आरपीएम कॉलेज विवाद: छात्राओं के हक़ में आइसा का अनशन

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Ajit Kumar

बिहार
आरपीएम कॉलेज नामांकन विवाद में आइसा का अनिश्चितकालीन अनशन, पटना

पांचवें सेमेस्टर में नामांकन से वंचित छात्राओं को न्याय दिलाने की मांग

तीसरा पक्ष ब्यूरो पटना, 20 जनवरी 2026 —:पाटलिपुत्र विश्वविद्यालय के अंतर्गत आने वाले आरपीएम कॉलेज में कथित प्रशासनिक अनियमितताओं, अवैध शुल्क वसूली और छात्राओं के मानसिक उत्पीड़न के आरोपों को लेकर ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (आइसा) का अनिश्चितकालीन अनशन मंगलवार को भी जारी रहा.यह अनशन पाटलिपुत्र विश्वविद्यालय के मुख्य द्वार पर आयोजित किया जा रहा है, जहां बड़ी संख्या में छात्राएं और छात्र संगठन के कार्यकर्ता उपस्थित रहे.

आरपीएम कॉलेज नामांकन विवाद में आइसा का अनिश्चितकालीन अनशन, पटना

आइसा का आरोप है कि आरपीएम कॉलेज में पांचवें सेमेस्टर में नामांकन की प्रक्रिया में गंभीर अनियमितताएं की गई हैं, जिसके कारण दर्जनों छात्राएं दाखिले से वंचित रह गई हैं. संगठन का कहना है कि यह मामला केवल नामांकन तक सीमित नहीं है, बल्कि कॉलेज प्रशासन की कथित दोहरी नीति और गैर-पारदर्शी व्यवस्था को भी उजागर करता है.

प्रतिनिधिमंडल ने डिप्टी प्रॉक्टर से की मुलाकात

आइसा के पांच सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल — प्रीति कुमारी, आशना कुमारी, काजल कुमारी, ऋषि कुमार और आयुषी, ने विश्वविद्यालय स्तरीय डिप्टी प्रॉक्टर प्रो. हंस कुमार से मुलाकात कर छात्रहित से जुड़े मुद्दों को उनके समक्ष रखा. प्रतिनिधिमंडल ने नामांकन में भेदभाव, अवैध शुल्क वसूली और छात्राओं पर मानसिक दबाव जैसे विषयों पर विस्तृत चर्चा की.

डिप्टी प्रॉक्टर की ओर से प्रतिनिधिमंडल को यह जानकारी दी गई कि विश्वविद्यालय की सिनेट बैठक के कारण तत्काल कुलपति से मुलाकात संभव नहीं हो सकी है.हालांकि, उन्होंने आश्वासन दिया कि 21 जनवरी को कुलपति के समक्ष छात्राओं की समस्याओं को दोबारा रखा जाएगा और इस पर निश्चित रूप से कार्रवाई की दिशा में पहल की जाएगी.

छात्राओं का अनिश्चितकालीन अनशन

छात्राओं का अनिश्चितकालीन अनशन

आरपीएम कॉलेज की छात्रा आशना कुमारी और काजल कुमारी, जो पांचवें सेमेस्टर में नामांकन से वंचित बताई जा रही हैं, अनिश्चितकालीन अनशन पर बैठी हुई हैं. उनका कहना है कि बार-बार कॉलेज प्रशासन से संपर्क करने के बावजूद उनकी समस्याओं का समाधान नहीं किया गया, जिसके बाद उन्हें यह कदम उठाने के लिए मजबूर होना पड़ा.

सभा का संचालन बी.एस. कॉलेज की आइसा नेत्री प्रिया ने किया, जबकि अध्यक्षता ऋषि कुमार और आयुषी ने संयुक्त रूप से की। सभा में बड़ी संख्या में छात्राओं ने अपनी बात रखी और कॉलेज प्रशासन के खिलाफ नाराज़गी जाहिर किया है.

