संत कबीर नगर महारैली: बहुजन आंदोलन की नई ऊँचाइयों का ऐतिहासिक उदाहरण

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Ajit Kumar

भारत
संत कबीर नगर महारैली: बहुजन आंदोलन की नई ऊँचाइयों का ऐतिहासिक उदाहरण

संवैधानिक अधिकार और भाईचारे के लिए उमड़ा जनसैलाब – चंद्रशेखर आज़ाद

तीसरा पक्ष ब्यूरो संत कबीर नगर, 8 फरवरी — उत्तर प्रदेश के संत कबीर नगर ज़िले में आयोजित संवैधानिक अधिकार बचाओ, भाईचारा बनाओ महारैली ने बहुजन आंदोलन को एक नई ऊर्जा और दिशा दिया है. इस ऐतिहासिक महारैली को लेकर भीम आर्मी प्रमुख और आज़ाद समाज पार्टी (कांशीराम) के राष्ट्रीय अध्यक्ष चंद्रशेखर आज़ाद ने अपने आधिकारिक X (Twitter) अकाउंट के माध्यम से जो संदेश साझा किया, वह न सिर्फ़ कार्यकर्ताओं का मनोबल बढ़ाने वाला है बल्कि सामाजिक न्याय और संविधान की रक्षा के संघर्ष को भी मज़बूती देता है.

यह महारैली इस बात का जीवंत प्रमाण बनकर उभरा है कि बहुजन आंदोलन अब केवल संघर्ष तक सीमित नहीं रहा, बल्कि हर रैली और जनसमूह के साथ नई ऊँचाइयों को छू रहा है.

संवैधानिक अधिकार बचाओ, भाईचारा बनाओ – समय की ज़रूरत

आज के दौर में जब संविधानिक मूल्यों, सामाजिक समानता और भाईचारे पर लगातार हमला हो रहा हैं, ऐसे समय में इस तरह की महारैलियाँ बेहद महत्वपूर्ण हो जाता हैं.
संत कबीर नगर की यह महारैली केवल एक राजनीतिक आयोजन नहीं था, बल्कि यह,

संविधान की रक्षा का संकल्प.

सामाजिक न्याय की आवाज़.

बहुजन, दलित, पिछड़े और अल्पसंख्यक समाज की एकजुटता.

आपसी भाईचारे और लोकतांत्रिक मूल्यों का संदेश. को मज़बूती से सामने लाने वाला मंच बना.

चंद्रशेखर आज़ाद का संदेश: संघर्षशील जनता को नमन

भीम आर्मी चीफ चंद्रशेखर आज़ाद ने अपने X पोस्ट में साफ़ शब्दों में कहा कि संत कबीर नगर की महारैली का ऐतिहासिक रूप से सफल आयोजन यह साबित करता है कि बहुजन आंदोलन लगातार मज़बूत हो रहा है.

उन्होंने,दिन-रात मेहनत करने वाले पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं को हृदय से धन्यवाद दिया.

आयोजन को सफल बनाने वाले सभी सहयोगियों के प्रति आभार व्यक्त किया. और सबसे महत्वपूर्ण, संत कबीर नगर की जागरूक, संघर्षशील और सम्मानित जनता को कोटि-कोटि नमन किया.

यह संदेश बताता है कि आंदोलन की असली ताकत जनता में ही निहित है.

कार्यकर्ताओं की भूमिका: आंदोलन की रीढ़

किसी भी जनआंदोलन की सफलता उसके कार्यकर्ताओं पर निर्भर करती है.संत कबीर नगर महारैली में यह साफ़ दिखा कि,

जमीनी स्तर पर संगठन कितना मज़बूत है.

युवा, महिलाएँ और सामाजिक कार्यकर्ता सक्रिय भूमिका में हैं.

लोगों में डर नहीं, बल्कि अधिकारों के प्रति जागरूकता है.

दिन-रात जुटे कार्यकर्ताओं ने यह सिद्ध कर दिया कि बहुजन आंदोलन केवल भाषणों का नहीं, बल्कि संघर्ष और समर्पण का आंदोलन है.

बहुजन आंदोलन: हर रैली के साथ बढ़ता आत्मविश्वास

संत कबीर नगर की महारैली यह संकेत देता है कि बहुजन आंदोलन अब एक नए चरण में प्रवेश कर चुका है.
अब यह आंदोलन,

केवल विरोध नहीं, बल्कि विकल्प प्रस्तुत कर रहा है.

सामाजिक न्याय को राजनीतिक एजेंडा बना रहा है.

संविधान को केंद्र में रखकर जनसंघर्ष को आगे बढ़ा रहा है.

हर सफल रैली यह संदेश देती है कि बहुजन समाज अब अपने अधिकारों के लिए संगठित, सजग और संघर्षशील है.

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जनता की भागीदारी: असली जीत

इस महारैली की सबसे बड़ी ताकत रहा जनता की भारी और स्वस्फूर्त भागीदारी.
संत कबीर नगर की जनता ने यह दिखा दिया कि, वे अपने अधिकारों को लेकर सजग हैं.

वे संविधान और भाईचारे के पक्ष में खड़े हैं.और वे बदलाव के लिए किसी भी हद तक जाने को तैयार हैं.

यही कारण है कि चंद्रशेखर आज़ाद ने जनता को ,इतिहास रचने वाली, कहा है. .

निष्कर्ष: एक रैली नहीं, एक संदेश

संत कबीर नगर की संवैधानिक अधिकार बचाओ, भाईचारा बनाओ महारैली सिर्फ़ एक आयोजन नहीं थी, बल्कि यह,

लोकतंत्र को बचाने का संदेश, सामाजिक न्याय की हुंकार

बहुजन आंदोलन की बढ़ती ताकत का प्रमाण था.

चंद्रशेखर आज़ाद का यह संदेश स्पष्ट करता है कि आने वाले समय में बहुजन आंदोलन और अधिक संगठित, मजबूत और प्रभावशाली होगा.यह महारैली आने वाली पीढ़ियों के लिए संघर्ष, एकता और संविधान की रक्षा की प्रेरणा बनेगी.

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