कॉ. आर. एन. ठाकुर का निधन: बिहार के वामपंथी और ट्रेड यूनियन आंदोलन ने खोया संघर्षशील नेता

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Ajit Kumar

बिहार
कॉमरेड आर. एन. ठाकुर को पटना में नेताओं और कार्यकर्ताओं द्वारा श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए.

कॉ. आर. एन. ठाकुर का निधन, वामपंथी आंदोलन में शोक की लहर

तीसरा पक्ष ब्यूरो पटना :भाकपा (माले) के वरिष्ठ नेता, एक्टू (AICCTU) के बिहार राज्य महासचिव और पार्टी की राज्य कमिटी के सदस्य कॉमरेड रामनारायण ठाकुर (आर. एन. ठाकुर) का रविवार, 5 जुलाई 2026 को पटना स्थित पीएमसीएच में निधन हो गया. वे पिछले कुछ दिनों से ब्रेन स्ट्रोक के कारण अस्पताल में भर्ती थे। चिकित्सकों के लगातार प्रयासों के बावजूद उनकी हालत में सुधार नहीं हुआ और रविवार सुबह लगभग 9 बजे उन्होंने अंतिम सांस ली.

उनके निधन की खबर मिलते ही भाकपा (माले), एक्टू, विभिन्न ट्रेड यूनियनों, महागठबंधन के नेताओं और सामाजिक संगठनों में शोक की लहर दौड़ गई. पार्टी ने इसे बिहार ही नहीं, बल्कि पूरे देश के वामपंथी एवं मजदूर आंदोलन के लिए अपूरणीय क्षति बताया है.

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नक्सलबाड़ी आंदोलन से जुड़कर शुरू किया राजनीतिक जीवन

कॉमरेड आर. एन. ठाकुर बिहार के रोहतास जिले के दिनारा प्रखंड स्थित बीसी बिसाव गांव के निवासी थे. वे पटना साइंस कॉलेज में केमिस्ट्री के छात्र थे, लेकिन वर्ष 1969-70 में नक्सलबाड़ी आंदोलन से प्रभावित होकर उन्होंने पढ़ाई छोड़ दी और जनसंघर्षों से जुड़ गए.

उन्होंने अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत पटना के पुनपुन क्षेत्र में भूमिहीन और गरीब किसानों के बीच संगठन निर्माण से की. आपातकाल के दौरान वे जेल भी गए और उसके बाद भी लगातार किसान, मजदूर और वंचित वर्गों के अधिकारों के लिए सक्रिय रहे.

कई जिलों में संगठन निर्माण में निभाई महत्वपूर्ण भूमिका

कॉमरेड आर. एन. ठाकुर ने बिहार और वर्तमान झारखंड के कई जिलों में पार्टी संगठन को मजबूत करने में महत्वपूर्ण योगदान दिया.जहानाबाद, गया, अरवल, हजारीबाग, पूर्णिया, रोहतास, गिरिडीह और मुंगेर सहित अनेक क्षेत्रों में उन्होंने किसान आंदोलनों और मजदूर संगठनों के विस्तार के लिए लगातार काम किया.

ट्रेड यूनियन संगठन एक्टू के माध्यम से उन्होंने श्रमिकों के अधिकारों की लड़ाई को नई दिशा देने में अहम भूमिका निभाई.

पटना में अंतिम दर्शन, नेताओं ने दी श्रद्धांजलि

कॉमरेड आर. एन. ठाकुर का पार्थिव शरीर पटना स्थित एमएलए फ्लैट 15/10 में अंतिम दर्शन के लिए रखा गया, जहां बड़ी संख्या में पार्टी नेताओं, कार्यकर्ताओं और विभिन्न राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों ने उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की.

श्रद्धांजलि देने वालों में पार्टी के वरिष्ठ नेता स्वदेश भट्टाचार्य, राज्य सचिव कुणाल, धीरेन्द्र झा, अमर, मीना तिवारी, सांसद राजाराम सिंह, एक्टू के राष्ट्रीय महासचिव राजीव डिमरी, सुदामा प्रसाद, विधायक अरुण सिंह, संदीप सौरभ, केडी यादव, संतोष सहर सहित राज्य कमिटी के सदस्य और विभिन्न जिलों से आए कार्यकर्ता शामिल रहे.

इसके अलावा इंटक, एनएपीएम, यूटीयूसी, स्कीम वर्कर्स फेडरेशन और अन्य जनसंगठनों के प्रतिनिधियों ने भी उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि दी.

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महागठबंधन और वाम दलों ने जताया शोक

महागठबंधन और वाम दलों के कई वरिष्ठ नेताओं ने भी कॉमरेड आर. एन. ठाकुर के पार्थिव शरीर पर पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि दी.

श्रद्धांजलि देने वालों में राष्ट्रीय जनता दल के वरिष्ठ नेता अब्दुल बारी सिद्दीकी, सीपीआई के विश्वजीत कुमार, डीवाईएफआई के आसिफ अली तथा भाकपा (माले) के राज्य सचिव नंदकिशोर प्रसाद सहित अनेक नेता मौजूद रहे.

कुणाल बोले— पार्टी और श्रमिक आंदोलन की बड़ी क्षति

भाकपा (माले) के राज्य सचिव कुणाल ने कहा कि कॉमरेड आर. एन. ठाकुर पार्टी की पहली पीढ़ी के अग्रणी नेताओं में शामिल थे. उन्होंने कहा कि उनके निधन से पार्टी ने एक जुझारू, प्रतिबद्ध, दूरदर्शी और संघर्षशील नेता को खो दिया है.

उन्होंने कहा कि आर. एन. ठाकुर का जीवन सादगी, अनुशासन, वैचारिक स्पष्टता और संगठन के प्रति अटूट निष्ठा का उदाहरण था. कठिन परिस्थितियों में भी लगातार काम करते रहने की उनकी क्षमता उन्हें अपने समकालीन नेताओं से अलग पहचान देती थी.

वामपंथी आंदोलन के लिए यादगार रहेगा योगदान

भाकपा (माले) ने अपने शोक संदेश में कहा कि कॉमरेड आर. एन. ठाकुर का योगदान सदैव स्मरणीय रहेगा. पार्टी ने उनके अधूरे संघर्षों और जनआंदोलनों को आगे बढ़ाने का संकल्प दोहराते हुए कहा कि उनका जीवन आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत रहेगा.

निष्कर्ष

कॉमरेड आर. एन. ठाकुर ने अपना पूरा जीवन मजदूरों, किसानों और वंचित तबकों के अधिकारों की लड़ाई के लिए समर्पित किया.बिहार में ट्रेड यूनियन और वामपंथी आंदोलन को मजबूत बनाने में उनकी भूमिका लंबे समय तक याद की जाएगी. उनके निधन से केवल भाकपा (माले) ही नहीं, बल्कि पूरे श्रमिक और जनआंदोलन ने एक अनुभवी और समर्पित नेतृत्व को खो दिया है.

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