राहुल गांधी बोले — महागठबंधन जीत रहा है, पर BJP पहले भी चुनाव में चोरी कर चुकी है!
तीसरा पक्ष ब्यूरो पटना,2 नवंबर 2025—लोकतंत्र की सबसे बड़ी ताक़त जनता का वोट होता है.इसी वोट के दम पर सत्ता बनती और गिरती है, नीतियाँ तय होती हैं और जनता की आवाज़ संसद तक पहुँचती है. लेकिन अगर वोट ही सुरक्षित न रहे — अगर मतदाता सूची से नाम गायब कर दिए जाएँ या वोट डालने की प्रक्रिया में हेराफेरी हो — तो लोकतंत्र का मूलाधार ही खतरे में पड़ जाता है.
इसी मुद्दे को लेकर कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने बिहार में एक तीखा बयान दिया है.उन्होंने कहा है कि महागठबंधन बिहार में जीत रहा है, मगर बीजेपी चुनावों में भयंकर चोरी कर चुकी है — महाराष्ट्र, हरियाणा और कर्नाटक में.राहुल गांधी ने लोगों से अपील किया कि वे अपने बूथों पर चौकन्ने रहें और अपना वोट बचाएँ.
राहुल गांधी की चेतावनी: वोटर लिस्ट से नाम मिटाए जा रहे हैं
राहुल गांधी का यह बयान केवल राजनीतिक आरोप नहीं है, बल्कि लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए एक गंभीर चेतावनी भी है.उन्होंने कहा कि इस बार भी चुनावी हेराफेरी की कोशिशें हो रही हैं — मतदाता सूची से नाम हटाए जा रहे हैं, बूथ स्तर पर गड़बड़ियाँ की जा रही हैं, और प्रशासनिक पक्षपात की आशंका जताई जा रही है.
राहुल गांधी का यह बयान ऐसे समय में आया है जब बिहार में चुनावी माहौल तेज़ है और महागठबंधन बनाम एनडीए की सीधी टक्कर देखी जा रही है.
वोट का महत्व और लोकतंत्र की नींव
भारत जैसे विशाल लोकतंत्र में हर नागरिक का वोट सिर्फ एक राजनीतिक अधिकार नहीं बल्कि एक नैतिक ज़िम्मेदारी है.
राहुल गांधी ने बिल्कुल सही कहा — लोकतंत्र में वोट ही आपका सबसे बड़ा हथियार है — इससे ही आपके बाकी सारे अधिकार हैं.
यह बात समझनी ज़रूरी है कि जब जनता वोट नहीं डालती या अपने वोट को बचाने के प्रति उदासीन रहती है, तो वही शक्तियाँ मज़बूत होती हैं जो लोकतंत्र को कमजोर करती हैं.
चुनावी ईमानदारी पर सवाल क्यों उठ रहे हैं?
पिछले कुछ वर्षों में कई राज्यों में चुनावी प्रक्रियाओं को लेकर विवाद उठा हैं.
महाराष्ट्र में सरकार बनाने की प्रक्रिया को लेकर सवाल खड़ा हुआ था .
कर्नाटक और हरियाणा में भी गठबंधन और सत्ता हस्तांतरण पर विवाद हुआ था.
बिहार में भी अब राहुल गांधी ने यह आरोप लगाया है कि मतदाता सूची से नाम गायब करने जैसी घटनाएँ बढ़ी हैं.
चुनाव आयोग का दायित्व है कि वह इन आरोपों की निष्पक्ष जाँच करे और जनता के विश्वास को कायम रखे. लेकिन विपक्षी दलों का मानना है कि आयोग की कार्यप्रणाली में पारदर्शिता की कमी है.
बूथ स्तर पर जनता की भूमिका
राहुल गांधी ने अपने संदेश में विशेष रूप से कहा कि अपने बूथों पर चौकन्ने रहें.
इसका मतलब साफ़ है — लोकतंत्र की रक्षा सिर्फ राजनीतिक दलों की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि हर मतदाता की भी है.
मतदाता को चाहिए कि वे
अपने नाम की जाँच मतदाता सूची में करें
चुनाव के दिन वोट डालने अवश्य जाएँ
किसी भी गड़बड़ी की सूचना तुरंत निर्वाचन अधिकारियों या पर्यवेक्षकों को दें.
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चुनावी पारदर्शिता की ज़रूरत
आज के डिजिटल युग में चुनाव प्रक्रिया को पारदर्शी बनाना पहले से कहीं अधिक आसान है.
ईवीएम मशीनों की सुरक्षा, मतदाता सूची की ऑनलाइन जाँच, और मतदान केंद्रों पर निगरानी व्यवस्था — इन सभी को मज़बूत करने की आवश्यकता है.
राहुल गांधी की यह अपील दरअसल एक व्यापक जनजागरण का हिस्सा है, जो यह याद दिलाती है कि लोकतंत्र जनता की जागरूकता से ही चलता है, न कि सत्ता के दावों से.
राजनीतिक संदेश या लोकतांत्रिक चेतावनी?
हालांकि राहुल गांधी का यह बयान चुनावी मंच से आया है, लेकिन इसका अर्थ महज राजनीति तक सीमित नहीं है.
यह एक व्यापक लोकतांत्रिक चेतावनी है — कि अगर जनता खुद अपनी वोट की रक्षा नहीं करेगी, तो कोई और नहीं करेगा.
बिहार में महागठबंधन और एनडीए के बीच टक्कर चाहे कितनी भी तीव्र क्यों न हो, असली लड़ाई वोट की ईमानदारी की है.
निष्कर्ष: वोट बचाइए, लोकतंत्र बचाइए
राहुल गांधी के इस बयान का सार यही है कि,
वोट सिर्फ अधिकार नहीं, बल्कि भविष्य की कुंजी है.
अगर मतदाता सतर्क रहेगा, तो लोकतंत्र मज़बूत रहेगा.
अगर वोट सुरक्षित रहेगा, तो जनता की आवाज़ भी बुलंद रहेगी.
आज जब चुनावी राजनीति में आरोप-प्रत्यारोप आम बात बन गई है, ऐसे में यह याद रखना बेहद ज़रूरी है कि लोकतंत्र का असली प्रहरी जनता ही है — और जनता का सबसे बड़ा हथियार उसका वोट.

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