खगड़िया बच्ची मौत मामला: पुलिस पर उठे सवाल, RJD ने बनाई 7 सदस्यीय जांच समिति

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Ajit Kumar

बिहार
खगड़िया बच्ची मौत मामले में RJD नेताओं द्वारा जांच समिति गठन की घोषणा

घटना से इलाके में आक्रोश, चार साल की बच्ची की संदिग्ध हालात में मौत

तीसरा पक्ष ब्यूरो पटना,12 जनवरी 2026— खगड़िया जिले में चार साल की दलित बच्ची के साथ हुए जघन्य अपराध और उसकी मौत ने न सिर्फ इलाके को झकझोर दिया है, बल्कि पुलिस की भूमिका को लेकर भी गंभीर सवाल खड़ा कर दिया हैं. मामले में कार्रवाई की पारदर्शिता और निष्पक्षता को लेकर उठ रही शंकाओं के बीच राष्ट्रीय जनता दल (RJD) ने अब राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर हस्तक्षेप करते हुए सात सदस्यीय जांच समिति का गठन किया है. यह समिति पूरे घटनाक्रम की जांच कर तीन दिनों के भीतर अपनी रिपोर्ट पार्टी के राज्य कार्यालय को सौंपेगी.

प्रदेश राजधानी पटना में सोमवार, 12 जनवरी 2026 को RJD प्रदेश अध्यक्ष मंगनी लाल मंडल ने खगड़िया के गंगौर थाना क्षेत्र अंतर्गत भदास मुसहरी गांव की घटना का जिक्र करते हुए कहा कि 6 जनवरी 2026 की शाम लगभग चार बजे पीड़ित बच्ची अपने घर के पास से अचानक लापता हो गई थी. परिजनों द्वारा खोजबीन के बावजूद जब उसका कोई सुराग नहीं मिला, तो पूरे गांव में दहशत फैल गई.अगले दिन 7 जनवरी को ड्रोन कैमरे की मदद से घर से करीब 500 मीटर दूर सरसों के खेत से बच्ची का शव बरामद हुआ.

पुलिसिया कार्रवाई पर सवाल क्यों?

मंगनी लाल मंडल ने पुलिस की कार्रवाई पर गंभीर सवाल उठाते हुए कहा है कि ,
घटना अत्यंत संवेदनशील है, लेकिन पुलिस का रवैया शुरू से ही संदेह के घेरे में है. एफआईआर में यह स्पष्ट नहीं किया गया कि आरोपी पर कौन-कौन सी धाराएं लगाई गई हैं. इससे पुलिस की मंशा पर सवाल उठना स्वाभाविक है.

उन्होंने यह भी कहा कि 8 जनवरी 2026 को पुलिस द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति में आरोपी की गिरफ्तारी की बात तो कही गई, लेकिन यह नहीं बताया गया कि वह किस कांड संख्या और किन धाराओं में गिरफ्तार किया गया. जबकि ऐसे मामलों में कानूनी स्पष्टता बेहद जरूरी होती है.

आंदोलन करने वालों पर कार्रवाई का आरोप

RJD का आरोप है कि इस मामले में न्याय की मांग कर रहे पार्टी कार्यकर्ताओं और स्थानीय लोगों को आंदोलन के नाम पर फंसाया जा रहा है. प्रदेश अध्यक्ष के अनुसार,पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने की बजाय अगर आवाज उठाने वालों को ही दबाया जाएगा, तो यह कानून-व्यवस्था पर गंभीर प्रश्नचिह्न है.

यह सवाल इसलिए भी अहम हो जाता है क्योंकि मामला एक दलित बच्ची से जुड़ा है, जहां पहले से ही सामाजिक संवेदनशीलता और न्यायिक सतर्कता की अपेक्षा की जाती है.

जांच समिति का गठन

प्रदेश RJD प्रवक्ता एजाज अहमद ने जानकारी दी है कि पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच और तथ्यों की सच्चाई सामने लाने के लिए पार्टी ने औपचारिक जांच समिति गठित की है. इस समिति की अध्यक्षता RJD के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष उदय नारायण चौधरी करेंगे.

जांच समिति में शामिल सदस्य हैं:

अलख निरंजन उर्फ बीनू यादव (राष्ट्रीय महासचिव)

मधु मंजरी (प्रदेश उपाध्यक्ष)

बल्ली यादव (प्रदेश महासचिव सह प्रमंडलीय प्रभारी, मुंगेर)

सारिका पासवान (प्रदेश प्रवक्ता)

राजेश यादव (प्रदेश अध्यक्ष, युवा RJD बिहार)

मनोहर कुमार यादव (जिलाध्यक्ष, खगड़िया)

एजाज अहमद ने कहा,यह समिति घटनास्थल का निरीक्षण करेगी, पीड़ित परिवार से मुलाकात करेगी और पुलिसिया कार्रवाई से जुड़े सभी तथ्यों की जांच कर तीन दिनों के भीतर रिपोर्ट सौंपेगी.

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राजनीतिक बयान या सार्वजनिक चिंता?

यह सवाल भी उठ रहा है कि क्या यह मामला सिर्फ राजनीतिक बयानबाजी तक सीमित रहेगा या इससे प्रशासनिक जवाबदेही तय होगी. राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि ऐसे मामलों में विपक्षी दलों की भूमिका दबाव बनाने की होती है, ताकि जांच प्रभावित न हो और पीड़ित परिवार को न्याय मिल सके.

समाज पर असर

खगड़िया की यह घटना सिर्फ एक आपराधिक मामला नहीं, बल्कि सामाजिक और प्रशासनिक संवेदनशीलता की परीक्षा भी है.एक नाबालिग दलित बच्ची के साथ हुए अपराध के बाद पुलिस की भूमिका पर उठे सवाल यह दर्शाते हैं कि भरोसे की बहाली के लिए पारदर्शी और स्पष्ट कार्रवाई कितनी जरूरी है.

निष्कर्षतः, अब निगाहें RJD की जांच समिति की रिपोर्ट और प्रशासन की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं. यह मामला यह तय करेगा कि बिहार में कानून-व्यवस्था और सामाजिक न्याय के दावों की हकीकत क्या है.

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