हम सत्य को लेकर नरेंद्र मोदी, अमित शाह और RSS की सरकार को हिंदुस्तान से हटाएंगे.
तीसरा पक्ष ब्यूरो पटना,14 दिसंबर 2025 — देश की राजनीति में एक बार फिर विचारधारा की गहरी बहस तेज हो गया है.कांग्रेस पार्टी के आधिकारिक X (Twitter) हैंडल @INCIndia पर साझा किए गए बयान में नेता विपक्ष श्री राहुल गांधी ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) और उसके प्रमुख मोहन भागवत की सोच पर सीधा और तीखा हमला किया है. यह बयान सिर्फ राजनीतिक आरोप नहीं, बल्कि भारत की नैतिक, सांस्कृतिक और संवैधानिक आत्मा से जुड़ा एक गहन विमर्श है.
राहुल गांधी ने अपने संबोधन में महात्मा गांधी के विचारों को सामने रखते हुए कहा है कि, सत्य सबसे जरूरी चीज है. यही विचार भारतीय सभ्यता की जड़ में रचा-बसा है.हमारे धर्म, दर्शन और संविधान—तीनों सत्य को सर्वोच्च मानते हैं.सत्यमेव जयते सिर्फ एक वाक्य नहीं है, बल्कि भारत की आत्मा का उद्घोष है.

गांधी, धर्म और सत्य की भारतीय परंपरा
भारत की पहचान केवल उसकी भौगोलिक सीमाओं से नहीं, बल्कि उसकी मूल्य आधारित परंपरा से होती है. सत्यम शिवम् सुन्दरम् जैसी अवधारणाएं यह बताती हैं कि सत्य ही कल्याणकारी है और वही सुंदर है.महात्मा गांधी ने सत्य और अहिंसा को केवल सिद्धांत नहीं, बल्कि जनआंदोलन का हथियार बनाया.
राहुल गांधी ने इसी परंपरा को याद दिलाते हुए कहा कि भारत में हमेशा से सत्य को शक्ति से ऊपर रखा गया है.सत्ता आती-जाती रहती है, लेकिन सत्य शाश्वत होता है.
मोहन भागवत के बयान पर तीखा सवाल
राहुल गांधी ने RSS प्रमुख मोहन भागवत के उस कथन का जिक्र किया, जिसमें कहा गया कि दुनिया सत्य को नहीं, शक्ति को देखती है. राहुल गांधी के अनुसार, यही सोच आज देश की राजनीति और शासन व्यवस्था को दिशा दे रही है.
उन्होंने सवाल उठाया है कि,
अगर सत्य का कोई मतलब नहीं और सिर्फ सत्ता ही सब कुछ है, तो फिर संविधान, लोकतंत्र और जनता की आवाज़ का क्या होगा?
राहुल गांधी ने इस सोच को भारतीय मूल्यों के खिलाफ बताया है और कहा कि यह विचारधारा देश को नैतिक रूप से कमजोर कर रही है.
सत्य बनाम असत्य: आज की निर्णायक लड़ाई
अपने भाषण में राहुल गांधी ने साफ शब्दों में कहा है कि आज भारत में लड़ाई राजनीतिक दलों के बीच नहीं, बल्कि सत्य और असत्य के बीच है.
एक तरफ — संविधान, लोकतंत्र, सामाजिक न्याय, सत्य और पारदर्शिता
दूसरी तरफ — सत्ता का दुरुपयोग, संस्थाओं पर नियंत्रण, असहमति की आवाज़ को दबाना, डर और विभाजन की राजनीति
राहुल गांधी ने कहा कि नरेंद्र मोदी, अमित शाह और RSS की सरकार सत्य से डरती है, क्योंकि सत्य सवाल पूछता है और जवाब मांगता है.
ये भी पढ़े :दलितों की आवाज़ और संसद की चुप्पी: क्या लोकतंत्र का यह भी एक चेहरा है?
सत्ता नहीं, सच से चलेगा देश
राहुल गांधी का यह बयान उस व्यापक नैरेटिव को चुनौती देता है, जिसमें शक्ति को ही अंतिम सत्य मान लिया गया है. उन्होंने कहा कि भारत किसी एक व्यक्ति, संगठन या विचारधारा से नहीं, बल्कि संविधान से चलता है.
उन्होंने जनता से अपील करते हुए कहा है कि,
अगर हम चुप रहे, तो असत्य मजबूत होगा.अगर हम सत्य के साथ खड़े हुए, तो सत्ता को झुकना पड़ेगा.
कांग्रेस का राजनीतिक और वैचारिक संदेश
@INCIndia के इस पोस्ट के जरिए कांग्रेस ने स्पष्ट कर दिया है कि वह आने वाले समय में सिर्फ चुनावी नहीं, बल्कि वैचारिक लड़ाई भी लड़ेगी. यह लड़ाई,
संविधान बचाने की, लोकतंत्र की आत्मा बचाने की, और सत्य की जीत की लड़ाई है.
कांग्रेस का दावा है कि देश की जनता अब समझ रही है कि असली मुद्दा कौन-सा है—रोज़गार, महंगाई, सामाजिक सौहार्द और सच बोलने की आज़ादी.
निष्कर्ष: फैसला जनता के हाथ में
रामलीला मैदान से दिया गया राहुल गांधी का यह संदेश सिर्फ एक भाषण नहीं, बल्कि आने वाले राजनीतिक संघर्ष की रूपरेखा है. सवाल साफ है,
क्या भारत सत्य के रास्ते पर चलेगा या सत्ता की ताकत के आगे झुक जाएगा?
राहुल गांधी का दावा है कि यह लड़ाई अंततः सत्य की होगी और,
हम सत्य को लेकर नरेंद्र मोदी, अमित शाह और RSS की सरकार को हिंदुस्तान से हटाएंगे.
अब फैसला देश की जनता को करना है.
रामलीला मैदान, दिल्ली से

I am a blogger and social media influencer. I have about 5 years experience in digital media and news blogging.



















