तेजस्वी यादव ने दशरथ मांझी को किया नमन, भारत रत्न की मांग

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Ajit Kumar

बिहार
पटना में दशरथ मांझी की पुण्यतिथि कार्यक्रम में तेजस्वी यादव और राजद नेता

राजद कार्यालय में 19वीं पुण्यतिथि पर श्रद्धांजलि, गरीबों और मुसहर समाज के मुद्दों पर तेजस्वी का सरकार पर हमला

तीसरा पक्ष ब्यूरो पटना, 17 अगस्त 2026 : राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के राज्य कार्यालय स्थित कर्पूरी सभागार में पर्वत पुरुष दशरथ मांझी की 19वीं पुण्यतिथि मनाई गई. कार्यक्रम में पार्टी के नेताओं और कार्यकर्ताओं की बड़ी संख्या में मौजूदगी रही. इस अवसर पर दशरथ मांझी के जीवन, संघर्ष और उनके संकल्प को याद करते हुए उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की गई.

कार्यक्रम की अध्यक्षता राजद अनुसूचित जाति प्रकोष्ठ के दीपक कुमार मांझी ने की, जबकि संचालन मंटू मांझी ने किया.कार्यक्रम की शुरुआत से पहले नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी प्रसाद यादव समेत पार्टी के वरिष्ठ नेताओं ने दशरथ मांझी के तैलचित्र पर माल्यार्पण कर उन्हें श्रद्धांजलि दी और उनके विचारों एवं संकल्पों को आगे बढ़ाने का संकल्प लिया.

दशरथ मांझी के संघर्ष को तेजस्वी यादव ने बताया मिसाल

सभा को संबोधित करते हुए तेजस्वी प्रसाद यादव ने दशरथ मांझी को नमन किया और कहा कि उन्होंने ऐसा काम करके दिखाया, जिसे करना किसी एक व्यक्ति के लिए आसान नहीं था. उनके मुताबिक, दशरथ मांझी ने पहाड़ काटकर रास्ता बनाने के अपने संकल्प को पूरा किया और समाज के सामने दृढ़ इच्छाशक्ति की मिसाल पेश की.

तेजस्वी यादव ने दशरथ मांझी के उस संकल्प का उल्लेख किया, जिसमें उन्होंने कठिन से कठिन बाधा के सामने भी पीछे नहीं हटने की भावना व्यक्त की थी. उन्होंने कहा कि दशरथ मांझी का जीवन यह संदेश देता है कि मजबूत इच्छाशक्ति और निरंतर प्रयास से बड़ी से बड़ी चुनौती का सामना किया जा सकता है.

तेजस्वी ने आरोप लगाया कि आज कई लोग और राजनीतिक दल दशरथ मांझी के नाम का इस्तेमाल राजनीति में करते हैं, लेकिन उनके अनुसार, उनके समाज के हित में अपेक्षित काम नहीं किया गया. उन्होंने भाजपा, जदयू और एनडीए के नेताओं पर भी दलित और वंचित समाज से जुड़े मुद्दों को लेकर निशाना साधा.

लालू प्रसाद के कार्यकाल का किया उल्लेख

अपने संबोधन में तेजस्वी यादव ने राजद अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव के कार्यकाल का उल्लेख करते हुए कहा कि उन्होंने गरीब, वंचित, दलित और महादलित समाज को आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया. उन्होंने शिक्षा, सम्मान और सामाजिक बराबरी को जरूरी बताते हुए कहा कि सरकार में बैठे लोगों को समाज के वंचित वर्गों के प्रति भेदभाव की नीति समाप्त करनी चाहिए.

तेजस्वी यादव ने दावा किया कि लालू प्रसाद के कार्यकाल में दलित समाज के लिए पटना में आवासीय सुविधाओं और गांवों तथा शहरों में पक्के मकान उपलब्ध कराने की दिशा में काम किया गया. उन्होंने शिक्षा को सामाजिक बदलाव का महत्वपूर्ण माध्यम बताते हुए गरीब और दलित परिवारों के बच्चों के लिए बेहतर अवसर उपलब्ध कराने पर जोर दिया.

गरीबों के विस्थापन को लेकर सरकार पर हमला

तेजस्वी यादव ने बिहार की मौजूदा सरकार पर गरीबों के साथ अन्याय करने का आरोप लगाया.उन्होंने कहा कि जहां गरीबों को शुद्ध पानी, भोजन, दवाई, रोजगार और बुनियादी सुविधाओं की जरूरत है, वहां सरकार की प्राथमिकता अलग दिखाई देती है.

उन्होंने राजद और एनडीए सरकार की नीतियों के बीच अंतर बताते हुए कहा कि उनके अनुसार, राजद की राजनीति गरीबों और वंचितों को बसाने की रही है, जबकि मौजूदा सरकार पर उन्होंने गरीबों को उजाड़ने का आरोप लगाया.

तेजस्वी यादव ने कहा कि यदि गरीबों और मुसहर समाज के लोगों के घरों पर बुलडोजर चलाया जाता है, तो वे उनके साथ खड़े रहेंगे. उन्होंने सरकार से यह मांग भी की कि किसी भी परिवार को विस्थापित करने से पहले उसके पुनर्वास की व्यवस्था सुनिश्चित की जानी चाहिए.

पटना में दशरथ मांझी की प्रतिमा और आश्रम की मांग

कार्यक्रम के दौरान तेजस्वी यादव ने दशरथ मांझी के सम्मान में कई मांगें भी रखीं. उन्होंने पटना के किसी प्रमुख चौराहे पर दशरथ मांझी की आदमकद प्रतिमा स्थापित करने की मांग की.

