FIR और जेल से नहीं डरे AAP सांसद संजय सिंह, मोदी-योगी सरकार पर हमला
तीसरा पक्ष ब्यूरो नई दिल्ली, 22 जनवरी 2026 — भारतीय राजनीति में जब भी सत्ता और विपक्ष के बीच टकराव तेज होता है, तब लोकतंत्र, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और जनता की आवाज़ जैसे मुद्दे केंद्र में आ जाता हैं.आम आदमी पार्टी (AAP) के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने मोदी–योगी सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए एक कड़ा बयान दिया है. उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि चाहे सरकार रोज़ FIR दर्ज कराए या जेल में डाले, सच बोलने से वे पीछे नहीं हटेंगे.
संजय सिंह का यह बयान न सिर्फ राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा रहा है, बल्कि उन सवालों को भी दोहराता है जो लंबे समय से देश की जनता पूछ रही है—क्या सरकार असहमति की आवाज़ को दबाने की कोशिश कर रही है?
संजय सिंह का X पोस्ट और उसका संदेश
X (पूर्व ट्विटर) पर साझा किए गए अपने पोस्ट में संजय सिंह ने कहा कि,संसद से सड़क तक जनता की आवाज़ बुलंद रहेगी.यह बयान सीधे तौर पर लोकतांत्रिक संघर्ष और जनआंदोलन की ओर इशारा करता है.
उन्होंने सरकार पर आरोप लगाया कि वह अडानी समूह को कौड़ियों के दाम ज़मीन और लाखों पेड़ देने जैसी नीतियों के ज़रिए बड़े उद्योगपतियों को फायदा पहुंचा रही है, जबकि आम जनता के हितों की अनदेखी हो रही है.संजय सिंह के अनुसार, सरकार की यह नीति पर्यावरण, किसानों और स्थानीय लोगों के भविष्य के साथ खिलवाड़ है.
FIR और जेल का डर नहीं
आम आदमी पार्टी के नेता संजय सिंह पहले भी कई बार सरकार की नीतियों के खिलाफ मुखर रहे हैं. उन्होंने अपने बयान में यह स्पष्ट कर दिया कि FIR, गिरफ्तारी या जेल उन्हें सच बोलने से नहीं रोक सकती है .
उनका कहना है कि लोकतंत्र में सवाल पूछना अपराध नहीं है, बल्कि यह जनता के प्रति जिम्मेदारी है. यदि सत्ता सवालों से डरती है और आलोचना को दबाने के लिए दमन का सहारा लेती है, तो यह लोकतंत्र के लिए खतरे की घंटी है.
संसद से सड़क तक संघर्ष का ऐलान
संजय सिंह का यह बयान केवल एक ट्वीट तक सीमित नहीं है, बल्कि यह आने वाले समय में आंदोलन और राजनीतिक संघर्ष की दिशा को भी दर्शाता है.
उन्होंने यह साफ किया कि आम आदमी पार्टी सिर्फ संसद के भीतर ही नहीं, बल्कि सड़क पर उतरकर भी जनता के मुद्दे उठाएगी. चाहे वह महंगाई हो, बेरोजगारी, पर्यावरण की तबाही या फिर कॉरपोरेट घरानों को दी जा रही कथित रियायतें, AAP इन सभी मुद्दों को जनता के सामने रखेगी.
अडानी और सरकार पर आरोप
संजय सिंह ने अपने बयान में अडानी समूह का नाम लेते हुए सरकार पर गंभीर आरोप लगाए.उनका कहना है कि सरकार बड़े उद्योगपतियों को फायदा पहुंचाने के लिए नियमों को ताक पर रख रही है.
लाखों पेड़ों की कटाई और सस्ती दरों पर ज़मीन देने जैसे फैसले न सिर्फ पर्यावरण को नुकसान पहुंचाते हैं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के भविष्य पर भी सवाल खड़े करते हैं. AAP का आरोप है कि इन फैसलों में पारदर्शिता की कमी है और आम जनता की सहमति को नजरअंदाज किया गया है.
लोकतंत्र और अभिव्यक्ति की आज़ादी का सवाल
इस पूरे विवाद के केंद्र में एक बड़ा सवाल खड़ा होता है,क्या भारत में असहमति की आवाज़ सुरक्षित है?
संजय सिंह का कहना है कि सच को दबाया नहीं जा सकता। इतिहास गवाह है कि जब-जब सत्ता ने आवाज़ दबाने की कोशिश की है, तब-तब जनता की आवाज़ और तेज होकर उभरी है. AAP नेताओं के अनुसार, लोकतंत्र की मजबूती इसी में है कि सरकार आलोचना को सुने, न कि उसे कुचलने की कोशिश करे.
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आम आदमी पार्टी की रणनीति
आम आदमी पार्टी ने साफ संकेत दिया है कि वह सरकार के खिलाफ अपने संघर्ष को और तेज करेगी. पार्टी का फोकस जनता से जुड़े मुद्दों पर रहेगा,चाहे वह संसाधनों की लूट हो, पर्यावरण का नुकसान या फिर राजनीतिक बदले की कार्रवाई.
संजय सिंह के बयान से यह भी स्पष्ट है कि पार्टी पीछे हटने के मूड में नहीं है. आने वाले समय में संसद, मीडिया और सड़कों पर AAP की सक्रियता बढ़ सकती है.
निष्कर्ष
संजय सिंह का यह बयान सिर्फ एक राजनीतिक प्रतिक्रिया नहीं, बल्कि लोकतंत्र और जनता की आवाज़ की लड़ाई का प्रतीक है.FIR और जेल की धमकियों के बावजूद सच बोलने का उनका दावा यह दिखाता है कि विपक्ष सरकार के सामने झुकने को तैयार नहीं है.
अब देखना यह होगा कि सरकार इन आरोपों का क्या जवाब देती है और आने वाले दिनों में यह संघर्ष किस दिशा में जाता है.लेकिन इतना तय है कि सच और सवालों की यह लड़ाई फिलहाल थमने वाली नहीं है.

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