स्मिथ इंटर कॉलेज के विद्यार्थियों ने विज्ञान व गणित के नियमित शिक्षकों की मांग और अतिरिक्त फीस के विरोध में प्रदर्शन किया
तीसरा पक्ष ब्यूरो यूपीः उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ जिले के अजमतगढ़ स्थित स्मिथ इंटर कॉलेज में 18 अगस्त 2026 को छात्र-छात्राओं के प्रदर्शन ने स्कूल की शैक्षणिक व्यवस्था और फीस से जुड़े सवालों को सामने ला दिया. विद्यार्थियों ने स्कूल के बाहर बैठकर भौतिक विज्ञान, रसायन विज्ञान और गणित जैसे महत्वपूर्ण विषयों में नियमित शिक्षकों की कमी का मुद्दा उठाया. साथ ही, निजी शिक्षक की व्यवस्था और अन्य मदों के नाम पर अतिरिक्त शुल्क लिए जाने को लेकर भी छात्रों ने आपत्ति जताई.
प्रदर्शन के दौरान विद्यार्थियों ने क्लास छोड़कर स्कूल गेट पर अपनी मांगें रखीं. उनका कहना था कि बोर्ड परीक्षाओं की तैयारी के महत्वपूर्ण समय में यदि प्रमुख विषयों के नियमित शिक्षक उपलब्ध नहीं होंगे, तो इसका सीधा असर उनकी पढ़ाई और परीक्षा परिणाम पर पड़ सकता है.
छात्रों की सबसे बड़ी शिकायत क्या है?
विद्यार्थियों के अनुसार स्कूल में भौतिक विज्ञान और रसायन विज्ञान के नियमित शिक्षकों की कमी लंबे समय से बनी हुई है. कुछ रिपोर्टों में रसायन और भौतिक विज्ञान के शिक्षकों की कमी को कई वर्षों पुरानी समस्या बताया गया है. गणित के शिक्षक की उपलब्धता को लेकर भी छात्रों ने सवाल उठाए.
विज्ञान और गणित इंटरमीडिएट स्तर पर ऐसे विषय हैं, जिनमें नियमित कक्षा, अभ्यास और शिक्षक के मार्गदर्शन की महत्वपूर्ण भूमिका होती है.ऐसे में विद्यार्थियों का तर्क है कि केवल परीक्षा के नजदीक वैकल्पिक व्यवस्था करने के बजाय स्थायी रूप से शिक्षकों की नियुक्ति होनी चाहिए.
प्रदर्शन के दौरान छात्रों ने अपनी नाराजगी को नारे के जरिए भी जाहिर किया.उनका एक नारा था, बिना केमिस्ट्री टीचर के हमारा भविष्य एसिड की तरह जल रहा है.यह नारा छात्रों की उस चिंता को दर्शाता है कि विषय विशेषज्ञ शिक्षक नहीं होने से उनकी तैयारी प्रभावित हो सकती है.
फीस वसूली को लेकर भी उठे सवाल
शिक्षकों की कमी के साथ-साथ विद्यार्थियों ने फीस से जुड़ा मुद्दा भी उठाया. छात्रों का आरोप है कि निजी शिक्षक की व्यवस्था के नाम पर प्रति विद्यार्थी 50 रुपये लिए जा रहे हैं.कुछ रिपोर्टों में अतिरिक्त 500 रुपये तथा मेंटेनेंस और लाइब्रेरी जैसे मदों से जुड़ी राशि का भी उल्लेख किया गया है.
हालांकि, फीस को लेकर छात्रों के आरोप और स्कूल प्रबंधन का पक्ष अलग-अलग है.स्कूल की ओर से अतिरिक्त फीस वसूली के आरोपों से इनकार करते हुए केवल सरकारी फीस लिए जाने की बात कही गई है.
यही अंतर इस पूरे मामले में पारदर्शिता की जरूरत को सामने लाता है.यदि कोई अतिरिक्त शुल्क लिया जा रहा है, तो उसका उद्देश्य, राशि और स्वीकृति स्पष्ट होनी चाहिए. वहीं यदि अतिरिक्त शुल्क नहीं लिया गया है, तो छात्रों और अभिभावकों के सामने फीस का पूरा विवरण सार्वजनिक करने से विवाद को आसानी से दूर किया जा सकता है.
प्रदर्शन के दौरान क्या हुआ?
छात्रों के प्रदर्शन के दौरान कुछ समय के लिए स्कूल परिसर के बाहर तनाव की स्थिति भी बनी.विद्यार्थियों का आरोप था कि एक महिला शिक्षक ने उन्हें वापस कक्षा में जाने के लिए कहा.इसके बावजूद छात्र अपनी मांगों पर कायम रहे.
उनका कहना था कि वे पढ़ाई बाधित करना नहीं चाहते, बल्कि ऐसी व्यवस्था चाहते हैं जिसमें उन्हें नियमित शिक्षक मिलें और परीक्षा की तैयारी बेहतर तरीके से हो सके.
पुलिस और स्कूल प्रबंधन ने विद्यार्थियों को समझाकर वापस कक्षाओं में भेजा. आजमगढ़ पुलिस के अनुसार स्थिति शांत रही और शिक्षण कार्य दोबारा सुचारू हो गया.
स्कूल प्रबंधन ने क्या आश्वासन दिया?
प्रदर्शन के बाद रसायन विज्ञान के शिक्षक की व्यवस्था 48 घंटे के भीतर करने का आश्वासन दिए जाने की बात सामने आई है. इससे छात्रों की तत्काल मांगों में से एक पर समाधान की उम्मीद बनी है.
