प्रतियोगी परीक्षाओं में पारदर्शिता की मांग को लेकर हजारों छात्रों ने पटना में मार्च निकाला, लाठीचार्ज और वाटर कैनन के बावजूद आंदोलन जारी रखा
तीसरा पक्ष ब्यूरो पटना : बिहार में प्रतियोगी परीक्षाओं की व्यवस्था को लेकर छात्रों का असंतोष एक बार फिर सड़क पर दिखाई दिया है. 25 अगस्त 2026 को पटना में AISA और विभिन्न संयुक्त छात्र संगठनों ने 70वीं BPSC परीक्षा रद्द करने, TRE 4.0 में एकल परीक्षा आयोजित करने तथा प्रतियोगी परीक्षाओं में नियमितता, पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने की मांग को लेकर मुख्यमंत्री आवास की ओर मार्च निकाला.
प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, मार्च की शुरुआत गांधी मैदान के गेट संख्या-10 से हुई.इसमें बड़ी संख्या में छात्र शामिल हुए. प्रदर्शनकारियों ने परीक्षा व्यवस्था से जुड़ी अनियमितताओं और छात्रों की शिकायतों पर सरकार से ठोस कार्रवाई की मांग की है.
70वीं BPSC परीक्षा रद्द करने की मांग
प्रदर्शन का प्रमुख मुद्दा 70वीं BPSC परीक्षा को रद्द करने की मांग रहा. छात्र संगठनों का कहना है कि प्रतियोगी परीक्षाओं से जुड़े विवादों और अनियमितताओं के बीच परीक्षा व्यवस्था में छात्रों का भरोसा बनाए रखने के लिए पारदर्शी और जवाबदेह प्रक्रिया जरूरी है.
AISA और संयुक्त छात्र संगठनों ने सरकार से मांग किया है कि परीक्षा से जुड़े सवालों और छात्रों की शिकायतों का समाधान स्पष्ट एवं विश्वसनीय तरीके से किया जाए. प्रदर्शनकारियों के अनुसार, प्रतियोगी परीक्षाएं युवाओं के भविष्य से सीधे जुड़ी होती हैं, इसलिए इनमें किसी भी तरह की अनियमितता का असर बड़ी संख्या में अभ्यर्थियों पर पड़ता है.
TRE 4.0 में एकल परीक्षा की मांग
आंदोलन का दूसरा प्रमुख मुद्दा TRE 4.0 में एकल परीक्षा आयोजित करने की मांग है.छात्र संगठनों ने शिक्षक भर्ती परीक्षा की प्रक्रिया को लेकर भी अपनी मांग सरकार के सामने रखा है.
उनका कहना है कि भर्ती प्रक्रिया स्पष्ट, नियमित और पारदर्शी होनी चाहिए, ताकि अभ्यर्थियों को परीक्षा प्रणाली को लेकर असमंजस का सामना न करना पड़े. संगठन चाहते हैं कि परीक्षा से संबंधित नियम, प्रक्रिया और जवाबदेही पहले से स्पष्ट हो तथा पूरी प्रक्रिया निष्पक्ष तरीके से संचालित की जाए.
भूख हड़ताल पर बैठे नेताओं ने भी लिया मार्च में हिस्सा
प्रेस विज्ञप्ति के मुताबिक, पिछले दो दिनों से भूख हड़ताल पर बैठे AISA नेताओं कॉमरेड मनीषा, कॉमरेड सोनू फरनाज और कॉमरेड आदर्श भी मार्च में शामिल हुए.
मार्च का नेतृत्व AISA बिहार राज्य अध्यक्ष धनंजय, राज्य सचिव दीपांकर, राज्य उपाध्यक्ष सबा आफरीन, छात्र राजद के प्रधान महासचिव अकरम खान, AYFI के राज्य अध्यक्ष शम्भुदेवा, DYFI केंद्रीय कमिटी सदस्य मनोज कुमार चंद्रवंशी सहित विभिन्न छात्र नेताओं ने किया.
इसके अलावा SFI बिहार अध्यक्ष कांति कुमारी, देवदत्त कुमार, जय प्रकाश तथा AISA और RYA से जुड़े कई कार्यकर्ताओं की भागीदारी भी प्रेस विज्ञप्ति में बताई गई है.