आइसा का आरोप: भेदभावपूर्ण और दोहरी नीति

आइसा की प्रदेश अध्यक्ष प्रीति कुमारी ने सभा को संबोधित करते हुए आरोप लगाया कि आरपीएम कॉलेज में निःशुल्क नामांकन की मांग को लेकर हुए पूर्व छात्र आंदोलन के दौरान साइंस फैकल्टी की कुछ छात्राओं से शुल्क नहीं लिया गया, जबकि अन्य छात्राओं से नामांकन शुल्क वसूला गया.उनके अनुसार, यह स्थिति स्पष्ट रूप से भेदभावपूर्ण और दोहरी नीति को दर्शाती है.

उन्होंने यह भी कहा कि बिना किसी वैध अधिसूचना के बोनाफाइड सर्टिफिकेट, लाइब्रेरी शुल्क, आईडी कार्ड, नो-ड्यूज सहित कई अन्य मदों में सभी सेमेस्टर की छात्राओं से अनिर्धारित शुल्क वसूले जा रहे हैं.शुल्क न देने की स्थिति में छात्राओं को मानसिक रूप से प्रताड़ित किया जाता है और कथित रूप से धमकाया भी जाता है.

यूजीसी नियमों के उल्लंघन का आरोप

आइसा का दावा है कि इस तरह की शुल्क वसूली और प्रशासनिक व्यवहार विश्वविद्यालय अधिनियम और यूजीसी के नियमों का गंभीर उल्लंघन है.संगठन का कहना है कि एक शैक्षणिक संस्थान में इस प्रकार की गतिविधियां न केवल छात्राओं के भविष्य को प्रभावित करती हैं, बल्कि संस्थान की गरिमा पर भी प्रश्नचिह्न लगाती हैं.

प्रदर्शनकारी छात्राओं ने आरोप लगाया कि प्राचार्य डॉ. पूनम द्वारा पद का दुरुपयोग करते हुए विश्वविद्यालय और राज्य सरकार के स्पष्ट निर्देशों के विपरीत नामांकन और अन्य शुल्क वसूले जा रहे हैं, जिससे कैंपस में असंतोष और अराजकता का माहौल बन रहा है.

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अनशन जारी रखने का ऐलान

आइसा ने स्पष्ट किया है कि जब तक प्राचार्य डॉ. पूनम के खिलाफ उच्च स्तरीय जांच नहीं होती और नामांकन से वंचित छात्राओं का दाखिला सुनिश्चित नहीं किया जाता, तब तक संगठन का अनिश्चितकालीन अनशन जारी रहेगा। संगठन ने इसे छात्राओं के अधिकारों और शैक्षणिक न्याय का सवाल बताया है.

आइसा की प्रमुख मांगें

आइसा की ओर से रखी गई प्रमुख मांगों में शामिल हैं.

पांचवें सेमेस्टर में नामांकन से वंचित सभी छात्राओं का तत्काल दाखिला सुनिश्चित किया जाए.

सभी सेमेस्टर और सभी वर्गों की छात्राओं का निःशुल्क नामांकन लागू किया जाए.

प्राचार्य डॉ. पूनम को तत्काल पद से बर्खास्त किया जाए.

उनके पूरे कार्यकाल की उच्च स्तरीय न्यायिक जांच कराई जाए.

अवैध रूप से वसूले गए सभी शुल्क छात्राओं को वापस किए जाएं और दोषियों पर सख्त कानूनी कार्रवाई हो.

प्रदर्शन में शामिल रहीं छात्राएं

इस अनशन और प्रदर्शन में आरपीएम कॉलेज की छात्राएं खुशबू, अदिति, रुखसार, काजल, स्वीटी, नैंसी, अपराजिता, प्रतिभा, तनिषा, सुप्रिया, आयुषी, मुस्कान, सीमा, सोनम सहित अन्य छात्राएं शामिल रहीं।

फिलहाल विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से इस मामले में अंतिम निर्णय का इंतजार है. छात्र संगठन का कहना है कि यदि समय रहते ठोस कार्रवाई नहीं हुई, तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा.

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