अग्निवीर योजना पर AAP का हमला—सेना को ठेके पर दे दिया!
तीसरा पक्ष ब्यूरो पटना,16नवंबर 2025 — उत्तर प्रदेश की राजनीति इस समय एक नए मोड़ से गुजर रही है.बेरोज़गारी, पेपर लीक, सामाजिक न्याय, युवाओं का भविष्य और शासन की जवाबदेही—इन मुद्दों पर बढ़ती बेचैनी अब सड़कों पर उतरकर अपनी ताकत दिखा रही है.इन्हीं सवालों को केंद्र में रखकर आप (AAP) की ईकाई पूरे उत्तर प्रदेश में रोज़गार दो – सामाजिक न्याय दो पदयात्रा का आयोजन कर रही है.
इस पदयात्रा के चौथे दिन AAP सांसद संजय सिंह ने एक ऐसा संबोधन दिया जिसने राज्य की मौजूदा हालातों पर तीखी रोशनी डाली.उनके शब्दों में सिर्फ़ राजनीतिक आरोप नहीं थे, बल्कि करोड़ों युवाओं की हताशा, किसानों की पीड़ा और आम जनता के भीतर पनप रही नाराज़गी की सच्ची प्रतिध्वनि थी.
UP में बेरोज़गारी और अन्याय का आतंक — संजय सिंह का बड़ा आरोप
पदयात्रा के मंच से संजय सिंह ने कहा कि,
पूरे उत्तर प्रदेश में बेरोजगारी और अन्याय का आतंक व्याप्त है. योगी और मोदी के डबल इंजन वाली सरकार की वजह से पूरा प्रदेश बेहाल है.
यह टिप्पणी सिर्फ़ एक बयान नहीं, बल्कि उन लाखों युवाओं की कहानी है जिनका भविष्य लगातार पेपर लीक, भर्ती घोटालों और रोजगार के अवसरों की कमी से जूझ रहा है.
राज्य में पिछले कुछ वर्षों में हाई स्कूल, इंटर, पुलिस भर्ती, दरोगा, सिपाही, लेखपाल सहित कई महत्वपूर्ण परीक्षाएँ बार-बार लीक होने की वजह से रद्द हुईं.इससे न सिर्फ़ तैयारियों में लगे अभ्यर्थियों का समय और पैसा बर्बाद हुआ, बल्कि रोजगार के प्रति शासन के रवैये पर भी सवाल उठे.
अग्निवीर योजना पर तीखा हमला: सेना को ठेके पर दे दिया
सांसद संजय सिंह ने केंद्र सरकार की अग्निपथ ,अग्निवीर योजना पर भी कड़ा प्रहार किया.उनका कहना था कि,
किसान के बेटों को अग्निवीर बनाकर सेना को ठेके पर दे दिया गया है.
यह टिप्पणी उन युवाओं की भावनाओं को दर्शाती है जो देश की सेना में स्थायी नौकरी की उम्मीद लेकर तैयारी कर रहे थे, लेकिन नई भर्ती प्रणाली में 4 साल की सेवा के बाद अनिश्चितता उनकी सबसे बड़ी चिंता बन गई है.
संजय सिंह ने यह भी कहा,
नरेंद्र मोदी को 75 साल में भी देश का प्रधानमंत्री बनना है, लेकिन युवाओं के लिए स्थायी नौकरी नहीं.
यह टिप्पणी युवाओं के बीच बढ़ते राजनीतिक असंतोष को साफ-साफ दिखाती है.
शासन व्यवस्था पर सवाल: पेपर लीक से पस्त युवा
पदयात्रा के चौथे दिन संजय सिंह ने आरोप लगाया कि बाबा के शासन में राज्य का परीक्षा सिस्टम पूरी तरह चरमरा गया है.कई बार हुए पेपर लीक के मामले में बड़े नेटवर्कों का नाम सामने आया, लेकिन कार्रवाई हमेशा आधी-अधूरी ही दिखी.
