Sanjay Singh का आरोप: ट्रेड डील से किसान और देश दोनों पर खतरा

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Ajit Kumar

भारत
Sanjay Singh का ट्रेड डील पर बयान और मेरठ प्रदर्शन

संजय सिंह का आरोप: ट्रेड डील से किसान खतरे में

तीसरा पक्ष ब्यूरो मेरठ,14 फरवरी — राजनीतिक माहौल में एक बार फिर ट्रेड डील को लेकर बहस तेज हो गया है.आम आदमी पार्टी (AAP) के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद Sanjay Singh ने केंद्र सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुये कहा है, कि प्रधानमंत्री Narendra Modi ने देश का सम्मान और किसानों का भविष्य गिरवी रख दिया है.उनका दावा है कि यह कथित ट्रेड डील देशहित के बजाय कुछ चुनिंदा कॉरपोरेट घरानों को लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से लाया गया है, जिसमें विशेष रूप से Adani Group का नाम उन्होंने प्रमुखता से लिया है.

X पोस्ट के बाद सियासी हलचल तेज

संजय सिंह ने अपने आधिकारिक X (पूर्व ट्विटर) पोस्ट में लिखा है कि यह डील देशविरोधी है और इसे किसानों के हितों के खिलाफ बताया है.उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि इस समझौते का उद्देश्य विवादों से बचना और कुछ बड़े उद्योगपतियों को संरक्षण देना है.उनके इस बयान के बाद राजनीतिक हलकों में तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आईं और सोशल मीडिया पर भी इस मुद्दे ने जोर पकड़ा.

AAP नेता के मुताबिक, यदि सरकार इस तरह के समझौते करता है तो इसका सीधा असर किसानों की आय, फसल के दाम और कृषि बाजार की स्वतंत्रता पर पड़ेगा. उन्होंने कहा कि किसानों की मेहनत से जुड़े फैसले बिना उनकी सहमति के लेना लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है.

मेरठ में AAP कार्यकर्ताओं का प्रदर्शन

इस मुद्दे को लेकर जमीनी स्तर पर भी विरोध देखने को मिला है. उत्तर प्रदेश के Meerut में Aam Aadmi Party के जिलाध्यक्ष अंकुश चौधरी के नेतृत्व में कार्यकर्ताओं ने जोरदार प्रदर्शन किया है. प्रदर्शनकारियों ने केंद्र सरकार के खिलाफ नारेबाजी की और आरोप लगाया कि ट्रेड डील के जरिए किसानों के अधिकारों को कमजोर किया जा रहा है.

प्रदर्शन में शामिल कार्यकर्ताओं का कहना था कि देश के अन्नदाता की कीमत पर किसी भी तरह का अंतरराष्ट्रीय समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा.उन्होंने मांग किया कि सरकार इस डील के सभी प्रावधान सार्वजनिक करे और संसद में विस्तृत चर्चा कराए.

किसानों के मुद्दे पर बढ़ती राजनीति

भारत की राजनीति में किसान हमेशा एक अहम मुद्दा रहा हैं. पिछले कुछ वर्षों में कृषि कानूनों को लेकर हुए बड़े आंदोलनों ने यह साबित किया कि किसानों से जुड़े निर्णयों पर राजनीतिक दलों की नजर लगातार बना रहता है.ऐसे में संजय सिंह का यह बयान उस व्यापक राजनीतिक विमर्श का हिस्सा बन गया है, जिसमें किसान, कॉरपोरेट और सरकार के रिश्तों पर सवाल उठाया जाता हैं.

विशेषज्ञों का मानना है कि ट्रेड डील जैसे अंतरराष्ट्रीय समझौते अक्सर कृषि बाजार, निर्यात-आयात और न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) जैसी नीतियों को प्रभावित करता हैं. इसलिए विपक्ष इस मुद्दे को किसानों की सुरक्षा और आर्थिक स्थिरता से जोड़कर देख रहा है.

सरकार पर लगाए गए आरोपों का राजनीतिक महत्व

संजय सिंह के आरोप केवल एक बयान भर नहीं हैं, बल्कि यह आने वाले चुनावी समीकरणों पर भी असर डाल सकता हैं.जब भी किसी सरकार पर कॉरपोरेट हितों को प्राथमिकता देने का आरोप लगता है, तो विपक्ष इसे जनता और खासकर किसानों के बीच एक बड़े मुद्दे के रूप में पेश करता है.

राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, इस तरह के बयान विपक्ष की रणनीति का हिस्सा होता हैं, जिससे वह किसानों और ग्रामीण वोट बैंक को अपने पक्ष में लामबंद कर सके.वहीं, सत्तापक्ष आमतौर पर ऐसे आरोपों को निराधार बताते हुए विकास और वैश्विक व्यापार के हितों की बात करता है.

ट्रेड डील पर पारदर्शिता की मांग

AAP ने इस मुद्दे पर पारदर्शिता की मांग उठाई है.पार्टी नेताओं का कहना है कि यदि यह समझौता देशहित में है तो सरकार को इसके सभी पहलुओं को सार्वजनिक करना चाहिये. इससे किसानों, व्यापारियों और आम जनता को स्पष्ट जानकारी मिल सकेगी कि इस डील से उन्हें क्या लाभ या नुकसान होने वाला है.

इसके अलावा, विपक्ष यह भी चाहता है कि संसद में इस पर खुली बहस हो, ताकि लोकतांत्रिक प्रक्रिया के तहत निर्णय लिया जा सके. उनका तर्क है कि बड़े आर्थिक समझौते केवल कार्यपालिका के स्तर पर नहीं, बल्कि विधायिका की सहमति से होने चाहिये.

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राजनीतिक बयानबाजी या गंभीर चिंता?

सवाल यह भी उठता है कि क्या यह केवल राजनीतिक बयानबाजी है या वास्तव में किसानों के भविष्य को लेकर गंभीर चिंता। यह तय करना आसान नहीं है, क्योंकि ट्रेड डील के वास्तविक प्रभाव अक्सर लंबे समय बाद सामने आता हैं. हालांकि, विपक्ष का कहना है कि पहले से ही कृषि क्षेत्र कई चुनौतियों से जूझ रहा है,जैसे लागत में बढ़ोतरी, बाजार की अनिश्चितता और जलवायु परिवर्तन,ऐसे में किसी भी नई डील से पहले व्यापक विमर्श जरूरी है.

निष्कर्ष: मुद्दा केवल डील नहीं, भरोसे का भी

संजय सिंह के बयान ने यह स्पष्ट कर दिया है कि ट्रेड डील का मुद्दा केवल आर्थिक नहीं, बल्कि राजनीतिक और सामाजिक भरोसे से भी जुड़ा है। किसानों का विश्वास, देश की आर्थिक नीति और सरकार की पारदर्शिता,तीनों इस बहस के केंद्र में हैं.

अब देखना होगा कि केंद्र सरकार इन आरोपों पर क्या जवाब देती है और क्या इस डील से जुड़े सभी तथ्य सार्वजनिक किए जाते हैं या नहीं. फिलहाल, मेरठ में हुए प्रदर्शन और सोशल मीडिया पर उठी बहस यह संकेत दे रही है कि आने वाले दिनों में यह मुद्दा राष्ट्रीय राजनीति में और अधिक प्रमुखता से उभर सकता है.

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