फुलवारी शरीफ में आयोजित कार्यक्रम में शिक्षा, रोजगार और महिला अधिकारों से जुड़े मुद्दों पर चर्चा हुई
तीसरा पक्ष ब्यूरो पटना, 13 सितंबर: फुलवारी शरीफ में तहरीक-ए-निस्वां की ओर से शिक्षा व रोजगार का अधिकार और मुस्लिम महिलाएं के विषय पर एक विचार गोष्ठी का आयोजन किया गया. कार्यक्रम में बड़ी संख्या में महिलाओं ने भाग लिया.गोष्ठी में मुस्लिम महिलाओं की शिक्षा और रोजगार तक पहुंच के साथ-साथ महिला पत्रकारों और छात्राओं के खिलाफ कथित पुलिस कार्रवाई का मुद्दा भी उठाया गया.
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए तहरीक-ए-निस्वां की राष्ट्रीय संयोजक डॉ. फरहत बानो ने कहा कि भारत का संविधान जाति, धर्म, लिंग या वर्ग के आधार पर भेदभाव की इजाजत नहीं देता. उनके अनुसार, अल्पसंख्यक और कमजोर समुदायों की लड़कियों को शिक्षा और रोजगार हासिल करने में कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ता है.
फरहत बानो ने आरोप लगाया कि सांप्रदायिक राजनीति के कारण मुस्लिम समुदाय में डर का माहौल पैदा हो रहा है, जिसका असर महिलाओं की शिक्षा पर भी पड़ रहा है.उन्होंने कहा कि डर के कारण कई महिलाएं और लड़कियां घर से बाहर निकलने तथा शिक्षा हासिल करने में पीछे रह जाती हैं.
उन्होंने स्कूलों के बंद होने और स्कूलों के विलय का भी मुद्दा उठाया.फरहत बानो के अनुसार, स्कूलों के मर्जर के कारण कुछ स्थानों पर लड़कियों को पढ़ाई छोड़नी पड़ी है.हालांकि, प्रेस विज्ञप्ति में इस संबंध में किसी विशिष्ट स्कूल या आधिकारिक सरकारी आंकड़े का उल्लेख नहीं किया गया है.

महिला शिक्षा के इतिहास का किया उल्लेख
ऐपवा की राष्ट्रीय महासचिव मीना तिवारी ने महिला शिक्षा के इतिहास का उल्लेख करते हुए फातिमा शेख और सावित्रीबाई फुले के योगदान को याद किया. उन्होंने कहा कि देश की शुरुआती महिला शिक्षिकाओं को अनेक कठिनाइयों का सामना करना पड़ा, लेकिन उन्होंने शिक्षा के अपने उद्देश्य से पीछे हटने से इनकार किया.
मीना तिवारी ने 20वीं सदी में बिहार में शिक्षा के क्षेत्र में काम करने वाली महिलाओं का भी उल्लेख किया. उन्होंने रुकैया सखावत हुसैन सहित कई महिलाओं के प्रयासों की चर्चा की. उनके अनुसार, पटना में लड़कियों के लिए शुरुआती स्कूलों में से एक रशीद-उन-निसा द्वारा खोला गया था, जहां अलग-अलग धर्मों की लड़कियां पढ़ती थीं.
महिला पत्रकारों और छात्राओं पर कार्रवाई का विरोध
गोष्ठी के दौरान महिला पत्रकारों और छात्राओं से जुड़े कुछ मामलों को लेकर भी विरोध दर्ज कराया गया.प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, दिल्ली की महिला पत्रकारों शाहीन खान और नफीसा खान के साथ पुलिस थाने में कथित मारपीट, पटना में छात्र आंदोलन के दौरान सबा आफरीन की गिरफ्तारी और सहारनपुर में पत्रकार हुदा जरीवाला की गिरफ्तारी का विरोध किया गया.
आयोजकों ने आरोप लगाया कि इन महिलाओं को उनकी मुस्लिम पहचान के कारण प्रताड़ित किया गया.ये आरोप कार्यक्रम में वक्ताओं और आयोजकों की ओर से लगाए गए हैं; प्रेस विज्ञप्ति में संबंधित मामलों पर पुलिस या प्रशासन का पक्ष उपलब्ध नहीं कराया गया है.
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बड़ी संख्या में महिलाओं की भागीदारी
कार्यक्रम को अफ्शां जबीं, नसरीन बानो, गुलशन खातून, आब्दा खातून, अनुशा मंसूर, अनीता सिन्हा, डॉ. मीरा दत्त, अनुराधा और प्रिया गुप्ता ने भी संबोधित किया.
कार्यक्रम का संचालन अफ्शां जबीं और नसरीन बानो ने किया. प्रेस विज्ञप्ति तहरीक-ए-निस्वां, पटना और ऐपवा राज्य कार्यालय की ओर से जारी की गई.
गोष्ठी में मुख्य रूप से मुस्लिम महिलाओं की शिक्षा और रोजगार के अवसरों, महिला अधिकारों तथा सार्वजनिक जीवन में महिलाओं की भागीदारी से जुड़े सवालों को उठाया गया. वक्ताओं ने शिक्षा को महिलाओं के सामाजिक और आर्थिक सशक्तिकरण का महत्वपूर्ण माध्यम बताते हुए भेदभाव और कथित दमन के खिलाफ आवाज उठाने की अपील की.

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