उन्होंने कहा,
बाबा जी के शासन में हाई स्कूल-इंटर, दरोगा, सिपाही और लेखपाल समेत सभी पेपर लीक हो जाते हैं और हम इसी अव्यवस्था के ख़िलाफ़ आवाज उठा रहे हैं.
जब एक राज्य में सालों तक परीक्षाएँ नियमित रूप से न हो पाएं, तो सीधा असर युवाओं के भविष्य, उद्योगों की मांग और राज्य की उत्पादकता पर होता है.UP में यही स्थिति बार-बार देखने को मिल रही है.
पदयात्रा: युवाओं, किसानों, वंचितों और आम जनता का साझा मंच
AAP की यह पदयात्रा सिर्फ़ एक राजनीतिक कार्यक्रम नहीं है. यह उन वर्गों की भावनाओं को जोड़ती है जो दशकों से अपनी हक़ की लड़ाई लड़ रहे हैं.
युवा: रोजगार और सुरक्षित भविष्य की तलाश में
किसान: MSP, कर्ज़ और बाजार की चुनौतियों के बीच पिसते हुए
वंचित समुदाय: सामाजिक न्याय की मांग के साथ
महिलाएँ: सुरक्षा और अवसरों के लिए संघर्षरत
पदयात्रा में बड़ी संख्या में छात्र, बेरोजगार युवा, समाजिक संगठनों के सदस्य और आम नागरिक शामिल हो रहे हैं.AAP इसे “लोगों की आवाज़ को उठाने का लोकतांत्रिक अभियान” बता रही है.
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क्या पदयात्रा UP की राजनीति का मोड़ बन सकती है?
इस पदयात्रा का असली असर आने वाले महीनों में दिखेगा, लेकिन अभी के संकेत यह बता रहे हैं कि,
बेरोजगारी का सवाल अब सबसे बड़ा चुनावी मुद्दा बन रहा है.
पेपर लीक, भर्ती घोटाले और सरकारी तंत्र की विफलता पर जनता खुलकर सवाल उठा रही है.
युवाओं में उबलते गुस्से ने राजनीतिक दलों को मजबूर किया है कि वे रोजगार को प्राथमिक मुद्दे में शामिल करें.
केंद्र और राज्य की नीतियों पर सवाल अब तेज़ और सीधा हो चुका है.
AAP की रणनीति साफ है — वह खुद को युवाओं और सामाजिक न्याय के मुद्दों की सबसे प्रभावी आवाज़ के रूप में स्थापित करना चाहती है.
निष्कर्ष: संघर्ष अभी जारी है, और आवाज़ बुलंद हो रही है
रोज़गार दो – सामाजिक न्याय दो’ पदयात्रा का चौथा दिन यह संदेश देकर गया कि उत्तर प्रदेश का युवा अब चुप नहीं है. वह जवाब चाहता है, अवसर चाहता है और अपनी मेहनत का सम्मान चाहता है.
संजय सिंह का उद्बोधन इस संघर्ष की आवाज़ को तेज़ करता है.यह पदयात्रा सिर्फ़ AAP का कार्यक्रम नहीं, बल्कि उस पीढ़ी की पुकार है जिसे लंबे समय से अनदेखा किया जा रहा है.
यह आवाज़ यूपी की राजनीति को नया मोड़ देगी या नहीं, यह आने वाला समय बताएगा.लेकिन इतना निश्चित है कि बेरोजगारी और सामाजिक न्याय अब ऐसी लड़ाई बन चुकी है जो दबी नहीं रहेगी.
नोट : यह रिपोर्ट AAP के आधिकारिक X (Twitter) हैंडल (@AamAadmiParty) और AAP सांसद संजय सिंह (@SanjayAzadSln) के पोस्ट के आधार पर तैयार की गई है, जिसमें उन्होंने उत्तर प्रदेश की मौजूदा स्थिति पर कई गंभीर आरोप लगाए.

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