दलित-गरीब इलाकों के बूथों को बनाया जा रहा संवेदनशील, माले ने लगाया साजिश का आरोप
तीसरा पक्ष ब्यूरो पटना, 4 नवंबर 2025 — बिहार विधानसभा चुनाव के बीच एक बड़ा विवाद सामने आया है.भाकपा (माले) ने आरोप लगाया है कि संवेदनशील और अतिसंवेदनशील बूथों के चयन में भारी भेदभाव किया जा रहा है.पार्टी ने दावा किया है कि जिन बूथों पर हमेशा शांतिपूर्ण मतदान होता आया है, उन्हें जानबूझकर संवेदनशील घोषित किया जा रहा है, जबकि वास्तविक रूप से संवेदनशील बूथों को सामान्य श्रेणी में रखा गया है.
माले राज्य सचिव कुणाल ने एक प्रेस विज्ञप्ति जारी करते हुए कहा कि यह भेदभाव न केवल लोकतंत्र के लिए खतरा है बल्कि दलित, गरीब और कमजोर वर्गों के मताधिकार पर भी सीधा हमला है.उन्होंने कहा कि यह स्थिति चुनावी निष्पक्षता पर गंभीर सवाल खड़े करती है और चुनाव आयोग को तत्काल इस पर हस्तक्षेप करना चाहिये.
तरारी विधानसभा का मामला: 47 बूथों की जगह 149 दलित-गरीब इलाकों के बूथ घोषित हुए संवेदनशील
कुणाल ने बताया कि माले ने तरारी विधानसभा क्षेत्र में चुनाव पर्यवेक्षक को 47 ऐसे बूथों की सूची सौंपी थी जिन्हें अतिसंवेदनशील घोषित करने की मांग की गई थी, क्योंकि वहां पहले भी गड़बड़ी की संभावना रहती है.
लेकिन, पर्यवेक्षक महोदय ने हमारी रिपोर्ट को नजरअंदाज करते हुए उल्टा काम किया, माले सचिव ने कहा.
माले के अनुसार, तरारी में कुल 155 बूथों को संवेदनशील या अतिसंवेदनशील की सूची में रखा गया है. इनमें से 149 बूथ दलित, गरीब और कमजोर वर्गों के मतदाताओं वाले इलाकों के हैं, जबकि जिन बूथों पर पहले हिंसा या मतदाता दबाव की शिकायतें आई थीं, उन्हें सामान्य घोषित कर दिया गया है.
कुणाल ने सवाल उठाया कि,
जब इन 149 बूथों पर पिछले चुनावों में किसी तरह की गड़बड़ी नहीं हुई थी, तो आखिर इन्हें संवेदनशील घोषित करने का आधार क्या है? क्या यह निर्णय किसी राजनीतिक दबाव में लिया गया है?
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भाजपा प्रत्याशी पर साजिश का आरोप
माले ने आरोप लगाया है कि यह पूरा खेल भाजपा प्रत्याशी के इशारे पर किया जा रहा है ताकि गरीब और दलित मतदाताओं के बीच दहशत फैलाई जा सके.
पार्टी का कहना है कि यह एक सोची-समझी रणनीति है, जिससे कमजोर वर्गों की मतदान प्रक्रिया को बाधित किया जा सके.
कुणाल ने कहा कि,
यह प्रतीत होता है कि तरारी में संवेदनशील बूथों की सूची भाजपा उम्मीदवार के दबाव में तैयार की गई है.इसका मकसद साफ है — गरीब और कमजोर वर्ग के मतदाताओं को डराकर मतदान से रोकना.
उन्होंने चुनाव आयोग से मांग किया है कि वह इस विसंगति को तुरंत ठीक करे और यह सुनिश्चित करे कि हर नागरिक निर्भीक होकर वोट डाल सके.
भोरे में माले कार्यालय पर छापे की कोशिश, जदयू प्रत्याशी पर आरोप
प्रेस विज्ञप्ति में माले ने यह भी आरोप लगाया है कि भोरे विधानसभा क्षेत्र में जदयू प्रत्याशी के दबाव में स्थानीय प्रशासन ने पार्टी के कार्यालय पर छापा मारने की कोशिश किया.
कुणाल ने कहा कि इस तरह की कार्रवाइयों का उद्देश्य माले के प्रचार अभियान को बाधित करना और जनता में भय का माहौल बनाना है.
उन्होंने कहा कि,
भोरे में प्रशासन हमारे कार्यालयों पर छापा मारने और कार्यकर्ताओं को परेशान करने में जुटा है.यह लोकतंत्र का अपमान है। चुनाव आयोग को ऐसे मामलों पर तत्काल कार्रवाई करनी चाहिए.
चुनाव आयोग की भूमिका पर उठे सवाल
माले ने कहा कि इन घटनाओं से चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर सवाल खड़े हो रहे हैं. पार्टी ने आयोग से मांग की है कि वह
संवेदनशील बूथों के चयन की प्रक्रिया की स्वतंत्र जांच कराए
सभी दलों के साथ समान व्यवहार सुनिश्चित करे
दलित-गरीब और कमजोर वर्ग के मतदाताओं की सुरक्षा की गारंटी दे.
माले का कहना है कि अगर आयोग ने समय रहते कार्रवाई नहीं की, तो चुनाव की विश्वसनीयता पर गहरा आघात होगा.
लोकतंत्र की बुनियाद पर सवाल
इस विवाद ने बिहार की चुनावी राजनीति को एक नए मोड़ पर ला खड़ा किया है.
दलित और गरीब मतदाता, जो लोकतंत्र की सबसे मजबूत नींव हैं, अगर डर और भेदभाव के माहौल में वोट डालेंगे, तो चुनाव की सच्चाई पर प्रश्नचिह्न लगना स्वाभाविक है.
माले ने स्पष्ट कहा है कि उनकी लड़ाई केवल सीटों की नहीं बल्कि लोकतंत्र की रक्षा की लड़ाई है. पार्टी ने चेतावनी दी है कि अगर भेदभाव जारी रहा, तो वह राज्यव्यापी आंदोलन छेड़ देगी.
निष्कर्ष
संवेदनशील बूथों के चयन में कथित भेदभाव का यह मामला चुनावी निष्पक्षता की कसौटी पर आयोग की परीक्षा ले रहा है.
अब देखना यह है कि चुनाव आयोग इस पर कैसी कार्रवाई करता है — क्या वह निष्पक्ष लोकतंत्र की रक्षा करेगा या फिर यह मुद्दा सिर्फ एक और राजनीतिक विवाद बनकर रह जाएगा.
मेरा नाम रंजीत कुमार है और मैं समाजशास्त्र में स्नातकोत्तर (एम.ए.) हूँ. मैं महत्वपूर्ण सामाजिक, सांस्कृतिक एवं राजनीतिक मुद्दों पर गहन एवं विचारोत्तेजक लेखन में रुचि रखता हूँ। समाज में व्याप्त जटिल विषयों को सरल, शोध-आधारित तथा पठनीय शैली में प्रस्तुत करना मेरा मुख्य उद्देश्य है.
लेखन के अलावा, मूझे अकादमिक शोध पढ़ने, सामुदायिक संवाद में भाग लेने तथा समसामयिक सामाजिक-राजनीतिक घटनाक्रमों पर चर्चा करने में गहरी दिलचस्पी है.



