लाठीचार्ज और वाटर कैनन के बावजूद जारी रहा प्रदर्शन
प्रेस विज्ञप्ति में दावा किया गया है कि मार्च के दौरान पुलिस-प्रशासन ने छात्रों को रोकने के लिए लाठीचार्ज और वाटर कैनन का इस्तेमाल किया. संगठन का कहना है कि इसके बावजूद छात्रों ने अपना आंदोलन जारी रखा.
AISA ने आरोप लगाया कि छात्र शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांग मुख्यमंत्री तक पहुंचाना चाहते थे, लेकिन उनकी आवाज सुनने के बजाय आंदोलन को बलपूर्वक रोकने का प्रयास किया गया.
हालांकि, इन आरोपों और कार्रवाई के संबंध में इस प्रेस विज्ञप्ति के अलावा प्रशासन या पुलिस का पक्ष यहां उपलब्ध नहीं है.इसलिए पूरे घटनाक्रम का संतुलित आकलन करने के लिए आधिकारिक प्रशासनिक बयान और स्वतंत्र मीडिया रिपोर्टों को भी देखना जरूरी होगा.
छात्र संगठनों का आंदोलन जारी रखने का ऐलान
AISA ने कहा है कि जब तक छात्रों की मांगों पर ठोस कार्रवाई नहीं होती, तब तक आंदोलन जारी रहेगा. इससे संकेत मिलता है कि परीक्षा व्यवस्था को लेकर छात्र संगठनों और सरकार के बीच टकराव आगे भी जारी रह सकता है.
बिहार में बड़ी संख्या में युवा सरकारी नौकरियों की प्रतियोगी परीक्षाओं पर निर्भर हैं. ऐसे में परीक्षा की तारीख, प्रक्रिया, परिणाम और भर्ती की पारदर्शिता जैसे मुद्दे केवल प्रशासनिक विषय नहीं हैं, बल्कि लाखों अभ्यर्थियों के भविष्य से जुड़े सवाल भी हैं.
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परीक्षा व्यवस्था में भरोसा बहाल करना बड़ी चुनौती
25 अगस्त के मार्च से एक महत्वपूर्ण सवाल फिर सामने आया है कि,क्या बिहार की प्रतियोगी परीक्षा व्यवस्था अभ्यर्थियों के बीच पर्याप्त भरोसा पैदा कर पा रही है?
सरकार के लिए चुनौती केवल किसी एक परीक्षा से जुड़े विवाद का समाधान करना नहीं है. परीक्षा प्रक्रिया में नियमितता, पारदर्शिता और जवाबदेही को मजबूत करना भी उतना ही महत्वपूर्ण है.यदि छात्रों की शिकायतों का समय पर और स्पष्ट समाधान होता है, तो विवादों और आंदोलनों की स्थिति को कम किया जा सकता है.
दूसरी ओर, छात्र संगठनों की जिम्मेदारी भी है कि वे अपने आरोपों और मांगों को प्रमाणों के साथ सामने रखें तथा शांतिपूर्ण लोकतांत्रिक माध्यमों से अपनी बात रखें.
निष्कर्ष
25 अगस्त 2026 का पटना छात्र मार्च बिहार की प्रतियोगी परीक्षा व्यवस्था को लेकर बढ़ते असंतोष को सामने लाता है. AISA और संयुक्त छात्र संगठनों ने 70वीं BPSC परीक्षा रद्द करने, TRE 4.0 में एकल परीक्षा तथा सभी परीक्षाओं में नियमितता, पारदर्शिता और जवाबदेही की मांग उठाई है.
अब आगे की दिशा सरकार और प्रशासन की प्रतिक्रिया पर निर्भर करेगी. यदि छात्रों की शिकायतों पर समयबद्ध और पारदर्शी तरीके से कार्रवाई होती है, तो परीक्षा व्यवस्था में भरोसा मजबूत हो सकता है.वहीं, मांगों पर समाधान नहीं निकलने की स्थिति में छात्र आंदोलन के आगे बढ़ने की संभावना बनी हुई है.
स्रोत: यह लेख 25 अगस्त 2026 को जारी AISA एवं संयुक्त छात्र संगठनों की प्रेस विज्ञप्ति में उपलब्ध दावों और विवरणों के आधार पर तैयार किया गया है.

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