रामविलास पासवान की विरासत और चिराग की राह!

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kmSudha

बिहारतीसरा पक्ष आलेख
रामविलास पासवान की विरासत और चिराग की राह!

क्या लोक जनशक्ति पार्टी अपने मूल स्वरूप से भटकी है?

तीसरा पक्ष डेस्क,पटना, 5 जुलाई 2025: “मैं उस घर में दिया जलाने चला हूं जहाँ सदियों से अंधेरा है…” — यह सिर्फ एक पंक्ति नहीं थी, यह उस मिशन का सार था जिसे श्रद्धेय रामविलास पासवान ने अपने जीवन का उद्देश्य बना लिया था. हालांकि, वे अपने राजनितिक और सामाजिक उद्देश्यों में कितना सफल हुए वह एक अलग विषय है, फिर भी दलित, वंचित, शोषित और उपेक्षित तबकों के लिए वे सिर्फ एक नेता नहीं, बल्कि उम्मीद की किरण थे.

आज उनकी 76वीं जयंती के अवसर पर पूरे देश, खासकर बिहार में उन्हें श्रद्धा और सम्मान से याद किया जा रहा है व उन्हें श्रद्धांजलि दी जा रही है. लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के कार्यकर्ताओं ने पटना स्थित पार्टी कार्यालय में उनके चित्र पर माल्यार्पण कर उन्हें याद किया.

लेकिन एक बड़ा सवाल भी उठ रहा है — क्या उनके पुत्र चिराग पासवान उनकी राजनीतिक विरासत को उसी दिशा में लेकर जा रहे हैं, या फिर राह कहीं बदल गई है.

रामविलास पासवान: राजनीति का समाजवादी स्तंभ

रामविलास पासवान की विरासत और चिराग की राह!

रामविलास पासवान ने अपनी राजनीति की शुरुआत जेपी आंदोलन से की थी. वे सामाजिक न्याय, समता, और अवसर की समानता के प्रबल पक्षधर रहे. उन्होंने संसद में 9 बार प्रतिनिधित्व किया और लगभग हर सरकार में केंद्रीय मंत्री रहे, लेकिन उनकी राजनीतिक पहचान दलितों के मजबूत और प्रखर रिकॉर्ड धारी नेता के रूप में थी.

उनकी लोक जनशक्ति पार्टी (LJP) कभी जाति की राजनीति नहीं, बल्कि जाति और जाति व्यवश्था के खिलाफ राजनीति की रही. वे बाबा साहेब अंबेडकर के विचारों को आधुनिक भारत में आत्मसात करने का प्रयास करते रहे.

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चिराग पासवान: युवाओं का चेहरा या खोती हुई दिशा?

रामविलास पासवान की विरासत और चिराग की राह
रामविलास पासवान जी की जयंती के अवसर पर चिराग पासवान भंडारे में प्रसाद वितरण करते हुए

चिराग पासवान ने अपने पिता की मृत्यु के बाद पार्टी की कमान संभाली, लेकिन उनके नेतृत्व में पार्टी की राजनीतिक दिशा और प्राथमिकताएं बदलती नज़र आईं. वे अधिकतर मोदी-समर्थक राजनीति में डूबे नज़र आए, और धीरे-धीरे LJP दो हिस्सों में बंट गई — एक चिराग के नेतृत्व में और दूसरी पशुपति पारस के नेतृत्व में.

मुख्य अंतर यह है कि जहाँ रामविलास पासवान ने कभी सत्ताधारी पार्टी के साथ रहकर भी अपनी स्वतंत्र सोच और सामाजिक सरोकार नहीं छोड़ा, वहीं चिराग पर “भीड़ के नेता” बनने का दबाव अधिक दिखता है. उनके बयानों और निर्णयों में विचारधारा की स्पष्टता की कमी महसूस होती है.

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तुलना की कुछ प्रमुख बिंदु:

बिंदुरामविलास पासवानचिराग पासवान
राजनीति की प्रेरणासामाजिक न्यायराजनीतिक विस्तार
सत्ता से रिश्तासमझौता, पर आत्मसम्मान के साथसत्ता के साथ सीधी नजदीकी
राजनीतिक रणनीतिविचारधारा आधारितचेहरा और कैम्पेन आधारित
संघर्ष की दिशावंचितों की आवाजयुवाओं की लोकप्रियता, लेकिन अस्पष्ट एजेंडा
पार्टी की अखंडताएकजुट पार्टीदो फाड़ में विभाजित

सवाल जो उठते हैं:
  • क्या चिराग पासवान अपने पिता की तरह नीतिगत स्तर पर सत्ता से संवाद करने का कौशल रखते हैं?
  • क्या लोक जनशक्ति पार्टी अब केवल चिराग पासवान की ब्रांडिंग तक सीमित रह गई है?
  • क्या दलित समाज में अब भी LJP को एक विश्वसनीय विकल्प माना जा रहा है?
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निष्कर्ष:

श्रद्धेय रामविलास पासवान एक विचारधारा थे, जो सत्ता में रहकर भी सिस्टम के खिलाफ लड़ सकते थे. चिराग पासवान के पास युवावर्ग, सोशल मीडिया, और तेज भाषण शैली की पूंजी है, लेकिन वह विचारधारा और मिशन की स्पष्टता से दूर दिखाई देते हैं.

रामविलास पासवान की जयंती पर आज सबसे जरूरी यही है कि LJP खुद से सवाल पूछे —क्या हम अभी भी ‘दिए को अंधेरे में ले जाने’ की राह पर हैं, या फिर हम सिर्फ उस रोशनी की ब्रांडिंग में लगे हैं?

श्रद्धांजलि:

पद्म भूषण श्री रामविलास पासवान जी को शत-शत नमन! आप केवल एक राजनेता नहीं, संविधान की आत्मा के प्रहरी थे. आपके विचार आज भी जीवित हैं, लेकिन उन्हें ज़मीन पर उतारने की जिम्मेदारी अगली पीढ़ी की है — जो कहीं से भी आसान नहीं है.

पद्म भूषण श्रद्धेय रामविलास पासवान जी की जयंती पर भावपूर्ण श्रद्धांजलि!


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