पटना राजभवन मार्च पर वाटर कैनन के इस्तेमाल पर भाकपा माले नाराज

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Ajit Kumar

बिहार
पटना राजभवन मार्च के दौरान तेजस्वी यादव और प्रदर्शनकारियों पर पुलिस कार्रवाई

छात्र आंदोलन के समर्थन में तेजस्वी यादव के मार्च पर पुलिस कार्रवाई को लेकर भाकपा माले ने सरकार की आलोचना की

तीसरा पक्ष ब्यूरो : पटना में 19 अगस्त 2026 को राष्ट्रीय जनता दल की ओर से नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव के नेतृत्व में निकाले गए राजभवन मार्च को लेकर राजनीतिक प्रतिक्रिया तेज हो गई है.भाकपा माले ने मार्च का समर्थन करते हुए प्रदर्शन के दौरान वाटर कैनन के इस्तेमाल, पुलिसिया बल प्रयोग और प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिए जाने की निंदा की है.

भाकपा माले के राज्य सचिव कुणाल ने कहा कि बिहार में छात्रों का आंदोलन लगातार जारी है. पार्टी के अनुसार, छात्र विभिन्न मांगों को लेकर आंदोलन कर रहे हैं और उनके सवालों पर सरकार को संवाद के माध्यम से समाधान निकालना चाहिए.

राजभवन मार्च को भाकपा माले का समर्थन

आरजेडी द्वारा निकाले गए राजभवन मार्च को भाकपा माले ने छात्रों के मुद्दों से जोड़ते हुए समर्थन दिया.पार्टी का कहना है कि नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव छात्रों के आंदोलन और उनके खिलाफ कथित पुलिसिया दमन के विरोध में राजभवन मार्च कर रहे थे.

भाकपा माले के राज्य सचिव कुणाल ने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में लोगों और राजनीतिक दलों को अपनी मांगों तथा असहमति को शांतिपूर्ण तरीके से सामने रखने का अधिकार है.पार्टी ने मार्च के दौरान पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए इसे लोकतांत्रिक अधिकारों के संदर्भ में गंभीर विषय बताया.

वाटर कैनन और बल प्रयोग पर उठाए सवाल

भाकपा माले ने आरोप लगाया कि राजभवन मार्च के दौरान पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को नियंत्रित करने के लिए वाटर कैनन का इस्तेमाल किया और बल प्रयोग किया। पार्टी ने प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिए जाने पर भी आपत्ति जताई.

कुणाल ने कहा कि छात्रों और विपक्षी नेताओं की ओर से उठाए जा रहे सवालों का जवाब कार्रवाई या दमन के माध्यम से नहीं, बल्कि संवाद और संवैधानिक प्रक्रिया के जरिए दिया जाना चाहिए.

यहां यह स्पष्ट करना जरूरी है कि पुलिस कार्रवाई को लेकर भाकपा माले ने अपनी राजनीतिक प्रतिक्रिया और आरोप सामने रखे हैं.इन आरोपों के संबंध में संबंधित प्रशासन या पुलिस का आधिकारिक पक्ष अलग से सामने आना आवश्यक है.

छात्रों के आंदोलन और AK-47 मामले का मुद्दा

भाकपा माले ने अपने बयान में पिछले दिनों छात्रों के आंदोलन के दौरान सामने आए कथित AK-47 इस्तेमाल के मामले को भी प्रमुखता से उठाया.पार्टी के राज्य सचिव कुणाल ने कहा कि इतनी गंभीर घटना के बावजूद अब तक ठोस कार्रवाई नहीं होने पर सरकार को जवाब देना चाहिए.

पार्टी ने मांग की है कि इस मामले की निष्पक्ष जांच हो और यदि जांच में किसी व्यक्ति की भूमिका सामने आती है तो उसके खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई सुनिश्चित की जाए.

AK-47 से जुड़े आरोप की गंभीरता को देखते हुए जांच की आधिकारिक स्थिति और प्रशासन की ओर से सामने आने वाले तथ्यों को ही अंतिम आधार माना जाना चाहिए.

सरकार से संवाद और समाधान की मांग

भाकपा माले ने बिहार सरकार से छात्रों की मांगों पर तत्काल संवाद शुरू करने की मांग की है.पार्टी का कहना है कि आंदोलन कर रहे छात्रों के सवालों को समझने और उनकी जायज मांगों पर समाधान तलाशने की जरूरत है.

पार्टी ने यह भी मांग की कि आंदोलनों के दमन पर रोक लगाई जाए और छात्रों की समस्याओं का समाधान लोकतांत्रिक तथा संवैधानिक तरीके से किया जाए.

इस पूरे घटनाक्रम में सबसे महत्वपूर्ण सवाल यही है कि छात्र जिन मुद्दों को लेकर सड़क पर हैं, उन पर सरकार और आंदोलनकारी पक्ष के बीच संवाद कब और किस स्तर पर शुरू होता है. किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था में विरोध और असहमति को सुनने के साथ-साथ कानून-व्यवस्था बनाए रखना प्रशासन की जिम्मेदारी होती है.

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पटना मार्च के बाद बढ़ी राजनीतिक सरगर्मी

तेजस्वी यादव के नेतृत्व में हुए राजभवन मार्च और उस पर भाकपा माले की प्रतिक्रिया से बिहार की राजनीति में छात्र आंदोलन का मुद्दा एक बार फिर केंद्र में आ गया है.विपक्षी दल सरकार से छात्रों की मांगों पर जवाब और कार्रवाई की मांग कर रहे हैं, जबकि प्रशासन के लिए चुनौती कानून-व्यवस्था बनाए रखते हुए प्रदर्शनकारियों की शिकायतों को संबोधित करने की है.

आने वाले समय में सरकार की ओर से छात्रों की मांगों, कथित AK-47 मामले और राजभवन मार्च के दौरान हुई पुलिस कार्रवाई पर क्या आधिकारिक कदम उठाए जाते हैं, यह इस पूरे विवाद की दिशा तय करने वाला महत्वपूर्ण पहलू होगा.

निष्कर्ष

पटना के राजभवन मार्च को लेकर भाकपा माले ने स्पष्ट रूप से छात्रों के पक्ष में अपना समर्थन जताया है और वाटर कैनन तथा पुलिसिया बल प्रयोग पर सवाल उठाए हैं. पार्टी ने सरकार से टकराव के बजाय संवाद का रास्ता अपनाने और छात्रों की मांगों का संवैधानिक तरीके से समाधान करने की अपील की है. अब निगाहें सरकार और प्रशासन की अगली कार्रवाई पर हैं.

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