फुलवारी छात्रा मौत मामला: न्यायिक जांच और गिरफ्तारी की मांग तेज

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Ajit Kumar

बिहार
एम्स गोलंबर पर फुलवारी छात्रा मौत मामले में प्रदर्शन करते लोग

दरिंदगी के बाद हत्या का आरोप, गिरफ्तारी की मांग

तीसरा पक्ष ब्यूरो पटना, 13 फरवरी 2026:फुलवारी इलाके में कोचिंग छात्रा की संदिग्ध मौत ने पूरे बिहार में कानून-व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़ा कर दिए हैं. इस मामले को लेकर राजनीतिक और सामाजिक संगठनों ने न्यायिक जांच और दोषियों की अविलंब गिरफ्तारी की मांग तेज कर दिया है. घटना को लेकर इलाके में भारी आक्रोश देखा गया, वहीं पीड़ित परिवार न्याय की गुहार लगा रहा है.

घटना को लेकर हत्या की आशंका

घटना को लेकर हत्या की आशंका

भाकपा (माले) के केंद्रीय कमेटी सदस्य और फुलवारी के पूर्व विधायक गोपाल रविदास ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर कहा कि छात्रा की मौत महज हादसा नहीं, बल्कि दरिंदगी के बाद सुनियोजित हत्या का मामला प्रतीत होता है. ग्रामीणों और परिजनों के अनुसार, छात्रा के साथ पहले दुष्कर्म किया गया और फिर साक्ष्य मिटाने के उद्देश्य से शव को चौथी मंजिल से नीचे फेंक दिया गया.

उन्होंने आरोप लगाया कि घटना के बाद से अब तक कोई वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी पीड़ित परिवार से मिलने नहीं पहुंचा, जिससे लोगों में भारी नाराजगी है. परिजनों का कहना है कि उन्हें न्याय की बजाय उपेक्षा का सामना करना पड़ रहा है.

कानून व्यवस्था पर उठे गंभीर सवाल

पूर्व विधायक ने कहा कि बिहार में कानून-व्यवस्था पूरी तरह चरमरा चुका है. गरीब, मजदूर और किसान परिवारों की बेटियां सुरक्षित नहीं हैं. सरकार जहां कानून का राज, का दावा करता है, वहीं दूसरी ओर अपराधियों के हौसले लगातार बुलंद होते जा रहा हैं.
उन्होंने स्पष्ट कहा कि यदि इस मामले में निष्पक्ष कार्रवाई नहीं हुई तो यह राज्य की न्याय व्यवस्था पर गहरा धब्बा होगा. ऐसे मामलों में त्वरित और कड़ी कार्रवाई ही समाज में भरोसा बहाल कर सकता है.

न्यायिक जांच और मुआवजे की मांग

नेताओं ने मांग रखा है कि इस मामले की उच्चस्तरीय न्यायिक जांच कराई जाए ताकि सच्चाई सामने आ सके.साथ ही दोषियों की तत्काल गिरफ्तारी, पीड़ित परिवार को समुचित मुआवजा और सुरक्षा प्रदान करने की भी मांग की गई है.

उन्होंने कहा कि इस तरह की घटनाएं केवल कानून-व्यवस्था की विफलता ही नहीं, बल्कि समाज में महिलाओं की सुरक्षा को लेकर गंभीर संकट का संकेत देती हैं.

एम्स गोलंबर पर उग्र प्रदर्शन

घटना के विरोध में एम्स गोलंबर पर व्यापक प्रदर्शन हुआ. स्थानीय लोग, छात्र-युवा, महिला कार्यकर्ता और ग्रामीण बड़ी संख्या में सड़कों पर उतर आए. करीब साढ़े तीन घंटे तक चले सड़क जाम के कारण आवागमन पूरी तरह बाधित रहा और दोनों ओर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं.
प्रदर्शनकारियों ने ,मुख्यमंत्री जवाब दो, कानून का राज कहाँ है, दोषियों को तुरंत गिरफ्तार करो और एसआईटी नहीं, न्यायिक जांच बैठाओ, जैसे नारों से पूरे इलाके को गूंजा दिया. प्रदर्शन ने स्पष्ट संकेत दिया कि जनता इस मामले में किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त करने को तैयार नहीं है.

