SIR के खिलाफ माले का ऐलान, 25 जनवरी को संविधान संकल्प – मताधिकार रक्षा दिवस

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Ajit Kumar

बिहार
SIR के विरोध में माले का ऐलान, 25 जनवरी को मताधिकार रक्षा दिवस

SIR के तहत नाम काटे जाने को बताया लोकतंत्र पर हमला, चुनाव आयोग से तत्काल रोक की मांग

तीसरा पक्ष ब्यूरो पटना, 23 जनवरी 2026 — देश में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision – SIR) के तहत बड़े पैमाने पर मतदाताओं के नाम काटे जाने को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है. भाकपा–माले (CPI-ML) ने इसे लोकतंत्र और संविधान पर सीधा हमला करार देते हुए 25 जनवरी 2026 को देशभर में ‘संविधान संकल्प – मताधिकार रक्षा दिवस’ मनाने का ऐलान किया है.

पार्टी का यह कार्यक्रम गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर देश के सभी जिला मुख्यालयों पर आयोजित किया जाएगा, जहां संविधान और लोकतंत्र की रक्षा के सवाल को केंद्र में रखते हुए विरोध प्रदर्शन और जन-कार्यक्रम किए जाएंगे.

मतदाता अधिकार दिवस’ पर चुनाव आयोग के आह्वान पर सवाल

भाकपा–माले ने चुनाव आयोग द्वारा 25 जनवरी को ‘मतदाता अधिकार दिवस’ मनाने के आह्वान को लेकर कड़ी आपत्ति जताई है. पार्टी का कहना है कि जब SIR के नाम पर करोड़ों मतदाताओं के नाम मनमाने ढंग से मतदाता सूची से हटाए जा रहे हैं, तब इस तरह का उत्सव लोकतांत्रिक मूल्यों का मज़ाक है.

पार्टी के राज्य सचिव कुणाल ने शुक्रवार को जारी प्रेस बयान में कहा कि यह स्थिति,जले पर नमक छिड़कने जैसी है. उन्होंने आरोप लगाया कि इस प्रक्रिया में पारदर्शिता और जवाबदेही का पूरी तरह अभाव है.

लोकतंत्र-विरोधी अभियान में शामिल न होने का फैसला

भाकपा–माले की केंद्रीय कमिटी ने स्पष्ट निर्णय लिया है कि वह चुनाव आयोग और सरकारों के संरक्षण में चलाए जा रहे इस अभियान में शामिल नहीं होगी. पार्टी का कहना है कि जब मतदाताओं के मौलिक अधिकारों का हनन हो रहा हो, तब औपचारिक आयोजनों में भागीदारी लोकतंत्र के साथ समझौता होगा.

कुणाल ने कहा कि पार्टी इस,लोकतंत्र-विरोधी ढकोसले का हिस्सा नहीं बनेगी और इसके बजाय जनता के बीच जाकर मताधिकार की रक्षा के लिए संघर्ष को तेज करेगी.

गरीबों और वंचितों को निशाना बनाने का आरोप

भाकपा–माले ने SIR प्रक्रिया को लेकर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि इसके तहत गरीबों, वंचितों, अल्पसंख्यकों और प्रवासी मजदूरों के नाम बड़ी संख्या में मतदाता सूची से हटाए जा रहे हैं. पार्टी का मानना है कि यह एक सुनियोजित साजिश है, जिसका मकसद लोकतांत्रिक हिस्सेदारी को सीमित करना और चुनावी प्रक्रिया को कमजोर करना है.

पार्टी नेताओं का कहना है कि मताधिकार कोई दया या सरकार द्वारा दिया गया उपहार नहीं, बल्कि संविधान द्वारा प्रदत्त नागरिकों का मौलिक अधिकार है। इसे छीनने या सीमित करने का कोई भी प्रयास असंवैधानिक है.

संविधान संकल्प – मताधिकार रक्षा दिवस’ का उद्देश्य

25 जनवरी को आयोजित होने वाले इस कार्यक्रम के तहत देशभर में विरोध सभाएं, धरना-प्रदर्शन और जनसंवाद आयोजित किए जाएंगे. इन कार्यक्रमों का मुख्य उद्देश्य संविधान, लोकतंत्र और मताधिकार की रक्षा के प्रति जन-जागरूकता बढ़ाना है.

इस अवसर पर पार्टी का केंद्रीय नारा होगा,

संविधान व लोकतंत्र की रक्षा के लिए लड़ो — मताधिकार की रक्षा के लिए लड़ो.

पार्टी ने दावा किया है कि इस नारे के साथ 25 जनवरी को व्यापक जन-प्रतिरोध दर्ज कराया जाएगा.

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चुनाव आयोग से मुख्य मांगें

भाकपा–माले ने चुनाव आयोग से स्पष्ट मांग की है कि,

मतदाता सूची से नाम काटने की मौजूदा प्रक्रिया पर तत्काल रोक लगाई जाए.

SIR प्रक्रिया को पारदर्शी, निष्पक्ष और जवाबदेह बनाया जाए.

किसी भी मतदाता का नाम हटाने से पहले उसे सुनवाई का पूरा अवसर दिया जाए.

कमजोर और हाशिये पर खड़े वर्गों के मताधिकार की विशेष सुरक्षा सुनिश्चित की जाए.

पार्टी का कहना है कि जब तक इन मांगों पर ठोस कार्रवाई नहीं होती, तब तक उसका संघर्ष जारी रहेगा.

सियासी और लोकतांत्रिक महत्व

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि मतदाता सूची के मुद्दे पर माले का यह कदम आने वाले समय में व्यापक बहस को जन्म दे सकता है. खासकर ऐसे समय में, जब चुनावी प्रक्रियाओं की निष्पक्षता पर सवाल उठ रहे हों, मताधिकार की रक्षा का मुद्दा राष्ट्रीय विमर्श का केंद्र बन सकता है.

भाकपा–माले का यह ऐलान न केवल एक राजनीतिक विरोध है, बल्कि संविधान और लोकतंत्र के मूल्यों की रक्षा के लिए एक वैचारिक संघर्ष के रूप में भी देखा जा रहा है.

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