बिहार में महिलाओं की सुरक्षा पर फिर उठे सवाल, प्रियंका भारती ने NDA सरकार को घेरा

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Ajit Kumar

बिहार
बिहार में महिला सुरक्षा को लेकर बयान देतीं RJD प्रवक्ता प्रियंका भारती

बिहार की बेटियों की सुरक्षा को लेकर विपक्ष का हमला तेज

तीसरा पक्ष ब्यूरो पटना 31 मई 2026 :बिहार में महिलाओं और बेटियों की सुरक्षा को लेकर एक बार फिर राजनीतिक बहस तेज हो गई है. राष्ट्रीय जनता दल (RJD) की राष्ट्रीय प्रवक्ता प्रियंका भारती ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X (पूर्व में ट्विटर) पर एक पोस्ट साझा करते हुए राज्य की कानून-व्यवस्था और महिला सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़ा किया है.उन्होंने आरोप लगाया है कि बिहार में हालात इतने खराब हो चुके हैं कि लड़कियां शाम 6 बजे के बाद घर से बाहर निकलने में असुरक्षित महसूस कर रही हैं.

प्रियंका भारती का यह बयान ऐसे समय में आया है जब बिहार में महिलाओं की सुरक्षा, अपराध और कानून-व्यवस्था को लेकर विपक्ष लगातार NDA सरकार पर हमला बोल रहा है. उनके पोस्ट ने सोशल मीडिया पर नई बहस छेड़ दिया है और राजनीतिक गलियारों में भी इसकी चर्चा तेज हो गई है.

प्रियंका भारती ने क्या कहा?

अपने X पोस्ट में प्रियंका भारती ने लिखा है कि बिहार की लड़कियां शाम के बाद घर से बाहर नहीं निकल पा रही हैं.उन्होंने दावा किया है कि महिलाओं और छात्राओं के लिए हॉस्टल तक सुरक्षित नहीं रह गया हैं.उन्होंने एक कथित घटना का जिक्र करते हुए कहा कि पिता के सामने बेटी को खींचकर ले जाने जैसी घटनाएं राज्य में भय का माहौल पैदा कर रही हैं.

इसके साथ ही उन्होंने NDA की महिला नेताओं पर भी निशाना साधा है. प्रियंका भारती ने कहा कि जो नेता पहले पश्चिम बंगाल की कानून-व्यवस्था और महिला सुरक्षा को लेकर सवाल उठाते थे, वे अब बिहार की घटनाओं पर चुप्पी साधे हुए हैं. उन्होंने तंज कसते हुए पूछा कि बिहार के मुद्दे पर आखिर उनके मुंह में दही क्यों जम गया है?

महिला सुरक्षा बना बड़ा राजनीतिक मुद्दा

बिहार में महिला सुरक्षा का मुद्दा लंबे समय से राजनीतिक विमर्श का हिस्सा रहा है.विपक्ष का आरोप है कि राज्य में अपराध की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं और सरकार कानून-व्यवस्था को नियंत्रित करने में विफल साबित हो रही है.

वहीं सत्तारूढ़ गठबंधन का दावा है कि सरकार अपराध नियंत्रण के लिए लगातार कार्रवाई कर रही है और किसी भी अपराधी को बख्शा नहीं जा रहा है.बावजूद इसके, जब भी महिलाओं के खिलाफ अपराध की कोई बड़ी घटना सामने आती है, तो विपक्ष सरकार को घेरने का प्रयास करता है.

प्रियंका भारती के हालिया बयान को भी इसी राजनीतिक संघर्ष का हिस्सा माना जा रहा है. उनका कहना है कि महिलाओं की सुरक्षा केवल चुनावी मुद्दा नहीं बल्कि सामाजिक जिम्मेदारी का विषय है, जिस पर सरकार को गंभीरता से काम करना चाहिए.

छात्राओं और कामकाजी महिलाओं की बढ़ती चिंताएं

महिलाओं की सुरक्षा को लेकर समाज के विभिन्न वर्गों में चिंता देखी जा रही है. खासकर छात्राओं और कामकाजी महिलाओं के बीच सुरक्षा को लेकर चर्चा बढ़ी है. बड़े शहरों से लेकर छोटे कस्बों तक महिलाएं सुरक्षित वातावरण की मांग कर रही हैं.

विशेषज्ञों का मानना है कि केवल कानून बनाना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उनका प्रभावी क्रियान्वयन भी जरूरी है. सार्वजनिक स्थानों पर सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करना, पुलिस गश्त बढ़ाना और अपराधियों के खिलाफ त्वरित कार्रवाई करना समय की मांग है.

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सोशल मीडिया पर मिली मिली-जुली प्रतिक्रिया

प्रियंका भारती के पोस्ट के बाद सोशल मीडिया पर लोगों की अलग-अलग प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं है . कुछ लोगों ने उनके बयान का समर्थन करते हुए महिला सुरक्षा को गंभीर मुद्दा बताया है , जबकि कुछ यूजर्स ने इसे राजनीतिक बयानबाजी करार दिया है .

हालांकि एक बात स्पष्ट है कि महिलाओं की सुरक्षा का विषय किसी एक दल या विचारधारा तक सीमित नहीं है. यह समाज के हर वर्ग से जुड़ा मुद्दा है और इस पर व्यापक चर्चा की आवश्यकता है.

सरकार के सामने बड़ी चुनौती

बिहार सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह है कि वह जनता के बीच सुरक्षा का भरोसा कायम रखे. महिलाओं और बेटियों को सुरक्षित माहौल उपलब्ध कराना किसी भी सरकार की प्राथमिक जिम्मेदारी होती है.

विशेषज्ञों का कहना है कि अपराध पर प्रभावी नियंत्रण, त्वरित न्याय प्रणाली और जागरूकता अभियान जैसे कदम महिला सुरक्षा को मजबूत बनाने में मदद कर सकते हैं.इसके साथ ही राजनीतिक दलों को भी इस मुद्दे को केवल आरोप-प्रत्यारोप तक सीमित रखने के बजाय समाधान की दिशा में काम करना चाहिए.

निष्कर्ष

RJD की राष्ट्रीय प्रवक्ता प्रियंका भारती द्वारा उठाए गए सवालों ने बिहार में महिला सुरक्षा के मुद्दे को फिर से चर्चा के केंद्र में ला दिया है.चाहे यह राजनीतिक बयान हो या सामाजिक चिंता, लेकिन महिलाओं की सुरक्षा ऐसा विषय है जिसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता.राज्य की बेटियों और महिलाओं को सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराना सरकार, प्रशासन और समाज सभी की साझा जिम्मेदारी है.आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि महिला सुरक्षा को लेकर उठ रहे सवालों पर सरकार और प्रशासन किस प्रकार की कार्रवाई करते हैं.

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