इसके साथ ही उन्होंने दशरथ मांझी के नाम पर एक आश्रम बनाए जाने की भी मांग रखी, ताकि उनके जीवन, संघर्ष और सामाजिक संदेश को आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाया जा सके.

तेजस्वी यादव ने भारत सरकार से दशरथ मांझी को उनके योगदान के लिए भारत रत्न दिए जाने की मांग भी की. उनका कहना था कि दशरथ मांझी का संघर्ष केवल व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं था, बल्कि यह सामाजिक संकल्प और दृढ़ इच्छाशक्ति का प्रतीक है.

मंगनी लाल मंडल ने संकल्प और इच्छाशक्ति पर दिया जोर

राजद के प्रदेश अध्यक्ष मंगनी लाल मंडल ने भी कार्यक्रम को संबोधित किया.उन्होंने कहा कि दशरथ मांझी के संकल्प और उनके कार्यों को केवल याद करने के बजाय उन्हें जमीन पर उतारने की जरूरत है.

उन्होंने दशरथ मांझी के जीवन से सीख लेने की बात कही और कहा कि चाहे पर्वत कितना भी ऊंचा क्यों न हो, उसे पार करने के लिए संकल्प और उसे पूरा करने के लिए इच्छाशक्ति जरूरी होती है.

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कई वरिष्ठ राजद नेता रहे मौजूद

कार्यक्रम में राजद के कई वरिष्ठ नेता और पदाधिकारी मौजूद रहे. इनमें प्रदेश अध्यक्ष मंगनी लाल मंडल, राष्ट्रीय उपाध्यक्ष उदय नारायण चौधरी, पूर्व मंत्री शिवचन्द्र राम, आलोक कुमार मेहता, कुमार सर्वजीत, समीर कुमार महासेठ, रणविजय साहू, गौतम कृष्ण, शक्ति सिंह यादव, समता देवी, एजाज अहमद, सारिका पासवान, निर्भय अम्बेडकर, नन्दू यादव, जेम्स यादव, दीपक मांझी, मंटू मांझी, सदन मोहन मांझी, लालू मांझी, राम लगन भूईया और चन्देश्वर प्रसाद सिंह सहित कई नेता शामिल थे.

सभी नेताओं ने दशरथ मांझी के तैलचित्र पर माल्यार्पण कर श्रद्धांजलि अर्पित की और उनके विचारों तथा सामाजिक संकल्पों को आगे बढ़ाने की प्रतिबद्धता जताई.

दशरथ मांझी की विरासत का राजनीतिक और सामाजिक संदर्भ

दशरथ मांझी का नाम बिहार के गया जिले के गेहलौर क्षेत्र से जुड़े उस संघर्ष के कारण देशभर में जाना जाता है, जिसमें उन्होंने पहाड़ काटकर रास्ता बनाने का असाधारण प्रयास किया.उनका जीवन सामाजिक बाधाओं के सामने व्यक्तिगत संकल्प और श्रम की शक्ति का प्रतीक बन चुका है.

उनकी पुण्यतिथि पर आयोजित यह कार्यक्रम केवल श्रद्धांजलि तक सीमित नहीं रहा.तेजस्वी यादव के भाषण में दशरथ मांझी की विरासत को दलित, मुसहर और गरीब समुदायों के वर्तमान सामाजिक-राजनीतिक मुद्दों से जोड़ने की कोशिश दिखाई दी. साथ ही भारत रत्न, प्रतिमा और आश्रम जैसी मांगों के जरिए दशरथ मांझी की विरासत को संस्थागत सम्मान देने का मुद्दा भी सामने आया.

हालांकि, कार्यक्रम में लगाए गए राजनीतिक आरोप राजद नेताओं के बयान हैं. इन आरोपों पर सरकार या संबंधित पक्ष की प्रतिक्रिया इस उपलब्ध सामग्री में शामिल नहीं है.इसलिए इन्हें राजद के दावे और राजनीतिक आरोप के रूप में ही देखा जाना चाहिए.

दशरथ मांझी की पुण्यतिथि पर राजद का यह आयोजन एक तरफ उनके संघर्ष और संकल्प को याद करने का अवसर बना, वहीं दूसरी तरफ तेजस्वी यादव ने इसके जरिए गरीबों, दलितों और मुसहर समाज से जुड़े मुद्दों को राजनीतिक बहस के केंद्र में रखने की कोशिश की.अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि दशरथ मांझी को भारत रत्न देने, पटना में उनकी प्रतिमा स्थापित करने और उनके नाम पर आश्रम बनाने जैसी मांगों पर सरकार की ओर से क्या कदम उठाए जाते हैं.

निष्कर्ष

दशरथ मांझी की 19वीं पुण्यतिथि पर आयोजित राजद के कार्यक्रम में उनके संघर्ष, संकल्प और सामाजिक योगदान को याद किया गया। तेजस्वी यादव ने दशरथ मांझी की विरासत को गरीब, दलित और मुसहर समाज के अधिकारों से जोड़ते हुए सरकार की नीतियों पर सवाल उठाए. साथ ही पटना में उनकी आदमकद प्रतिमा, उनके नाम पर आश्रम और भारत रत्न देने की मांग उठाई गई। हालांकि, इन मांगों और सरकार पर लगाए गए राजनीतिक आरोपों पर अंतिम निर्णय और संबंधित पक्ष की प्रतिक्रिया अलग विषय है. इतना जरूर है कि दशरथ मांझी का जीवन आज भी यह संदेश देता है कि मजबूत इच्छाशक्ति, मेहनत और संकल्प से असंभव दिखाई देने वाली बाधाओं को भी चुनौती दी जा सकती .

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