संयुक्त नेतृत्व में हुआ आंदोलन

प्रदर्शन का नेतृत्व भाकपा (माले) के नेताओं के साथ कई सामाजिक-राजनीतिक कार्यकर्ताओं ने संयुक्त रूप से किया. इसमें प्रखंड सचिव गुरुदेव दास, साधु शरण प्रसाद, राजद नेता शुभम यादव, जिला परिषद सदस्य दीपक मांझी, भोला चौधरी और देवीलाल पासवान प्रमुख रूप से शामिल रहे.

प्रदर्शन से पहले नेताओं का एक प्रतिनिधिमंडल ग्राम चक मूसा में पीड़ित परिवार के घर पहुंचा और शोक-संवेदना व्यक्त की। उन्होंने परिवार को आश्वासन दिया कि न्याय की लड़ाई में हरसंभव सहयोग दिया जाएगा और दोषियों को सजा दिलाने तक आंदोलन जारी रहेगा।

स्थानीय प्रशासन को दी चेतावनी

प्रखंड सचिव गुरुदेव दास और अन्य वक्ताओं ने स्थानीय प्रशासन को कड़ी चेतावनी दी कि यदि जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो पूरे फुलवारी क्षेत्र को ठप कर दिया जाएगा और इससे भी बड़ा जनांदोलन खड़ा किया जाएगा.उन्होंने कहा कि यह केवल एक छात्रा की मौत का मामला नहीं, बल्कि महिलाओं की सुरक्षा और न्याय की लड़ाई है.

नेताओं ने कहा कि जब तक दोषियों की गिरफ्तारी और न्यायिक जांच की आधिकारिक घोषणा नहीं होती, तब तक संघर्ष जारी रहेगा. उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि प्रशासनिक स्तर पर देरी से अपराधियों को बचाने की कोशिश की जा रही है, जिसे जनता किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं करेगी.

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फुलवारी क्षेत्र में बढ़ता जनाक्रोश

घटना के बाद पूरे फुलवारी शरीफ क्षेत्र में जनाक्रोश लगातार बढ़ता जा रहा है.छात्र संगठनों, महिला समूहों और स्थानीय नागरिकों ने इसे महिलाओं की सुरक्षा से जुड़ा गंभीर मामला बताया है. लोगों का कहना है कि अगर समय रहते सख्त कार्रवाई नहीं हुई, तो ऐसे अपराधियों का मनोबल और बढ़ेगा.
स्थानीय सामाजिक कार्यकर्ताओं का मानना है कि इस तरह की घटनाएं समाज में भय और असुरक्षा का माहौल पैदा करता हैं. इसलिए इस केस को उदाहरण बनाकर कठोर कार्रवाई जरूरी है, ताकि भविष्य में कोई भी अपराधी कानून से बचने की हिम्मत न कर सके.

निष्कर्ष: न्याय के लिए जारी रहेगा संघर्ष

फुलवारी छात्रा मौत मामला अब केवल एक आपराधिक घटना नहीं रह गया है, बल्कि यह न्याय, सुरक्षा और प्रशासनिक जवाबदेही की बड़ी परीक्षा बन गया है.राजनीतिक दलों, सामाजिक संगठनों और आम जनता की एकजुटता ने यह स्पष्ट कर दिया है कि इस मामले में ढिलाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी.
जब तक दोषियों की गिरफ्तारी, निष्पक्ष न्यायिक जांच और पीड़ित परिवार को न्याय नहीं मिलता, तब तक आंदोलन जारी रहने की चेतावनी दी गई है.यह घटना राज्य में महिला सुरक्षा और कानून-व्यवस्था की स्थिति पर गंभीर चिंतन की मांग करती है.

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