UPI चार्ज और टैक्स पर तेजस्वी यादव का मोदी सरकार पर हमला

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Ajit Kumar

बिहार
तेजस्वी यादव ने UPI चार्ज और टैक्स को लेकर केंद्र सरकार पर सवाल उठाए

तेजस्वी ने बैंकिंग शुल्क, टैक्स और नोटबंदी को लेकर सरकार की नीतियों पर उठाए सवाल

तीसरा पक्ष ब्यूरो पटना : बिहार के नेता प्रतिपक्ष और राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के कार्यकारी अध्यक्ष तेजस्वी यादव ने डिजिटल भुगतान, बैंकिंग सेवाओं और विभिन्न करों को लेकर केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार पर निशाना साधा है. तेजस्वी यादव ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक पोस्ट में दावा किया कि आम लोगों पर बैंकिंग शुल्क और प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष करों का बोझ लगातार बढ़ रहा है.

उनके बयान में UPI, बैंक खाते, ATM, SMS अलर्ट, न्यूनतम बैलेंस, खरीदारी पर लगने वाले टैक्स, आयकर, GST और विभिन्न सेस का उल्लेख किया गया. तेजस्वी ने इसे केंद्र सरकार की Digital India और Cashless Economy की नीतियों से जोड़ते हुए सवाल उठाया कि डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देने के साथ आम लोगों पर आर्थिक बोझ क्यों बढ़ाया जा रहा है.

UPI चार्ज को लेकर क्या है तेजस्वी का दावा?

तेजस्वी यादव ने अपनी पोस्ट में सीधे तौर पर कहा कि UPI पर चार्ज लगाया जा रहा है. हालांकि, मौजूदा नियम को समझना जरूरी है.

15 सितंबर 2026 को केंद्र सरकार ने स्पष्ट किया कि व्यक्ति-से-व्यक्ति यानी P2P UPI लेनदेन पर कोई शुल्क नहीं लगाया जाएगा. ₹2,000 तक के मर्चेंट भुगतान भी शुल्क-मुक्त रहेंगे और छोटे व्यापारियों से जुड़े कई लेनदेन मौजूदा छूट के दायरे में रहेंगे. सरकार के अनुसार लगभग 96 प्रतिशत P2M लेनदेन इस बदलाव से प्रभावित नहीं होंगे.

वहीं, ₹2,000 से अधिक के कुछ मर्चेंट UPI लेनदेन के लिए Merchant Discount Rate (MDR) की व्यवस्था लागू की जा रही है. यह सरकार द्वारा उपभोक्ता से वसूला जाने वाला टैक्स नहीं, बल्कि भुगतान व्यवस्था से जुड़े पक्षों के बीच निर्धारित शुल्क है.

इसलिए तेजस्वी यादव के बयान में UPI शुल्क का मुद्दा उठाया गया है, लेकिन इसे यह कहना कि हर UPI भुगतान पर आम ग्राहक से चार्ज लिया जा रहा है, मौजूदा सरकारी स्पष्टीकरण से मेल नहीं खाता है .

बैंकिंग शुल्क और टैक्स पर भी सवाल

तेजस्वी ने अपनी पोस्ट में बैंक खाते में पैसा रखने, ATM से निकासी, ATM कार्ड, SMS अलर्ट और न्यूनतम बैलेंस जैसे बैंकिंग शुल्कों का भी उल्लेख किया. इन सेवाओं के शुल्क बैंक और खाते की शर्तों के अनुसार अलग-अलग हो सकते हैं.

इसके अलावा उन्होंने खरीदारी पर प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष कर, आय पर टैक्स तथा GST का उल्लेख करते हुए कहा कि आम नागरिक को अलग-अलग स्तरों पर भुगतान करना पड़ता है.

उन्होंने Education Cess, Environment Cess, Health Cess, Agriculture Infrastructure and Development Cess तथा Road and Infrastructure Cess जैसे विभिन्न उपकरों का भी जिक्र किया है.

यहां कर और बैंकिंग शुल्क को एक ही श्रेणी में रखना उचित नहीं होगा.टैक्स सरकार द्वारा कानून के तहत लगाया गया राजस्व है, जबकि बैंकिंग शुल्क किसी सेवा के बदले बैंक या वित्तीय संस्था द्वारा लिया जाने वाला शुल्क हो सकता है.

