जनगणना और परिसीमन की शर्त हटाने की मांग,इंडिया गठबंधन से संसद में आवाज उठाने की अपील
तीसरा पक्ष ब्यूरो पटना, 11 जुलाई 2026: महिला संगठनों ने महिला आरक्षण कानून को बिना किसी शर्त के तत्काल लागू करने की मांग को लेकर शनिवार को पटना में इंडिया गठबंधन के विभिन्न घटक दलों के नेताओं को ज्ञापन सौंपा. प्रतिनिधिमंडल ने मांग किया कि केंद्र सरकार जनगणना और परिसीमन की शर्त हटाकर महिला आरक्षण कानून को तुरंत लागू करे तथा संसद के आगामी मानसून सत्र में विपक्ष इस मुद्दे को मजबूती से उठाए.
महिला आरक्षण कानून को बिना शर्त लागू करने की मांग तेज
देशभर के महिला संगठनों द्वारा चलाए जा रहे संयुक्त अभियान के तहत पटना में विभिन्न महिला संगठनों के प्रतिनिधियों ने विपक्षी दलों के नेताओं से मुलाकात की. प्रतिनिधिमंडल ने कहा कि महिला आरक्षण कानून को जनगणना और परिसीमन जैसी प्रक्रियाओं से जोड़ने के बजाय तत्काल प्रभाव से लागू किया जाना चाहिए, ताकि महिलाओं को जल्द से जल्द राजनीतिक प्रतिनिधित्व मिल सके.
महिला संगठनों का कहना है कि संसद द्वारा कानून पारित किए जाने के बाद भी उसके लागू होने में देरी महिलाओं के संवैधानिक अधिकारों और राजनीतिक भागीदारी को प्रभावित कर रही है.

इंडिया गठबंधन के नेताओं को सौंपा ज्ञापन
प्रतिनिधिमंडल ने राष्ट्रीय जनता दल (राजद), भाकपा (माले), कांग्रेस, भाकपा, माकपा सहित इंडिया गठबंधन के विभिन्न दलों के नेताओं को ज्ञापन सौंपा.
इस दौरान प्रतिनिधिमंडल ने,
राजद के प्रदेश अध्यक्ष मंगनीलाल मंडल से मुलाकात की.
भाकपा (माले) के राज्य सचिव कामरेड कुणाल से चर्चा की.
कांग्रेस एवं अन्य सहयोगी दलों के प्रतिनिधियों को ज्ञापन सौंपा.
सांसदों से मानसून सत्र में महिला आरक्षण लागू कराने के लिए सरकार पर दबाव बनाने का आग्रह किया.
महिला संगठनों ने विपक्षी दलों से अपेक्षा जताई कि वे संसद के दोनों सदनों में इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाएं.
भाजपा पर लगाए गंभीर आरोप
ज्ञापन सौंपने के दौरान महिला संगठनों के प्रतिनिधियों ने भाजपा पर राजनीतिक आरोप भी लगाए. उनका कहना था कि भाजपा महिलाओं को वास्तविक आरक्षण देने के बजाय केवल राजनीतिक प्रचार कर रही है.
प्रतिनिधियों ने आरोप लगाया कि,
महिला आरक्षण लागू करने में जानबूझकर देरी की जा रही है.
जनगणना और परिसीमन की शर्त जोड़कर कानून के क्रियान्वयन को टाला जा रहा है.
परिसीमन के माध्यम से राजनीतिक लाभ लेने की कोशिश की जा रही है.
ये आरोप महिला संगठनों द्वारा लगाए गए हैं.
बिहार विधानसभा से भी प्रस्ताव पारित कराने की मांग
महिला प्रतिनिधियों ने केवल संसद ही नहीं बल्कि बिहार विधानसभा में भी महिला आरक्षण कानून के समर्थन में प्रस्ताव पारित कराने की मांग उठाई.
उनका कहना था कि यदि राज्य विधानसभा इस विषय पर सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित करती है तो इससे केंद्र सरकार पर महिला आरक्षण को शीघ्र लागू करने का नैतिक और राजनीतिक दबाव बढ़ेगा.
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प्रतिनिधिमंडल में शामिल प्रमुख महिलाएं
महिला संगठनों के संयुक्त प्रतिनिधिमंडल में कई सामाजिक और महिला अधिकार कार्यकर्ता शामिल रहीं. इनमें प्रमुख रूप से,
ऐपवा महासचिव मीना तिवारी
उपाध्यक्ष सरोज चौबे
बिहार महिला समाज की अध्यक्ष निवेदिता झा
पूर्व अध्यक्ष सुशीला सहाय
ऐडवा की उपाध्यक्ष रामपरी
बिन्दु कुमारी
नारी गुंजन की पद्मश्री सुधा वर्गीज
राजद की मुकुंद सिंह
सामाजिक कार्यकर्ता अख्तरी बेगम
निरंतर की सुष्मिता
रत्ना प्रिया सहित अन्य महिलाएं शामिल थीं.
महिला आरक्षण कानून पर बहस फिर हुई तेज
महिला संगठनों के इस अभियान से एक बार फिर महिला आरक्षण कानून के क्रियान्वयन को लेकर राजनीतिक बहस तेज होने की संभावना है. विपक्षी दलों से मुलाकात के जरिए इन संगठनों ने स्पष्ट संदेश दिया है कि वे कानून को बिना किसी अतिरिक्त शर्त के जल्द लागू कराने के लिए राष्ट्रीय स्तर पर दबाव बनाए रखेंगे.
आगामी संसद के मानसून सत्र में यह मुद्दा प्रमुख राजनीतिक विषय बन सकता है, यदि विपक्ष इस मांग को संयुक्त रूप से उठाता है.
निष्कर्ष
पटना में महिला संगठनों द्वारा विपक्षी दलों को ज्ञापन सौंपना महिला आरक्षण कानून को शीघ्र लागू कराने की दिशा में एक राजनीतिक पहल माना जा रहा है.संगठनों ने स्पष्ट रूप से जनगणना और परिसीमन की शर्त हटाकर तत्काल महिला आरक्षण लागू करने की मांग की है. अब निगाहें संसद के मानसून सत्र और केंद्र सरकार की अगली रणनीति पर रहेंगी.

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