शंकराचार्य से दुर्व्यवहार पर RJD का हमला, भाजपा पर साधा निशाना

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Kumar Ranjit

बिहारभारत
प्रयागराज माघ मेला में शंकराचार्य से कथित दुर्व्यवहार पर RJD का विरोध

भाई अरुण कुमार बोले– भाजपा का छद्म हिंदूवादी चेहरा बेनकाब

तीसरा पक्ष ब्यूरो पटना, 22 जनवरी 2026 – प्रयागराज में आयोजित माघ मेला के दौरान शंकराचार्य मुक्तेश्वरानंद जी महाराज के साथ कथित दुर्व्यवहार का मामला अब राजनीतिक तूल पकड़ता जा रहा है. राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के प्रदेश महासचिव भाई अरुण कुमार ने इस घटना को लेकर भारतीय जनता पार्टी और उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार पर तीखा हमला बोला है. उन्होंने इसे न केवल दुर्भाग्यपूर्ण बताया, बल्कि इसे सनातन परंपराओं के खिलाफ किया गया कृत्य करार दिया है.

भाई अरुण कुमार ने जारी प्रेस विज्ञप्ति में कहा कि मौनी अमावस्या के पावन अवसर पर शाही स्नान के लिए जा रहे शंकराचार्य मुक्तेश्वरानंद जी महाराज को मेला प्रशासन द्वारा कथित तौर पर जबरन रथ से उतारने का प्रयास किया गया, जो निंदनीय है. उन्होंने आरोप लगाया कि यह सब उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के इशारे पर किया गया.

यह केवल अपमान नहीं, सनातन विरोधी मानसिकता का परिचायक

RJD नेता ने कहा कि शंकराचार्य जैसे प्रतिष्ठित संत के साथ इस प्रकार का व्यवहार केवल व्यक्तिगत अपमान नहीं है, बल्कि यह सनातन धर्म की गरिमा पर सीधा प्रहार है. उन्होंने सवाल उठाया कि जो सरकार स्वयं को हिंदू धर्म का रक्षक बताती है, वही सरकार साधु-संतों के सम्मान को ठेस कैसे पहुँचा सकती है.

भाई अरुण कुमार के अनुसार, शंकराचार्य मुक्तेश्वरानंद जी महाराज का अपराध’ केवल इतना था कि उन्होंने कुंभ और माघ मेले में व्याप्त अव्यवस्थाओं पर सवाल उठाए थे. उन्होंने भगदड़ की घटनाओं में हुई मौतों के लिए सरकार की जिम्मेदारी तय करने की बात कही थी, जो भाजपा और राज्य सरकार को नागवार गुज़री.

कुंभ और गौ-हत्या के मुद्दे पर सवाल उठाने से नाराज़ हुई भाजपा?

भाई अरुण कुमार ने आरोप लगाया कि शंकराचार्य जी ने गौ-हत्या और गौ-मांस निर्यात के मुद्दे पर भी भाजपा को आईना दिखाया था.उनके अनुसार, शंकराचार्य ने सार्वजनिक रूप से कहा था कि गौ-मांस निर्यात से जुड़े मामलों में भाजपा से जुड़े कई प्रभावशाली लोग संलिप्त हैं.

RJD नेता का कहना है कि इसी कारण भाजपा और उत्तर प्रदेश सरकार शंकराचार्य से बदला लेना चाहती थी और मेले के दौरान उनका अपमान करने का प्रयास किया गया. उन्होंने दावा किया कि इस कथित अपमान से आहत होकर शंकराचार्य जी धरने पर बैठने को मजबूर हुये .

शंकराचार्य किसी पार्टी के विरोधी नहीं

भाई अरुण कुमार ने इस धारणा को भी खारिज किया कि शंकराचार्य मुक्तेश्वरानंद जी महाराज किसी विशेष राजनीतिक दल के पक्ष या विपक्ष में हैं.उन्होंने कहा कि हाल ही में शंकराचार्य जी ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी को भी सार्वजनिक रूप से फटकार लगाई थी, जिससे यह स्पष्ट होता है कि वे किसी पार्टी के एजेंडे पर नहीं, बल्कि धर्म और नैतिकता के आधार पर बोलते हैं.

उन्होंने कहा, सरकार को यह समझना चाहिए कि शंकराचार्य न भाजपा के दुश्मन हैं, न कांग्रेस के मित्र. वे केवल सच बोलते हैं, और यही बात भाजपा को सबसे ज्यादा चुभती है.

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साधु-संतों के राजनीतिक इस्तेमाल का आरोप

RJD प्रदेश महासचिव ने भाजपा पर साधु-संतों के राजनीतिक इस्तेमाल का गंभीर आरोप लगाया. उन्होंने कहा कि भाजपा ने हिंदू धर्म और धार्मिक भावनाओं को राजनीति का औजार बना लिया है. जो संत उनकी राजनीतिक महत्वाकांक्षाओं के अनुकूल होते हैं, उन्हें सम्मान दिया जाता है, और जो सवाल उठाते हैं, उन्हें सनातन विरोधी” करार दे दिया जाता है.

भाई अरुण कुमार के अनुसार, भाजपा अब साधु-संतों के मामलों में भी सीधी दखलअंदाजी करने लगी है और उन्हें उंगलियों पर नचाने” की कोशिश कर रही है. उन्होंने चेतावनी दी कि यह प्रवृत्ति भारतीय लोकतंत्र और धार्मिक स्वतंत्रता दोनों के लिए खतरनाक है.

भाजपा का असली चेहरा हुआ बेनकाब

अपने बयान के अंत में भाई अरुण कुमार ने कहा कि शंकराचार्य मुक्तेश्वरानंद जी महाराज ने भाजपा को आईना दिखाकर यह साबित कर दिया है कि उसका चेहरा वास्तविक हिंदूवादी नहीं, बल्कि छद्म हिंदूवादी और छद्म सनातनी है.

उन्होंने मांग किया कि उत्तर प्रदेश सरकार इस पूरे मामले पर सार्वजनिक रूप से जवाब दे, शंकराचार्य से माफी मांगे और यह सुनिश्चित करे कि भविष्य में किसी भी धार्मिक गुरु या संत के सम्मान के साथ इस प्रकार का व्यवहार न हो.

निष्कर्ष

प्रयागराज माघ मेला से जुड़ा यह विवाद अब केवल धार्मिक नहीं, बल्कि राजनीतिक मुद्दा बन चुका है. शंकराचार्य से कथित दुर्व्यवहार के आरोपों ने भाजपा की हिंदूवादी राजनीति पर नए सवाल खड़े कर दिए हैं. आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि उत्तर प्रदेश सरकार इन आरोपों पर क्या रुख अपनाती है और क्या इस प्रकरण की कोई औपचारिक जांच होती है या नहीं.

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