नोटबंदी को लेकर मोदी सरकार पर सवाल

तेजस्वी यादव ने अपने बयान को 2016 की नोटबंदी से भी जोड़ा.उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उस समय के दावों का संदर्भ देते हुए कहा कि नोटबंदी से भ्रष्टाचार, काले धन और आतंकवाद पर रोक लगाने की बात कही गई थी और अब वे सरकार से नोटबंदी का एक फायदा बताने की मांग कर रहे हैं.

8 नवंबर 2016 को ₹500 और ₹1,000 के पुराने नोटों का वैध मुद्रा का दर्जा वापस लिया गया था. RBI के तत्कालीन नोटिस में इसके उद्देश्यों में नकली नोटों से निपटना, नकदी में जमा काले धन को निष्प्रभावी करना और नकली मुद्रा के जरिए आतंकवाद की फंडिंग रोकना शामिल था.

इस मुद्दे पर तेजस्वी यादव का मौजूदा बयान राजनीतिक आलोचना के रूप में सामने आया है.उनके द्वारा भ्रष्टाचार बढ़ने और नोटबंदी के लाभ पर सवाल उठाने के दावे को अलग से आंकड़ों और आधिकारिक मूल्यांकन के आधार पर परखा जाना आवश्यक है.

Digital India पर राजनीतिक बहस तेज

तेजस्वी यादव ने अपने बयान में डिजिटल भुगतान और नोटबंदी की नीतियों को एक साथ जोड़ते हुए सरकार पर कथनी और करनी में अंतर होने का आरोप लगाया.

दूसरी तरफ, UPI का संचालन NPCI द्वारा किया जाता है और NPCI के अनुसार UPI तत्काल बैंक-टू-बैंक डिजिटल भुगतान की सुविधा देने वाला सिस्टम है.

मौजूदा बदलाव के बाद बहस का एक महत्वपूर्ण प्रश्न यह है कि बड़े डिजिटल मर्चेंट भुगतान की लागत आखिर कौन वहन करेगा और क्या भविष्य में इसका कोई हिस्सा व्यापारियों के माध्यम से उपभोक्ताओं तक पहुंचेगा. सरकार का वर्तमान रुख है कि निर्धारित MDR ग्राहक पर नहीं डाला जाना चाहिए और UPI व्यवस्था की दीर्घकालिक वित्तीय स्थिरता सुनिश्चित करना जरूरी है.

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राजनीतिक बयान से आगे क्या है असली सवाल?

तेजस्वी यादव के बयान ने डिजिटल भुगतान, बैंकिंग शुल्क और कर व्यवस्था को लेकर एक व्यापक राजनीतिक बहस जरूर खड़ी की है.लेकिन अलग-अलग विषयों को अलग करके देखना जरूरी है।

UPI पर लागू होने वाले नए MDR नियम, बैंक द्वारा लिए जाने वाले सेवा शुल्क और सरकार द्वारा लगाए जाने वाले टैक्स तीन अलग-अलग आर्थिक व्यवस्थाएं हैं। इसी तरह नोटबंदी के घोषित उद्देश्य और उसके वास्तविक आर्थिक परिणामों का आकलन भी अलग-अलग आंकड़ों के आधार पर किया जाना चाहिए.

तेजस्वी यादव ने इन मुद्दों को केंद्र सरकार की आर्थिक नीतियों की आलोचना के तौर पर उठाया है। वहीं केंद्र सरकार का कहना है कि नए UPI शुल्क ढांचे का उद्देश्य भुगतान व्यवस्था को दीर्घकालिक रूप से टिकाऊ बनाना है और सामान्य उपभोक्ताओं तथा छोटे व्यापारियों को अतिरिक्त बोझ से बचाना है.

निष्कर्ष

UPI शुल्क, बैंकिंग सर्विस चार्ज और टैक्स को लेकर तेजस्वी यादव के बयान ने एक बार फिर आम उपभोक्ता पर पड़ने वाले आर्थिक बोझ और डिजिटल अर्थव्यवस्था की लागत का सवाल सामने रखा है। हालांकि, मौजूदा UPI नियमों के अनुसार सभी डिजिटल भुगतान पर ग्राहक से शुल्क नहीं लिया जा रहा है। इसलिए इस बहस में राजनीतिक आरोपों के साथ-साथ वास्तविक शुल्क संरचना और उसके प्रभाव को समझना भी जरूरी है।

स्रोत: तेजस्वी यादव का 16 सितंबर 2026 का X पोस्ट के, UPI शुल्क व्यवस्था के लिए वित्त मंत्रालय/PIB का 15 सितंबर 2026 का स्पष्टीकरण के आधार पर विश्लेषण

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