शिक्षा व्यवस्था पर उठ रहे सवालों के बीच कांग्रेस का बड़ा हमला
तीसरा पक्ष ब्यूरो नई दिल्ली 1जून 2026 : देश में लगातार सामने आ रहे पेपर लीक मामलों और शिक्षा व्यवस्था को लेकर बढ़ती चिंताओं के बीच कांग्रेस ने केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला है. कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और AICC के मीडिया एवं पब्लिसिटी विभाग के चेयरमैन पवन खेड़ा ने मोदी सरकार की शिक्षा नीतियों और परीक्षा प्रणाली पर गंभीर सवाल उठाया हैं.
दिल्ली में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान पवन खेड़ा ने कहा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा कभी दिया गया नारा ,ना खाऊंगा, ना खाने दूंगा आज लोगों को याद तो है, लेकिन मौजूदा हालात को देखते हुए ऐसा लगता है कि सरकार का वास्तविक नारा न पढ़ूंगा, न पढ़ने दूंगा बन गया है.
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि देश की शिक्षा व्यवस्था लगातार संकट का सामना कर रहा है, लेकिन सरकार और उसके मंत्री इस मुद्दे पर गंभीरता दिखाने के बजाय राजनीतिक बयानबाजी में व्यस्त हैं.
पेपर लीक पर सरकार की चुप्पी पर सवाल
पवन खेड़ा ने कहा कि हाल के वर्षों में कई महत्वपूर्ण प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक की घटनाएं सामने आई हैं. इससे लाखों छात्रों का भविष्य प्रभावित हुआ है. छात्रों ने वर्षों की मेहनत और तैयारी की, लेकिन पेपर लीक की घटनाओं ने उनकी उम्मीदों को झटका दिया है.
कांग्रेस नेता ने दावा किया है कि यदि केंद्र सरकार के मंत्रियों के सोशल मीडिया पोस्ट और सार्वजनिक बयानों को देखा जाए तो शिक्षा व्यवस्था, परीक्षा प्रणाली या CBSE जैसी संस्थाओं में सुधार को लेकर बहुत कम चर्चा दिखाई देती है.
उन्होंने कहा कि जब शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान से पेपर लीक और परीक्षा संबंधी अनियमितताओं पर सवाल पूछा गया, तब उन्होंने सीधे जवाब देने के बजाय राहुल गांधी पर टिप्पणी करना उचित समझा.कांग्रेस का कहना है कि यह छात्रों की समस्याओं से ध्यान भटकाने की कोशिश है.
राहुल गांधी ही नहीं, पूरा देश Frustrated है
अपने संबोधन के दौरान पवन खेड़ा ने व्यंग्यात्मक अंदाज में कहा कि सरकार बार-बार राहुल गांधी को Frustrated बताती है। लेकिन वास्तविकता यह है कि सिर्फ राहुल गांधी नहीं, बल्कि कांग्रेस, छात्र, अभिभावक और पूरा देश परेशान है।
उन्होंने कहा कि देश के करोड़ों युवा अपनी शिक्षा, रोजगार और भविष्य को लेकर चिंतित हैं.लगातार पेपर लीक, भर्ती परीक्षाओं में देरी और परिणामों में अनियमितताओं की खबरें युवाओं के मन में निराशा पैदा कर रही हैं.
कांग्रेस का आरोप है कि सरकार युवाओं के भविष्य को सुरक्षित करने के बजाय राजनीतिक मुद्दों को प्राथमिकता दे रही है. यही कारण है कि छात्रों और अभिभावकों के बीच असंतोष बढ़ता जा रहा है.
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युवाओं के भविष्य का सवाल
भारत दुनिया के सबसे युवा देशों में गिना जाता है.देश की बड़ी आबादी 35 वर्ष से कम उम्र की है. ऐसे में शिक्षा व्यवस्था की मजबूती और पारदर्शिता केवल एक प्रशासनिक मुद्दा नहीं बल्कि राष्ट्रीय विकास का विषय भी है.
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि परीक्षा प्रणाली पर भरोसा कमजोर होता है तो इसका असर न केवल छात्रों के मनोबल पर पड़ता है, बल्कि पूरे रोजगार तंत्र पर भी दिखाई देता है. प्रतियोगी परीक्षाओं में पारदर्शिता और निष्पक्षता सुनिश्चित करना सरकारों की प्राथमिक जिम्मेदारी होती है.
कांग्रेस का कहना है कि सरकार को पेपर लीक जैसी घटनाओं पर सख्त कार्रवाई करनी चाहिए और ऐसी व्यवस्था विकसित करनी चाहिए जिससे भविष्य में इस प्रकार की घटनाओं को पूरी तरह रोका जा सके.
शिक्षा व्यवस्था में सुधार की मांग
कांग्रेस नेताओं का मानना है कि केवल बयान देने से समस्या का समाधान नहीं होगा। शिक्षा व्यवस्था में व्यापक सुधार की आवश्यकता है.परीक्षा संचालन, प्रश्नपत्रों की सुरक्षा, डिजिटल निगरानी और जवाबदेही तय करने जैसे कदमों को प्रभावी ढंग से लागू करना होगा.
साथ ही छात्रों का विश्वास बहाल करने के लिए सरकार को पारदर्शी जांच और दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई करनी चाहिए.लाखों युवाओं का भविष्य किसी भी राजनीतिक बहस से अधिक महत्वपूर्ण है.
निष्कर्ष
पवन खेड़ा के बयान ने एक बार फिर देश में शिक्षा व्यवस्था और पेपर लीक के मुद्दे को राजनीतिक बहस के केंद्र में ला दिया है. कांग्रेस जहां सरकार को युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने का आरोप लगा रही है, वहीं सरकार इन आरोपों को राजनीतिक बता रही है.
लेकिन इस पूरे विवाद के बीच सबसे महत्वपूर्ण सवाल वही है जो देश के करोड़ों छात्र पूछ रहे हैं—क्या उन्हें एक निष्पक्ष, पारदर्शी और भरोसेमंद परीक्षा प्रणाली मिलेगी?
जब तक इस सवाल का संतोषजनक जवाब नहीं मिलता, तब तक शिक्षा व्यवस्था और पेपर लीक का मुद्दा देश की राजनीति और जनचर्चा का अहम विषय बना रहेगा.

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