कि कैंपस में वंचित तबकों, महिलाओं और अल्पसंख्यक छात्रों के लिए सुरक्षित और समान अवसर वाला माहौल बनाना उनकी प्राथमिकता है.
संगठन ने यह भी स्पष्ट किया कि छात्रसंघ चुनाव केवल विश्वविद्यालय तक सीमित नहीं, बल्कि व्यापक स्तर पर शिक्षा और रोजगार की नीतियों से भी जुड़ा हुआ है. AISA का दावा है कि उनकी राजनीति छात्रों के वास्तविक मुद्दों पर आधारित है, न कि केवल प्रतीकात्मक वादों पर.
चुनाव में विचारों की लड़ाई
पटना विश्वविद्यालय छात्रसंघ चुनाव को लेकर यह स्पष्ट है कि इस बार मुकाबला केवल पदों का नहीं, बल्कि विचारों का है. AISA बराबरी, सामाजिक न्याय, सस्ती शिक्षा और सुरक्षित कैंपस जैसे मुद्दों को केंद्र में रखकर चुनाव मैदान में है.
अब देखना यह होगा कि छात्रों के बीच ये मुद्दे कितनी मजबूती से असर डालते हैं और क्या AISA अपने एजेंडे को वोट में बदल पाता है.लेकिन इतना तय है कि इस चुनाव में शिक्षा, समानता और छात्र अधिकारों के सवाल प्रमुख चर्चा का विषय बन चुके हैं.

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