फीस के मामले में स्कूल प्रबंधन ने अतिरिक्त शुल्क लेने के आरोपों को स्वीकार नहीं किया है. दूसरी ओर, छात्रों की ओर से यह दावा किया गया कि शिक्षा विभाग द्वारा पहले कुछ राशि वापस करने के निर्देश दिए गए थे, लेकिन संबंधित राशि अभी तक वापस नहीं मिली.
इसलिए पूरे मामले में केवल मौखिक आश्वासन पर्याप्त नहीं होगा. फीस से संबंधित रिकॉर्ड, शिक्षक उपलब्धता और विभागीय निर्देशों की स्थिति को स्पष्ट करना जरूरी है.
क्या यह सिर्फ एक स्कूल की समस्या है?
आजमगढ़ के स्मिथ इंटर कॉलेज का मामला केवल एक विद्यालय तक सीमित सवाल नहीं उठाता.उत्तर प्रदेश के कई सरकारी और सहायता प्राप्त विद्यालयों में विषयवार शिक्षकों की उपलब्धता को लेकर समय-समय पर सवाल उठते रहे हैं.
विशेष रूप से गणित और विज्ञान जैसे विषयों में शिक्षकों की कमी विद्यार्थियों की शैक्षणिक तैयारी को प्रभावित कर सकती है.जब विद्यार्थी बोर्ड परीक्षा की तैयारी कर रहे हों, तब लंबे समय तक शिक्षक का उपलब्ध न होना उनके लिए अतिरिक्त दबाव पैदा करता है.
इसी तरह फीस से जुड़े मामलों में भी स्पष्टता जरूरी है.स्कूल और विद्यार्थियों के बीच यदि शुल्क को लेकर भ्रम पैदा होता है, तो उसका समाधान पारदर्शी फीस संरचना और लिखित जानकारी से किया जाना चाहिए.
Gen Alpha छात्रों का बढ़ता सवाल
आज की स्कूली पीढ़ी डिजिटल दौर में बड़ी हो रही है. इसलिए विद्यार्थी केवल पढ़ाई तक सीमित नहीं रहना चाहते, बल्कि अपनी समस्याओं को सार्वजनिक रूप से उठाने और जवाब मांगने का तरीका भी जानते हैं.
आजमगढ़ में छात्रों का यह प्रदर्शन इसी बदलते छात्र व्यवहार का उदाहरण माना जा सकता है.हालांकि किसी भी प्रदर्शन का उद्देश्य पढ़ाई को लंबे समय तक बाधित करना नहीं होना चाहिए, लेकिन विद्यार्थियों की शिकायतों को नजरअंदाज करना भी उचित नहीं है.
छात्रों की मांग का मूल सवाल सरल है,जब उनसे बेहतर परिणाम की उम्मीद की जाती है, तो उन्हें पर्याप्त शिक्षक और गुणवत्तापूर्ण पढ़ाई क्यों नहीं मिलनी चाहिए?
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अब आगे क्या होना चाहिए?
इस मामले में स्थायी समाधान के लिए शिक्षा विभाग और स्कूल प्रबंधन को कुछ बिंदुओं पर स्पष्ट कार्रवाई करनी चाहिए.
पहला, भौतिक विज्ञान, रसायन विज्ञान और गणित जैसे विषयों में नियमित शिक्षकों की उपलब्धता सुनिश्चित की जाए.दूसरा, यदि किसी विषय के लिए वैकल्पिक शिक्षक की व्यवस्था करनी पड़े तो उसे स्पष्ट और निर्धारित समयसीमा के भीतर किया जाए.
तीसरा, विद्यार्थियों से ली जाने वाली हर फीस का लिखित विवरण सार्वजनिक किया जाए.चौथा, यदि पहले किसी राशि की वापसी का निर्देश दिया गया है तो उसकी वास्तविक स्थिति छात्रों और अभिभावकों को बताई जाए.
सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि छात्रों को अपनी पढ़ाई के अधिकार के लिए बार-बार स्कूल गेट पर प्रदर्शन करने की जरूरत न पड़े.
निष्कर्ष
अजमतगढ़ के स्मिथ इंटर कॉलेज में हुआ छात्र प्रदर्शन शिक्षा व्यवस्था के सामने मौजूद एक महत्वपूर्ण सवाल को सामने लाता है,कि क्या विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के लिए जरूरी शिक्षक और पारदर्शी व्यवस्था मिल रही है?
शिक्षक की कमी हो या फीस से जुड़ा विवाद, दोनों का समाधान संवाद, पारदर्शिता और प्रशासनिक जवाबदेही से संभव है. रसायन विज्ञान के शिक्षक की 48 घंटे में व्यवस्था करने का आश्वासन तत्काल राहत दे सकता है, लेकिन स्थायी समाधान नियमित और पर्याप्त शिक्षक उपलब्ध कराने से ही होगा.
विद्यार्थियों की आवाज को केवल विरोध के रूप में देखने के बजाय उनकी शिकायतों की जांच और समाधान पर ध्यान देना जरूरी है. आखिरकार, स्कूल का उद्देश्य केवल कक्षाएं चलाना नहीं, बल्कि छात्रों को बेहतर भविष्य के लिए तैयार करना है.
न्यूज़ स्रोत: आजमगढ़ पुलिस की आधिकारिक जानकारी, स्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स और छात्रों/स्कूल प्रबंधन के सामने आए बयानों पर आधारित

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