चिराग पासवान और स्वतंत्र भारद्वाज विवाद ने पकड़ा तूल

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Ajit Kumar

भारतबिहार
चिराग पासवान और स्वतंत्र भारद्वाज विवाद को लेकर दिल्ली पुलिस से निष्पक्ष जांच की मांग

पॉडकास्ट में नाम लिए जाने पर चिराग पासवान ने शिकायत कर दिल्ली पुलिस से निष्पक्ष जांच की मांग की

तीसरा पक्ष ब्यूरो पटना, बिहार: केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान और स्वतंत्र भारद्वाज से जुड़ा विवाद अब राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बन गया है. जंतर-मंतर विरोध प्रदर्शन से संबंधित एक घटना पर स्वतंत्र भारद्वाज के पॉडकास्ट में चिराग पासवान और भाजपा नेता कपिल मिश्रा समेत कई नेताओं के नाम लिए जाने के बाद केंद्रीय मंत्री ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है.

चिराग पासवान ने मामले को गंभीर बताते हुए कहा कि पॉडकास्ट में एक व्यक्ति की कथित तौर पर इतनी बुरी तरह पिटाई किए जाने की बात कही गई, जिससे उसकी मौत तक हो सकती थी. उनका कहना है कि यदि कोई व्यक्ति सार्वजनिक मंच पर ऐसी गंभीर बात स्वीकार करता है और फिर भी उसके खिलाफ कार्रवाई नहीं होती, तो यह समाज के सामने गलत उदाहरण पेश करेगा.

जंतर-मंतर पर आखिर हुआ क्या था?

विवाद की जड़ दिल्ली के जंतर-मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के प्रदर्शन के दौरान हुई कथित मारपीट की घटना है. इस घटनाक्रम में प्रदर्शन से जुड़ी कार्यकर्ता निशु आजाद के पिता संजय कुमार के साथ मारपीट का मामला सामने आया था.

मामले ने दोबारा तब जोर पकड़ा, जब स्वतंत्र भारद्वाज के पुराने पॉडकास्ट का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ.रिपोर्टों के मुताबिक, वीडियो में भारद्वाज ने संजय कुमार के साथ हुई मारपीट का जिक्र किया और घटना को लेकर गंभीर दावे किए. इसी बातचीत में उन्होंने कुछ राजनीतिक नेताओं के साथ अपने संबंधों का भी उल्लेख किया. हालांकि, वायरल वीडियो में किए गए सभी दावों की स्वतंत्र पुष्टि को लेकर सावधानी जरूरी है.

स्वतंत्र भारद्वाज के पॉडकास्ट पर क्या बोले चिराग पासवान?

चिराग पासवान के मुताबिक, पॉडकास्ट में कई राजनेताओं के नामों का इस्तेमाल किया गया और उनका नाम भी कथित तौर पर गलत तरीके से लिया गया.उन्होंने इसी को लेकर संबंधित व्यक्ति के खिलाफ आधिकारिक शिकायत दर्ज कराने की बात कही है.

केंद्रीय मंत्री ने इस मामले को महज राजनीतिक बयानबाजी मानने के बजाय इसकी निष्पक्ष जांच की जरूरत बताई. उनका कहना है कि यदि किसी गंभीर घटना को लेकर सार्वजनिक रूप से दावा किया गया है, तो उसकी सच्चाई सामने आनी चाहिए.

दिल्ली पुलिस से निष्पक्ष जांच की मांग

चिराग पासवान ने दिल्ली पुलिस से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच करने का आग्रह किया है. जांच के दौरान पॉडकास्ट की मूल रिकॉर्डिंग, उसमें कही गई बातों का संदर्भ और जंतर-मंतर की कथित घटना से जुड़े उपलब्ध साक्ष्यों की पड़ताल की जा सकती है.

इससे यह स्पष्ट हो सकता है कि पॉडकास्ट में किए गए दावे किस आधार पर थे और उसमें जिन राजनीतिक नेताओं के नाम लिए गए, उनका कथित घटना से कोई वास्तविक संबंध था या नहीं.

कपिल मिश्रा का नाम भी आया

विवाद में चिराग पासवान के साथ भाजपा नेता कपिल मिश्रा का नाम भी चर्चा में है. हालांकि, किसी बातचीत या पॉडकास्ट में किसी नेता का नाम लिया जाना अपने आप में उसकी किसी घटना में संलिप्तता साबित नहीं करता.

यही वजह है कि इस मामले में आरोपों और तथ्यों के बीच अंतर बनाए रखना जरूरी है. वास्तविक स्थिति जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी.

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गलत मिसाल को लेकर जताई चिंता

चिराग पासवान ने कार्रवाई नहीं होने की स्थिति को लेकर भी चिंता जताई.उनका तर्क है कि सार्वजनिक मंच पर हिंसा जैसी गंभीर घटना को लेकर किए गए दावों की अनदेखी नहीं होनी चाहिए.

उनकी शिकायत का एक प्रमुख आधार अपने नाम के कथित गलत इस्तेमाल को भी माना जा रहा है. ऐसे में जांच केवल घटना की सत्यता तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि सार्वजनिक रूप से लिए गए नामों और उनके संदर्भ को भी स्पष्ट करने में मदद कर सकती है.

अब पुलिस की कार्रवाई पर नजर

चिराग पासवान की शिकायत के बाद अब दिल्ली पुलिस की संभावित कार्रवाई पर नजर रहेगी. यदि जांच आगे बढ़ती है तो संबंधित बयान, रिकॉर्डिंग और अन्य साक्ष्यों के आधार पर पूरे घटनाक्रम की पड़ताल की जा सकती है.

फिलहाल स्वतंत्र भारद्वाज के पॉडकास्ट में कही गई बातों और चिराग पासवान की शिकायत के बीच विवाद का केंद्र यही है कि कथित घटना का वास्तविक तथ्य क्या है और इसमें किन लोगों की भूमिका थी.

निष्कर्ष

चिराग पासवान और स्वतंत्र भारद्वाज विवाद ने जंतर-मंतर से जुड़ी कथित घटना को लेकर राजनीतिक बहस तेज कर दी है. चिराग पासवान ने अपने नाम के कथित गलत इस्तेमाल और पॉडकास्ट में सामने आए गंभीर दावे को लेकर आधिकारिक शिकायत दर्ज कराने की बात कही है.

उन्होंने दिल्ली पुलिस से निष्पक्ष जांच की मांग की है। अब पूरे मामले की सच्चाई पुलिस जांच और उपलब्ध साक्ष्यों से ही सामने आएगी. तब तक किसी भी आरोप को अंतिम तथ्य मानने के बजाय संबंधित पक्ष का दावा मानकर देखना उचित होगा.

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