10 सर्कुलर रोड आवास विवाद: राजद का भाजपा-जदयू पर हमला, कहा- सरकारी बंगला किसी की पैतृक संपत्ति नहीं

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Ajit Kumar

बिहार
10 सर्कुलर रोड आवास विवाद: राजद का भाजपा-जदयू पर हमला, कहा- सरकारी बंगला किसी की पैतृक संपत्ति नहीं

राजद प्रवक्ता चित्तरंजन गगन ने उठाए कई सवाल, राबड़ी देवी के आवास आवंटन को लेकर सरकार की नीयत पर जताई आपत्ति

तीसरा पक्ष ब्यूरो पटना, 31 मई 2026: बिहार की राजनीति में 10 सर्कुलर रोड आवास को लेकर जारी विवाद एक बार फिर चर्चा का विषय बन गया है. राष्ट्रीय जनता दल (राजद) ने इस मुद्दे पर भाजपा और जदयू को घेरते हुए सरकार की मंशा पर गंभीर सवाल खड़ा किया हैं.राजद के प्रदेश प्रवक्ता चित्तरंजन गगन ने कहा है कि सरकारी बंगले किसी राजनीतिक दल या उसके नेताओं की निजी संपत्ति नहीं हैं, बल्कि जनता के टैक्स के पैसे से बनाए और संचालित किया जाता है.

उन्होंने भाजपा और जदयू नेताओं द्वारा 10 सर्कुलर रोड आवास को लेकर दिए जा रहे बयानों को अनुचित बताते हुए कहा कि ऐसा प्रतीत होता है मानो सरकारी आवास उनके निजी अधिकार क्षेत्र में आते हों. गगन ने सवाल किया कि यदि सरकारी आवासों के आवंटन में नियमों का पालन किया जा रहा है, तो फिर उन नियमों में समानता और पारदर्शिता भी दिखाई देनी चाहिए.

10 सर्कुलर रोड आवास को लेकर क्यों बढ़ा विवाद?

बिहार की पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी लंबे समय से 10 सर्कुलर रोड स्थित सरकारी आवास में रह रही हैं. हाल के दिनों में इस आवास को लेकर राजनीतिक बहस तेज हो गई है. सत्ताधारी दलों की ओर से नियमों का हवाला देते हुए आवास आवंटन को उचित ठहराया जा रहा है, जबकि राजद इसे राजनीतिक दुर्भावना से प्रेरित कदम बता रहा है.

चित्तरंजन गगन का कहना है कि यदि सरकार वास्तव में नियमों के अनुसार कार्य कर रही है, तो सभी मामलों में एक समान मानदंड लागू होने चाहिए.उन्होंने आरोप लगाया कि नियमों की आड़ में राजनीतिक विरोधियों को निशाना बनाया जा रहा है.

राजद ने उठाए दोहरे मापदंड के सवाल

राजद प्रवक्ता ने उदाहरण देते हुए कहा कि विधानसभा अध्यक्ष प्रेम कुमार को वही सरकारी आवास विधानसभा अध्यक्ष के आवास के रूप में चिन्हित कर दिया गया, जिसमें वे पहले से रह रहे थे. इसी प्रकार विजय कुमार चौधरी को उपमुख्यमंत्री बनने के बाद वही आवास उपमुख्यमंत्री आवास के रूप में आवंटित कर दिया गया, जहां वे पहले से निवास कर रहे थे.

ऐसे में सवाल यह उठता है कि राबड़ी देवी के मामले में अलग व्यवस्था क्यों अपनाई जा रही है. राजद का कहना है कि यह केवल आवास का मामला नहीं है, बल्कि सरकार की राजनीतिक सोच और नीयत को दर्शाता है.

सरकारी बंगले जनता के पैसे से संचालित होते हैं

राजद ने यह भी कहा है कि बिहार के सभी सरकारी आवास जनता की गाढ़ी कमाई से निर्मित और संरक्षित किए जाते हैं.इसलिए किसी भी राजनीतिक दल या नेता को इन पर निजी अधिकार जताने का नैतिक या कानूनी आधार नहीं है.

गगन ने आरोप लगाया है कि सत्ता पक्ष के कई नेताओं को आवश्यकता से अधिक सरकारी सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं. उन्होंने कहा कि पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को 7 सर्कुलर रोड का बड़ा सरकारी आवास दिया गया है, जबकि स्वास्थ्य मंत्री निशांत कुमार को भी अलग सरकारी आवास उपलब्ध कराया गया है.

राजद का दावा है कि कई मंत्रियों को दो-दो सरकारी आवास उपलब्ध हैं, जिनमें एक मंत्री पद के आधार पर और दूसरा विधानमंडल सदस्य होने के कारण दिया गया है.ऐसे में सरकार को पहले इन व्यवस्थाओं की समीक्षा करनी चाहिए.

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विपक्ष ने सरकार की नीयत पर उठाए सवाल

राजद का मानना है कि यदि सरकार वास्तव में नियमों के प्रति प्रतिबद्ध है, तो उसे सभी नेताओं और जनप्रतिनिधियों पर समान नियम लागू करने चाहिए.विपक्ष का आरोप है कि राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता के आधार पर अलग-अलग मापदंड अपनाए जा रहे हैं, जिससे लोकतांत्रिक मूल्यों को नुकसान पहुंचता है.

विशेषज्ञों का मानना है कि सरकारी आवासों के आवंटन को लेकर स्पष्ट और पारदर्शी नीति होना आवश्यक है, ताकि किसी भी प्रकार के राजनीतिक विवाद की संभावना कम हो.जब नियम सभी पर समान रूप से लागू होंगे, तभी जनता के बीच निष्पक्षता का संदेश जाएगा.

बिहार की राजनीति में बढ़ती बयानबाजी

10 सर्कुलर रोड आवास विवाद केवल एक सरकारी बंगले तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह बिहार की राजनीति में सत्ता और विपक्ष के बीच टकराव का नया मुद्दा बन चुका है। दोनों पक्ष अपने-अपने तर्कों के साथ जनता के सामने हैं.

आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि सरकार इस मामले पर क्या रुख अपनाती है और क्या आवास आवंटन से जुड़े नियमों को लेकर कोई नई स्पष्टता सामने आती है. फिलहाल राजद ने इस मुद्दे को राजनीतिक और नैतिक प्रश्न के रूप में उठाकर सरकार को कटघरे में खड़ा करने की कोशिश की है.

निष्कर्ष

10 सर्कुलर रोड आवास विवाद ने बिहार में सरकारी सुविधाओं के आवंटन, राजनीतिक निष्पक्षता और प्रशासनिक पारदर्शिता को लेकर नई बहस छेड़ दी है.राजद का आरोप है कि सरकार दोहरे मापदंड अपना रही है, जबकि सत्ता पक्ष नियमों के पालन की बात कर रहा है। ऐसे में जनता की नजरें अब इस बात पर टिकी हैं कि इस विवाद का समाधान किस प्रकार निकाला जाता है और क्या वास्तव में सभी नेताओं के लिए एक समान नियम लागू किए जाते हैं.

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